लगातार पोल खुलने पर भी बाज नहीं आ रहे राहुल गांधी

आखिर INDI गठबंधन राहुल गाँधी का क्यों पिछलग्गू बना हुआ है जो खुद तो डूब ही रहा है गठबंधन को भी डुबो रहा है। आखिर गठबंधन की ऐसे कौन-सी दुखती नब्ज राहुल ने पकड़ी हुई है। या यूँ भी कहा जा सकता है कि INDI गठबंधन महामूर्खों का जमघट है। इनको नहीं मालूम कि तुम्ही लोगों के कंधे पर बैठ ये और कांग्रेस सुरमाभोपाली बने हुए हैं। अभी जो 5 राज्यों में हुए चुनाव के चुनावी रुझानों में कांग्रेस और INDI गठबंधन की जो पतली हालत हुई है उसके लिए जिम्मेदार सिर्फ राहुल की गलत और गुमराह करने वाली सोंच है।    
नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की राजनीति अब तथ्यों, तर्कों और जिम्मेदारी से ज्यादा सनसनी, भ्रम और झूठे नैरेटिव पर टिकती दिख रही है। संसद से सड़क तक वे लगातार ऐसे झूठे आरोप उछालते रहते हैं, जिनका या तो बाद में खुद उनके ही दावों से खंडन हो गया, या फिर अदालत, सेना, चुनाव आयोग और सरकारी रिकॉर्ड ने उनकी बातों की धज्जियां उड़ा दीं। कभी सेना के “हाथ बांध देने” का आरोप लगाकर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए, तो कभी चुनाव आयोग को “वोट चोरी” का औजार बताकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर हमला किया गया। संसद में बोलने नहीं देने का रोना रोने वाले राहुल गांधी की पोल खुद लोकसभा के रिकॉर्ड ने खोल दी। कई महत्वपूर्ण बहसों में राहुल ने स्वयं हिस्सा तक नहीं लिया। यह सिर्फ राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि झूठ को हथियार बनाकर देश में अविश्वास फैलाने की राजनीति है। 

सबसे चिंताजनक बात यह है कि राहुल गांधी के आरोप अक्सर अधूरी जानकारी, गलत तथ्यों और भावनात्मक उकसावे पर आधारित होते हैं। राफेल से लेकर अग्निवीर, EVM से लेकर विदेशी नेताओं की मुलाकातों तक, बार-बार उनके दावों की हवा निकलती रही, लेकिन झूठ का सिलसिला नहीं रुका। कभी सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगनी पड़ी, तो कभी सेना और चुनाव आयोग को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी। यदि नेता प्रतिपक्ष ही बिना प्रमाण के आरोपों की राजनीति करेगा, तो इससे सिर्फ उसकी विश्वसनीयता नहीं गिरेगी, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा भी कमजोर होगा। हिट और रन की पॉलिटिक्स कभी भी मेहनत और परिश्रम का विकल्प नहीं हो सकती।दरअसल, राहुल हर हार, हर विवाद और हर असफलता का दोष किसी न किसी संस्था पर डालते हैं, लेकिन आत्ममंथन से लगातार बचते रहते हैं। 

गृहमंत्री ने संसद में राहुल के मौन से खोली झूठ की पोल

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अक्सर संसद के बाहर मोदी सरकार पर आरोप लगाते हैं कि उन्हें संसद में बोलने ही नहीं दिया जाता। लेकिन लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के इस दावे की जोरदार तरीके से पोल खोल दी। अमित शाह ने सदन में रिकॉर्ड रखते हुए बताया कि 16वीं लोकसभा में राहुल गांधी ने 2014, 2015, 2017 और 2018 में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में हिस्सा तक नहीं लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने किसी बजट चर्चा और किसी सरकारी विधेयक पर भी भागीदारी नहीं की। शाह ने 17वीं लोकसभा के आंकड़े गिनाते हुए कहा कि 2019, 2020 और 2021 में भी राहुल राष्ट्रपति अभिभाषण की चर्चा से दूर रहे, जबकि कई बजट चर्चाओं में भी शामिल नहीं हुए। राहुल गांधी के राजनीतिक झूठ पर यह तथ्यात्मक जवाब करारा प्रहार बनकर सामने आया।

