कल इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विक्रम डी चौहान ने राहुल गांधी के देश विरोधी बयान के लिए उसके खिलाफ FIR दर्ज करने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने संभल की अदालत में राहुल गांधी के आपत्तिजनक बयानों के लिए (जिन्हें उसने राजद्रोह बताया था) केस दर्ज कर राहुल के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी लेकिन संभल कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी। सिमरन गुप्ता ने कहा था कि उसके बयान जनता की भावनाओं को भड़काने वाले है और राजद्रोह की श्रेणी में आते हैं और इसके लिए उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
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संभल कोर्ट ने सिमरन की अर्जी ख़ारिज कर दी थी और कल उसके खिलाफ अपील इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी खारिज कर दी।
अगर मान भी लिया जाए कि राहुल गांधी ने Fight against govt of india कहा तब भी वह पुराने IPC के सेक्शन 124(a) और वर्तमान BNSS की धाराओं में यह “राजद्रोह” की श्रेणी में आता है।
“fighting against the Government of India or attempting to overthrow it is covered under the Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023, which replaced the Indian Penal Code (IPC) on July 1, 2024. While the BNS officially repealed Section 124A (Sedition) of the IPC, it has introduced a new, arguably broader, provision under Section 152 that deals with "acts endangering sovereignty, unity, and integrity of India".
(Section 152 BNS): Criminalizes acts threatening the nation's sovereignty, unity, and integrity through violence, subversion, or secessionist.
इसका मतलब यही है कि संभल कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट की नज़र में Government of India के खिलाफ युद्ध छेड़ना कुछ गलत नहीं है। यानी हाई कोर्ट ने राहुल गांधी के राजद्रोह के जरिये “गृहयुद्ध” छेड़ने की अनुमति दे दी। वो पहले ही नेपाल की तरह Gen-Z के जरिये मोदी को उखाड़ फेंकने की योजना बनाता रहता है और अब उसे हाई कोर्ट का साथ मिल गया।
पता नहीं सिमरन गुप्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ और फिर सुप्रीम कोर्ट जाने की हिम्मत रखती हैं या नहीं लेकिन मुझे नहीं लगता इस निर्णय में कोई बदलाव करेगा। सुप्रीम कोर्ट तो इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगा देगा क्योंकि वहां से तो कांग्रेस नेताओं को राहत मिल ही जाती है। सबसे बड़ी राहत तो कांग्रेस परिवार से आने वाले जस्टिस बीआर गवई ने दी थी उसकी सजा पर रोक लगा कर जिसकी वजह से राहुल गांधी आज देश विदेश में भारत के खिलाफ विषवमन करता फिरता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ को कल के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए, चाहे फिर सुप्रीम कोर्ट जो मर्जी फैसला करे। लेकिन कल के फैसले ने राहुल गांधी को “गृहयुद्ध” छेड़ने की अनुमति दे दी है।

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