देश को खतरे में ना डालें, मंदिर के प्रसाद की तरह जमानत दीजिए लेकिन वो जमानत पर रह कर अपराध करें तो उसकी जिम्मेदारी भी सुप्रीम कोर्ट ले

सुभाष चन्द्र

देश में सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हो गई है कि संसद कानून बनाती है लेकिन सुप्रीम कोर्ट उसमें नुक्ताचीनी करके अपने नियम बनाकर कानून को कुंद करने का काम करता है।  PML Act, पोक्सो एक्ट में इतनी व्याख्या कर दी कि उन कानूनों की प्रासंगिकता को हाशिए पर ला दिया अब UAPA के लिए जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस भुइया की पीठ ने व्याख्या कर दी कि Bail is a rule, jail is an exception का नियम उसमें भी लागू होता है 

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चर्चित YouTuber 
UAPA के सेक्शन 45D(5) में जमानत देने के लिए पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत मिले स्वतंत्रता के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकती ये कहते हुए उन्होंने जम्मू कश्मीर के हाई प्रोफाइल नार्को टेरर (नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकी फंडिंग) के अपराध में 5 साल से ज्यादा समय से सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जमानत दे दी मतलब स्वतंत्र कर दिया आर्टिकल 21 में जिससे वह किसी और तरीके से वही अपराध कर सके

जम्मू कश्मीर में 2019 से 2023 के बीच 3,662 लोग UAPA में गिरफ्तार हुए और इसमें 23 को दोषी करार दिया गया बाकी केस चल रहे होंगे दोषसिद्धि न होने का सबसे बड़ा कारण है कि ट्रायल कोर्ट अपराध के ऐसे सबूत चाहते है कि अपराध की जैसे कोई वीडियो रिकॉर्डिंग चल रही हो यही कारण है कि लोग छूट जाते हैं इसी अंतराल में UAPA  में कुल 10,440 गिरफ़्तारी हुई लेकिन सजा 335 को हुई

सुप्रीम कोर्ट अपना अलग दर्शनशास्त्र बना देता है एक केस में कहा कि “mere association or Passive support” for a terrorist organisation is insufficient to attract UAPA charges. There must be clear, discernible evidence of an intent to further the activities of a terrorist organisation or overt acts of violence”. 

अब सोचिए terrorist organisation आतंक या हिंसा का इरादा साबित करना क्या आसान काम है, वो तो जब वह कांड कर देगा तब ही पता चलेगा लेकिन उसमें भी गिरफ्तार लोगों को article 21 का सहारा मिलेगा सबसे बड़ी बात तो यह है कि किसी व्यक्ति का mere association or Passive support आतंकी संगठन की हिंसक/आतंकी गतिविधि में बहुत बड़ा योगदान दे सकता है

पहलगाम हमला करने वालों को एक गाइड ने अपने घर में शरण दी थी और उन्होंने 26 हिंदुओं की निर्मम हत्या कर दी गाइड को क्या आतंकियों के साथ mere association or Passive support मान कर छोड़ दिया जाए?

ये माना बहुत undertrial वर्षों तक जेल में रहते हैं और उन पर मुकदमे पूरे नहीं होते उन्हें छोड़ने की आदेश दीजिये लेकिन आपने तो खालिद ओमर और शरजील इमाम के दिल में एक आशा की किरण जगा दी अगर इनको जमानत दी जाए तो क्या देशभक्ति की काम में लग जाएंगे? जी नहीं, ये अन्य उत्पात मचाने की तैयारी करेंगे

सुप्रीम कोर्ट का Bail is a rule, jail is an exception का दर्शन शास्त्र State of Rajasthan vs Balchand alias Baliya(1977) से शुरू हुआ था 1978 के Motiram vs State of MP में फिर दोहराया गया उसके बाद कितने मामलों में इसे क्रियान्वित किया गया यह मालूम नहीं लेकिन 2022 में फिर सुनाई दिया Satender Kumar Antil vs CBI के केस में

वैसे तो आर्टिकल 21 में अपराधी मौज ले रहे हैं और पिछले 12 साल में article 19 ने कहर ही ढहा दिया है, हर किसी को कुछ भी बोलने की आज़ादी है और कांग्रेस के नेताओं में तो इस आर्टिकल के तहत प्रधानमंत्री मोदी को नई नई गाली देने की होड़ लगी रहती है

अब ये Bail is a rule, jail is an exception का मामला 5 जजों की संविधान पीठ को भेजा गया है आशा तो नहीं है कुछ तार्किक निर्णय होगा लेकिन पीठ को देश की सुरक्षा को ध्यान में रख कर निर्णय देना चाहिए देश सुरक्षित नहीं होगा तो जो आतंकी आग लगा सकते हैं उसमें सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के न्यायाधीशों समेत किसी के भी परिवार झुलस सकते हैं 

एक फितूर को सुप्रीम कोर्ट के जजों को अपने दिमाग से निकाल देना चाहिए कि “हम सुप्रीम हैं और हम जो कहेंगे वो ही सही होगा” राष्ट्र को सर्वोपरि मानकर चलें 

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