सेना के ‘हाथ बांध देने’ के आरोप की पूर्व आर्मी चीफ ने धज्जियां उड़ाईं

लोकसभा में राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक Four Stars of Destiny का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि चीन के साथ तनाव के दौरान मोदी सरकार ने सेना के “हाथ बांध दिए” थे। लेकिन बाद में खुद जनरल नरवणे की ओर से स्पष्ट किया गया कि भारतीय सेना को जमीनी हालात के अनुसार कार्रवाई के लिए पूरा “फ्री हैंड” दिया गया था और सेना ने मजबूती से चीन का सामना किया। राहुल गांधी ने जिस किताब के अंशों के सहारे सरकार और सेना के नेतृत्व पर सवाल खड़े करने की कोशिश की, वह किताब अब तक अप्रकाशित है और उसी किताब के लेखक की सफाई ने उनके आरोपों की हवा निकाल दी। राजनीतिक लाभ के लिए सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर आधे-अधूरे तथ्यों के आधार पर बयान देना आखिरकार राहुल गांधी पर ही भारी पड़ गया।

‘वोट चोरी’ के झूठ पोल खुली, शाह ने बताया ऐसे रचा भ्रम

राहुल गांधी ने जो आरोप महीनों से देशभर में घूम-घूमकर उछाले, वही आरोप शाह ने चुन–चुनकर, तथ्य पर तथ्य रखकर, और सार्वजनिक दस्तावेज़ों के हवाले से इस तरह ध्वस्त किए कि पूरी कांग्रेस उस झटके से उबरने की स्थिति में भी नहीं दिखी। राहुल का सबसे बड़ा आरोप यही था कि देश में “वोट चोरी” हुई है। लेकिन अमित शाह ने खुलकर कहा कि यह अदालत में, चुनाव आयोग में, संसद में और जनता की अदालत में कहीं भी टिकने लायक आरोप नहीं है। शाह ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया में वोटर लिस्ट से लेकर बूथ डेटा तक हर कदम का डिजिटल और फिजिकल ट्रैक रिकॉर्ड होता है। यह कोई कांग्रेस के आंतरिक चुनाव जितना आसान नहीं कि मनमर्जी के आंकड़े लिखकर अध्यक्ष चुन लिया जाए। शाह ने कठोर शब्दों में स्पष्ट किया कि कांग्रेस जानती है कि यह आरोप झूठा है, पर “हार का ठीकरा” किसी पर फोड़ना ही उनकी राजनीतिक रणनीति है। यही राहुल गांधी की चुनावी आदत है। नतीजे आते ही EVM, आयोग, मोदी, शाह सबको दोष दो और देश को भ्रमित करो।

राहुल के आयोग के झूठ का संविधान की किताब से जवाब

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पक्षपाती है। लेकिन अमित शाह ने राहुल को उसी संविधान की दूसरी अनुसूची की याद दिलाई, जिसमें आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया लिखी है। अमित शाह ने साफ कहा कि कांग्रेस जिस चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगा रही है, उसकी नियुक्ति प्रक्रिया वही है जिस पर स्वयं कांग्रेस ने संसद में सहमति दी थी। सच यही है कि कांग्रेस ने नियुक्ति प्रक्रिया पर ना आपत्ति जताई, ना बदलाव सुझाया। फिर जैसे ही जनता ने अपना स्पष्ट जनादेश तीसरी बार नरेंद्र मोदी को दिया, कांग्रेस को आयोग पक्षपाती दिखने लगा। शाह ने बताया कि जिसे आयोग को “पक्षपाती” बताकर राहुल जनता को गुमराह करते हैं, उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पर कांग्रेस खुद सहमत थी।

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