राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस का एक और शर्मनाक रिकॉर्ड, बंगाल-असम-तमिलनाडु में भी मिली करारी हार


कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने चुनावी हार का एक ऐसा ‘कीर्तिमान’ स्थापित कर लिया है, जो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में विरला है। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी के ताजा नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस अब देश की राजनीति में एक अप्रासंगिक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है। आंकड़े गवाह हैं कि 2004 में राजनीति में प्रवेश करने के बाद से, राहुल गांधी के साये में कांग्रेस लोकसभा और विधानसभाओं के 99 चुनाव हार चुकी है। हार की इस ‘नर्वस नाइंटी’ पर खड़ी कांग्रेस आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। विडंबना यह है कि जैसे-जैसे पार्टी में राहुल गांधी की जिम्मेदारी और कद बढ़ा, वैसे-वैसे कांग्रेस का ग्राफ रसातल की ओर गिरता गया। महासचिव से लेकर अध्यक्ष पद तक, उनके दौर में पार्टी ने न केवल सत्ता गंवाई, बल्कि अपनी वैचारिक जमीन भी खो दी। राज्यों से लगातार होते सूपड़ा साफ के बीच अब ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की वह कल्पना धरातल पर उतरती दिख रही है, जिसकी कभी उनके विरोधियों ने बात की थी। ये ताजा परिणाम केवल एक चुनावी हार नहीं, बल्कि कांग्रेस के धीरे-धीरे मिटते जाने का संकेत हैं।
                                                                                                          साभार सोशल मीडिया 

बंगाल में मिली शर्मनाक हार
पश्चिम बंगाल के नतीजों ने कांग्रेस की राष्ट्रीय स्थिति पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया है। जहां भाजपा ने ममता बनर्जी की अजेय मानी जाने वाली सत्ता को उखाड़ फेंका और बहुमत का आंकड़ा पार किया, वहीं राहुल गांधी की कांग्रेस एक अदद सीट के लिए तरसती नजर आई। टीएमसी और बीजेपी की सीधी जंग में कांग्रेस का अस्तित्व पूरी तरह मिट गया। हार नंबर 99 के साथ राहुल गांधी अब ‘हार की सेंचुरी’ के मुहाने पर खड़े हैं।
असम में हिमंत का क्लीन स्वीप
असम में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने न केवल सत्ता में वापसी की, बल्कि कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में भी सेंध लगा दी। राहुल गांधी के प्रचार और ‘गारंटी’ के दावों के बावजूद कांग्रेस यहां एक सशक्त विपक्ष बनने में भी विफल रही।
तमिलनाडु में कांग्रेस गठबंधन पस्त
तमिलनाडु में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। थलापति विजय की पार्टी टीवीके (TVK) ने सीटों का शतक लगाकर इतिहास रच दिया और स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की विदाई कर दी। राहुल गांधी के लिए यह हार इसलिए भी बड़ी है क्योंकि तमिलनाडु को कांग्रेस का सुरक्षित किला माना जा रहा था, लेकिन टीवीके के उदय और भाजपा-एआईडीएमके गठबंधन की मजबूती ने कांग्रेस को चुनावी मैदान से बाहर कर दिया।
पुडुचेरी में बीजेपी का परचम
पुडुचेरी में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। यहां राहुल गांधी का कोई भी दांव सफल नहीं रहा। स्थानीय मुद्दों पर पकड़ की कमी और संगठन के भीतर अंतर्कलह ने कांग्रेस को पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिया। मतदाताओं ने राहुल की नीतियों को पूरी तरह नकारते हुए भाजपा के ‘विकास मॉडल’ पर अपनी मुहर लगा दी है।

No comments: