दिल्ली में 150 अवैध घरों पर बुलडोजर एक्शन, शालीमार बाग में चल रही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई: छावनी में तब्दील पूरा इलाका


दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में रविवार (31 मई 2026) की सुबह बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया गया। मैक्स हॉस्पिटल रोड पर सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत 150 से अधिक अवैध निर्माणों को हटाया जा रहा है।

दिल्ली में राज चाहे किसी भी पार्टी का हो लेकिन अतिक्रमण पर कार्रवाही सिर्फ हिन्दू क्षेत्रों में ही क्यों होती है? जबकि हर पार्टी जानती है कि जितना अतिक्रमण मुस्लिम क्षेत्रों में हुआ है शायद ही कहीं और हुआ हो। जामा मस्जिद क्षेत्र का पुराना नक्शा निकालो और आज का फर्क अपने आप सामने आ जाएगा। इतना ही नहीं नक़्शे की भी जरुरत नहीं मकानों में निकले छज्जों के नीचे की सरकारी जमीन को दुकानों में मिला दिया गया है। पटरियां चलने काबिल नहीं। कहीं कारों का जमावड़ा और कहीं रिक्शाओं का। पैदल चलने वाला सड़क पर चलने को मजबूर है। मीना बाजार की कितनी बार सफाई की गयी, फिर वही अतिक्रमण।   

प्रशासन ने सुबह करीब चार बजे से कार्रवाई शुरू की। इलाके में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान बड़ी संख्या में तैनात किए गए हैं।

जिन मकानों पर कार्रवाई हो रही है, उनमें कई पुराने और बहुमंजिला भवन भी शामिल हैं। मकान मालिकों को पहले ही नोटिस देकर 30 मई तक घर खाली करने के निर्देश दिए गए थे। हालाँकि कुछ लोग अभी तक पूरी तरह सामान नहीं निकाल पाए थे।

सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद शुरू हुई कार्रवाई

यह ध्वस्तीकरण अभियान सड़क चौड़ी करने की योजना का हिस्सा है। प्रशासन के अनुसार, आउटर रिंग रोड से आजादपुर मंडी जाने वाले मार्ग को संजय गाँधी ट्रांसपोर्ट नगर से सीधे जोड़ने के लिए यह कदम उठाया गया है।

सड़क के बीच में आने वाले मकानों को हटाना जरूरी बताया गया था। प्रभावित लोगों ने इस कार्रवाई के खिलाफ पहले दिल्ली हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने भी शनिवार (30 मई 2026) तक मकान खाली करने का निर्देश दिया था।

नोटिस मिलने के बाद कई परिवार अपने घर खाली कर चुके थे और सामान भी हटा लिया था जबकि कुछ घरों में अभी भी सामान मौजूद है। तय समय सीमा समाप्त होने के बाद रविवार सुबह प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी।

मौके पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी तरह के विरोध-प्रदर्शन या झड़प की आशंका को देखते हुए बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

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