पाकिस्तान शुरू से आतंक के रास्ते चल कर परमाणु बम बना कर अपनी जनता का पेट नहीं भर सका और आज कटोरा हाथ में लिए घूमता फिर रहा है। इस हाल में ईरान भी पहुँच चुका है। वह भी परमाणु हथियारों, 440 किलो यूरेनियम और आतंक से 9 करोड़ आबादी का पेट नहीं भर सकता। कोई नहीं जानता अमेरिका और इज़रायल के हमलों में ईरान कितना बर्बाद हुआ है क्योंकि किसी पत्रकार को वहां घुसने की इज़ाज़त नहीं है। हमारे पत्रकार तो क्या दुनिया भर के पत्रकार अमेरिका में ट्रंप का विरोध दिखा देंगे, इज़रायल में हुआ नुकसान दिखा देंगे और मिडिल ईस्ट के देशों में ईरान के हमलों से नुकसान दिखा देंगे लेकिन कोई ईरान में नहीं घुस सकता।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
आज भी ईरान अमेरिका और इज़रायल को धमकी देने से बाज नहीं आ रहा। क्या मिलेगा ईरान को आगे और युद्ध करके? अमेरिका के वह केवल मिडिल ईस्ट देशों में उसके बेस पर नुकसान कर सकता है या अपने ही मुस्लिम साथी देशों का नुकसान कर सकता है। इतना ही नहीं वह उन देशों के आयल संयंत्रों पर भी हमले करने से पीछे नहीं हटा। लेकिन ईरान भूल रहा है कि उसकी आमदनी का स्रोत केवल तेल है और अगर अमेरिका/इज़रायल ने उसके तेल भंडार ख़त्म कर दिए तो वह कहीं का नहीं रहेगा।
युद्ध कितना भी चले, अमेरिका/इज़रायल अपनी जनता का पेट पाल लेंगे क्योंकि वो किसी भी हाल में आर्थिक रूप से संपन्न है लेकिन ईरान भूखा बर्बाद हो जाएगा और हो रहा है। आज एक डॉलर 14 लाख ईरानी रियाल के बराबर है। होर्मुज को गुंडागर्दी से बंद किया लेकिन आज उसके ही आयल टैंकर नहीं निकल पा रहे क्योंकि अमेरिका ने नाकेबंदी कर दी है।
यही कारण है कि ईरान इस समय अमेरिका से समझौते के लिए बेताब है। उसको समझ आया है कि पाकिस्तान अमेरिका का साथ दे रहा है लेकिन पाकिस्तान ईरान के लिए भी रास्ते खोल रहा है और ये पाकिस्तान की बर्बादी का भी कारण बनेगा क्योंकि इज़रायल के निशाने पर अब पाकिस्तान आ जायेगा अगर वह ईरान के साथ खड़ा हो गया।
ईरान का विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) दूसरे दौर की बातचीत के लिए पहले पाकिस्तान गया, फिर ओमान गया (ओमान जिसके तेल के ठिकाने ईरान ने बर्बाद किये) और उसके बाद रूस गया। केवल इसलिए कि कोई अमेरिका से समझौते का रास्ता निकाल दे। शायद इसलिए ही ट्रंप और पुतिन के बीच डेढ़ घंटे बात हुई है एक दिन पहले। लेकिन शायद कोई हल नहीं निकला। रूस क्या हल निकलेगा जब वह अपने यूक्रेन युद्ध का हल नहीं निकाल पाया?
Iran has targeted oil fields, refineries, and storage facilities in the UAE, Qatar, Saudi Arabia, Bahrain, Iraq, and Oman as part of a significant escalation in regional conflict. Key strikes, often using drones and missiles, severely impacted the UAE’s Fujairah port and Qatar’s Ras Laffan LNG.
इसलिए अब ईरान को अपने तेल के अड्डों पर हमलों के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि अब अगर युद्ध शुरू हुआ तो वे टारगेट बनेंगे।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ विदेश मंत्री को हटाना चाहते है क्योंकि उनका मानना है कि अब्बास अराघची उनकी सरकार के साथ नहीं बल्कि IRGC के इशारों पर चल रहे हैं। यह ईरान में साफतौर पर पड़ी फूट को दर्शाता है। आज सच्चाई यही लगती है कि ईरान को IRGC ने कब्जे में ले लिया है जैसे पाकिस्तान को असिम मुनीर ने ले रखा है और इसलिए अमेरिका को जो भी धमकी दी जा रही हैं वो IRGC की तरफ से दी जा रही हैं।
बेहतर होगा ईरान हिज़्बुल्ला, हमास और हूतियों को छोड़ शांति का मार्ग तलाश करे वरना उसे बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता। ईरान पर हमलों का असली कारण दुनिया के लगभग 122 आतंकी संगठनों को मदद करता है।

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