कल दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के जज को बदलने की एक याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि वादी के मनमुताबिक अदालत के आदेश न होना इस बात का प्रमाण नहीं हैं कि जज ने पक्षपात किया। केजरीवाल ने तो सीधे हाई कोर्ट में खड़े होकर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर पक्षपाती होने का आरोप लगा दिया और कहा कि आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है क्योंकि आप तो RSS से जुड़े संगठन की सभा में गई थी। केजरीवाल की तरफ से जस्टिस शर्मा के बच्चो पर भी कीचड उछाला गया है। केजरीवाल को याद होना चाहिए अनेक जज जैन जिनके बच्चे वकील है, तो क्या सब जगह गड़बड़ होती है। जस्टिस RF Nariman के पिता फली नरीमन सुप्रीम कोर्ट में ही वकील थे, फिर कोई भी कह सकता था बेटे के कोर्ट के लिए बाप सेटिंग करता होगा।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
लेकिन जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल की ED द्वारा गिरफ़्तारी को वैध कहा जिस पर जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता फैसला नहीं कर सके और बड़ी बेंच को भेज दिया लेकिन वह बेंच 12 जुलाई, 2024 से अभी तक गठित नहीं हुई है। वकील था अभिषेक मनु सिंघवी और क्या यह आरोप नहीं लगाया जा सकता कि संजीव खन्ना को कांग्रेस सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में नियुक्त किया था। सिंघवी और खन्ना ने मिलकर ED की गिरफ़्तारी की वैधता को ऐसे लटकाया कि केजरीवाल की मौज चल रही है। ये दो जज जस्टिस शर्मा के फैसले को बदलने की काट नहीं ढूंढ सके लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दूसरे दो जज राष्ट्रपति को आदेश दे दिए। जाहिर है राष्ट्रपति को आदेश भी राजनीतिक था और केजरीवाल के लिए फैसला भी राजनीतिक था।
केजरीवाल को चाहिए अभिषेक मनु सिंघवी से कह कर राज्यसभा में जस्टिस शर्मा के खिलाफ महाभियोग शुरू करा दे। ऐसा माहौल बना दे कि ये तो RSS से जुड़ी है। और नहीं तो कपिल सिब्बल की मदद ले ले। उसने तो जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग शुरू करने की कोशिश की थी क्योंकि वो भी एक हिंदू संस्था की बैठक में गए थे और हिंदुओं के पक्ष में बयान भी दिया था।
केजरीवाल की नीयत एक ईमानदार और संभ्रांत महिला जज को बदनाम करने की है। उसे पता है उसका केस कमजोर है क्योंकि उसने ट्रायल कोर्ट में गड़बड़झाला किया जो जज ने बिना केस के ट्रायल के लिए केजरीवाल और उसके चट्टों बट्टों को डिस्चार्ज कर दिया। स्वर्ण कांता जी अगर उसके खिलाफ निर्णय देती हैं तो यही शोर मचाएगा कि मैंने तो पहले ही कहा था मेरे खिलाफ फैसला आएगा। अर्बन नक्सलों और राहुल गांधी की तरह ये आज से नहीं शुरू से चल रहा है, आरोप लगा कर किसी को भी बदनाम कर दो और फिर भाग लो - लेकिन इस बार ये Contempt of Court में रगड़ा खाएगा जो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बार बार कोर्ट से कह रहे हैं।
केजरीवाल याद रख, नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने कितने मुक़दमे झेले लेकिन कभी किसी जज पर आरोप नहीं लगाए। आफ़ताब आलम सुप्रीम कोर्ट में मोदी के सभी केस देखते थे और अमित शाह को गुजरात से बाहर करने वाली अभिलाषा कुमारी थी जो हिमाचल के CM की बेटी थी लेकिन फिर भी कभी उफ्फ नहीं की लेकिन तेरा तो अभी से पिछवाड़ा जल रहा है।

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