अमेरिका के Secretary of State मार्को रुबियो ने साफ़ घोषणा कर दी कि अब से अमेरिका अंतरराष्ट्रीय और अमेरिका के NGOs पर करोड़ों डॉलर खर्च नहीं करेगी। अब यह राशि सीधी विभिन देशों की सरकारों को दी जाएगी जिससे पैसे का लाभ सीधा जरूरतमंदो को मिले, NGOs जैसे बिचौलियों के हाथ न पड़े।
अमेरिका की यह घोषणा भारत में फलफूल रहे NGO उद्योग और धर्मांतरण में लिप्त संगठनों पर किसी वज्रपात से कम नहीं है। मोदी सरकार इसलिए FCRA कानून में संशोधन की तैयारी में लगी है जिससे कांग्रेस और अन्य सेकुलर दलों के पेट में मरोड़ें पैदा हो गई है। यह फंडिंग 16000 NGOs को करीब 22 हजार करोड़ मिलती है जिस पर किसी की कोई जवाबदेही नहीं है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
Cardinal Baselios has claimed “FCRA amendment bill has caused anxiety and pressure among Christian Communities”. ऐसी चिंता(anxiety) कभी उन्हें तब नहीं हुई जब ईसाइयों के गांव के गांव वक्फ बोर्ड ने हड़पने की कोशिश की। इनकी चिंता अब इसलिए बढ़ रही है क्योंकि इस बिल से विदेशी धन पर रोक लगेगी खासकर conversion related activities पर।
सबसे बड़ी बात है कांग्रेस और वामपंथी इन NGOs को मिलने वाले धन से धर्मांतरण को बढ़ाने के अलावा सरकार के खिलाफ नेरेटिव सेट कर लोगों को सरकार के खिलाफ प्रभावित करने का खेल भी खेलती हैं।
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में साफ़ किया था कि ईसाई या मुस्लिम मजहब में जाने के बाद व्यक्ति को SC/ST के आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। वैसे तो यह निर्णय भी धर्मांतरण के उद्योग पर देश भर में प्रभाव डाल सकता है लेकिन पंजाब जैसे राज्य के लोगों को ज्यादा सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि इस समय ईसाई मिशनिरिओं का सिखों को ईसाई बनाने का खेल वहां बड़े पैमाने पर चल रहा है।
यदि किसी हिंदू, सिख, बौद्ध या जैन का धर्मांतरण ईसाई या इस्लाम में कराया जाता है तो उसका नए मज़हब के अनुसार नाम भी परवर्तित करना अनिवार्य होना चाहिए क्योंकि बिना नाम बदले आरक्षण का लाभ लेने की संभावना बनी रह सकती है क्योंकि नाम से तो वह हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन ही प्रतीत होगा।
कांग्रेस का हाल ख़राब है। चुनाव प्रचार में लगे सभी सांसदों को उसने दिल्ली बुला लिया है क्योंकि “किसी भी हाल” में बिल को रोकना है। अभी वक्फ कानून ने ही कांग्रेस और मुस्लिम अल्पसंख्यक नेताओं की नींद उड़ाई हुई थी, अब ये कानून और उनके मंसूबों पर पानी फेर देगा।
देश के अर्बन नक्सलों की अब शामत आएगी!

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