मीडिया का “सुपर पावर” ईरान अब कर रहा त्राहिमाम त्राहिमाम, लेबनान में उसका प्रॉक्सी हिज़्बुल्लाह इज़रायल पर हमले करेगा और इज़रायल चुप रहे कैसे हो सकता है; इज़रायल को ईरान ने ही Ceasefire से अलग रखा था

सुभाष चन्द्र

पिछले कई सप्ताह से हमारे मीडिया ने ईरान को ऐसा हीरो बनाया हुआ था कि जैसे अमेरिका की “सुपर पावर” की गद्दी ईरान ने छीन ली हो और कल से नारा लगा रहा है मीडिया “ट्रंप सरेंडर” जिस ईरान की करेंसी एक करोड़ रियाल हमारे 713 रुपए के बराबर है वो सुपर पावर हो गया। 

वैसे देखा जाए तो हमारे मीडिया में और मुस्लिम कट्टरपंथियों कर इन कट्टरपंथियों के आकाओं में कोई फर्क नहीं। दोनों ही सिक्के के एक पहलु हैं। जब भी कहीं कोई दंगा होता है तो दंगाइयों को पीड़ित बताते हुए victim card खेल दंगाइयों का बचाव करने खड़े हो जाते हैं ठीक वही स्थिति अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध में देखने को मिली। गाज़ा पर इजराइल द्वारा हमला करने पर सभी ने इजराइल को दोषी बताते रहे, लेकिन किसी मीडिया ने यह नहीं बताया कि इजराइल पर पहला हमला आतंकी संगठन हमास ने किया था। दूसरे, खोमैनी ने क्यों कहा कि यहूदियों और इजराइल को नक़्शे से मिटा दूंगा। तीसरे, मीडिया ईरान को बब्बर शेर दिखाने इजराइल, गल्फ देशों और अमेरिका में भेजने की हिम्मत कर सकता है लेकिन ईरान में नहीं, क्यों? कोई भारतीय या विदेशी मीडिया इसका जवाब देगा।        

कैसी कैसी कहानी गढ़ी हमारे मीडिया ने, कुछ मत पूछो हल्ला मचाया कि ईरान ने डिएगो गार्सिया पर मिसाइल दाग दी लेकिन ये नहीं बताया वो मिसाइल गई कहां डिएगो गार्सिया से ईरान की दूरी लगभग 4000 किमी है जबकि तेहरान सार्वजनिक रूप से दावा करता है कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता 2000 किमी तक सीमित है लेकिन फिर भी शोर मचा दिया कि जैसे डिएगो गार्सिया को खत्म कर दिया हो

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अप्रैल 9 की सुबह से ईरान दर्द से कराह रहा है कि लेबनान पर इज़रायल हमले का युद्ध विराम का उल्लंघन कर रहा है विदेश मंत्री अराघची ने कहा है कि -

ईरान -US युद्ध विराम की शर्तें स्पष्ट हैं -

अमेरिका को चुनना है युद्ध या ceasefire

सीजफायर और युद्ध एक साथ संभव नहीं 

दुनिया लेबनान में नरसंहार को देख रही है

आज ईरान Ceasefire याद करा रहा है जबकि ईरान ने Ceasefire होते ही कहा था इज़रायल के लिए यह Ceasefire नहीं होगा। ईरान ने Ceasefire होते ही कुवैत, सऊदी और बहरीन पर हमले किये थे जैसे उसे युद्ध विराम चाहिए ही नहीं था

जब ईरान ने इज़रायल को खुद ही उससे अलग कर दिया तो अब लेबनान को उसमे शामिल करने के लिए कैसे कह सकता है ईरान चाहता है लेबनान से उसका प्रॉक्सी हिजबुल्लाह इज़रायल पर हमले करता रहे लेकिन इज़रायल चुप रहे बड़ी अजीब बात है ईरान लेबनान को Ceasefire में शामिल करना चाहता है लेकिन इज़रायल को नहीं

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ़ किया है लेबनान Ceasefire में शामिल नहीं था। ईरान को समझने में गलती हुई, ईरान समझौते से पीछे हटा तो गंभीर परिणाम

हमारे मीडिया ने पूरे युद्ध में एकतरफा ट्रंप के खिलाफ रिपोर्टिंग की है बड़े बड़े मिलिट्री ऑफिसर्स भी खुलकर ट्रंप को पेलने में लगे थे ऐसा प्रोजेक्ट किया गया जैसे सारा नुकसान  अमेरिका और इज़रायल का ही हुआ हो और ईरान का कुछ नहीं बिगड़ा अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन पर हल्ला मचा दिया लेकिन यह नहीं समझा कि अमेरिका एक लोकतांत्रिक देश है ईरान के खामनेई तो अपने ही देश के 40 हजार प्रदर्शनकारियों को गोलियों से भून दिया जबकि ट्रंप ने किसी पर गोली नहीं चलाई

आज मेरे मित्र संजय भाई ने लिखा है कि ईरान का क्या क्या नुकसान हुआ लेकिन मीडिया में कभी कोई रिपोर्ट नहीं दी गई -

115 एक्सट्रीम हाई-वैल्यू लीडर्स हूर धाम पहुंच चुके हैं

145 नेवल वेसल्स मतलब पुरी नेवी लगभग खत्म है

54 एयरक्राफ्ट का रायता हो चुका है एयरफोर्स का बुरा है

200+ मिसाइल लॉन्च साइट्स तबाह हो चुकी हैं

इस्फ़हान, नतांज, फोर्डो जैसे न्यूक्लियर और मिसाइल सेंटर पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए हैं

8000+ मौतें हो चुकी हैं

16,000 से ज्यादा प्रिसीजन स्ट्राइक,

25,000 घायल 

आधा ईरान खंडहर में बदल चुका है जिसे रिकंस्ट्रक्ट में दशकों लगेंगे

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