OPEC की स्थापना 1960 में Iran, Iraq, Kuwait, Saudi Arabia, and Venezuela ने मिल कर की थी जिसमें UAE 1967 में शामिल हुआ था। UAE ने एक मई से OPEC और OPEC Plus से बाहर होने की घोषणा कर दी। यानी करीब 60 साल बाद UAE ने इन संगठनों को छोड़ा है जिसका मुख्य कारण मुझे लगता है सऊदी अरब और पाकिस्तान का सैन्य गठजोड़ है।
UAE के छोड़ने के समय OPEC के सदस्य हैं। अल्जीरिया, कांगो, Equatorial Guinea, Gabon, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, सऊदी अरब और वेनेजुएला।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
ईरान युद्ध के पहले ही सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक रक्षा समझौता हुआ था जिसके अनुसार एक देश पर हुआ कोई हमला दूसरे पर भी माना जाएगा लेकिन ईरान सऊदी अरब पर हमले करता रहा पर पाकिस्तान ने साथ नहीं दिया। उसके बाद पाकिस्तान ने अपनी सैनिक और लड़ाकू विमान सऊदी अरब भेजे हैं क्योंकि सऊदी ने भी अपना पैसा मांग लिया था। लगता है बस यही UAE के OPEC छोड़ने की वजह है। उसने पाकिस्तान से अपने 3.5 बिलियन डॉलर भी वापस ले लिए और हो सकता है, वह भी देने के लिए सऊदी ने मदद की होगी।
OPEC का तेल उत्पादन 35 मिलियन बैरल per Day (mbd) है जिसका 25% यानी 9 mbd सऊदी अरब का उत्पादन है। UAE का उत्पादन 3.1 mbd है जिसे वह 2027 तक 5 mbd कर सकता है। OPEC अपने सदस्यों के उत्पादन और कीमतों को भी कंट्रोल करता है लेकिन अब UAE इन बंधनों से मुक्त हो जाएगा। अब वह भारत के साथ भी नए सिरे से तेल सप्लाई पर डील कर सकता है - वह सप्लाई होर्मुज से नहीं ओमान के रास्ते से होगी।
भारत की अपनी रोजाना की कुल खपत 55 लाख बैरल तेल का लगभग 10% यानी 4.5 लाख बैरल कच्चा तेल UAE से आयात करता है। जाहिर है UAE के OPEC से अलग होने पर उसकी सप्लाई भारत को बढ़ सकती है। अभी भारत UAE का व्यापार रुपए और दिरहम में होता है, न कि डॉलर में।
यह संयोग है कि 22 अप्रैल को अजित डोभाल UAE गए थे और एक सप्ताह बाद UAE की घोषणा होती है। अभी 4 यूरोपीय देशों की यात्रा से पहले मई के मध्य में प्रधानमंत्री 4 घंटे के लिए UAE में रुक कर UAE President Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात करेंगे और हो सकता है इसी मीटिंग में आयल के बारे में डील हो जाए। शेख और मोदी के आपसी संबंध वैसे भी बहुत मधुर हैं बल्कि निजी तौर पर बहुत प्रघाड़ हैं -कुल मिलाकर भारत के लिए अब बेहतर होगा।
UAE पर ईरान ने ड्रोन से 2200 हमले किये। सऊदी अरब को भी ईरान ने बहुत ठोका है और अगर युद्ध फिर भड़का और कल को सऊदी ने पाकिस्तान को ईरान पर परमाणु बम चलाने के लिए कहा तो वह कभी नहीं करेगा क्योंकि उसका वह बम तो भारत के लिए बना था या उसे वो इज़रायल पर चलाएगा लेकिन अपने किसी मुस्लिम देश पर नहीं।
भारत में कांग्रेस UAE से भारत को आयल सप्लाई बढ़ने पर बिल्कुल भी खुश नहीं होगी। वह तो अभी चीन के साथ मिलकर भारत के अंडमान निकोबार प्रोजेक्ट को बंद कराने के लिए जोर लगा रही है। बस देश की प्रगति नहीं होनी चाहिए, यह एकमात्र लक्ष्य है कांग्रेस का।

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