जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का एक तरफ बड़प्पन है तो दूसरी तरफ केजरीवाल का नंगापन; जो घर न देखा हो, वह अच्छा लगता है

सुभाष चन्द्र

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने शराब घोटाले मामले में CBI की अपील पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया और कहा कि अगर मैं इस मामले की सुनवाई जारी रखती हूँ, तो केजरीवाल और अन्य को लग सकता है कि मेरे मन में उनके प्रति कोई दुर्भावना है। इसलिए उस मामले को किसी और पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेज दिया लेकिन केजरीवाल और 5 अन्य के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के आदेश देकर कहा कि इसकी सुनवाई वे खुद करेंगी 

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एक तरह से केजरीवाल का मकसद हल हो गया वह चाहता था कि शराब घोटाले मामले से जस्टिस शर्मा हट जाएं और वो हट गई एक तरफ जस्टिस शर्मा की महानता है कि वो सुनवाई से अलग हो गई तो दूसरी तरफ केजरीवाल का नंगापन है जो कह रहा है कि “सत्य की जीत हुई, गांधी जी के सत्याग्रह की एक बार फिर जीत हुई” उसकी नेता आतिशी मार्लेना ने भी कहा कि “केजरीवाल के लिए यह एक बड़ी जीत है क्योंकि अंततः जस्टिस शर्मा ने आबकारी नीति मामले से खुद को अलग कर लिया”

ASG तुषार मेहता ने जस्टिस शर्मा से आग्रह किया कि वे सुनवाई जारी रखें लेकिन उन्होंने मना कर दिया 

जस्टिस शर्मा ने कहा कि - 

-“अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में अदालत के अधिकार को कम करने की जान-बूझकर की गई कोशिश की अनुमति नहीं दी जा सकती केजरीवाल ने कानूनी उपायों का सहारा लेने की बजाय न सिर्फ मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश की, बल्कि न्यायपालिका के विरुद्ध अविश्वास के बीज बोन का प्रयास किया;

-मुझे निष्पक्ष आलोचना और असहमति को स्वीकार करने की ट्रेनिंग मिली है, लेकिन कभी कभी चुप रहना न्यायिक संयम नहीं होता;

-इसका अर्थ यह होगा कि यदि किसी व्यक्ति को कोई न्यायाधीश पसंद नहीं, तो वह उस पर पक्षपात का आरोप लगा सकता है, पत्र और वीडियो प्रसारित कर सकता है, इससे तो अराजकता फ़ैल जाएगी और अदालतों को काम करना मुश्किल हो जाएगा;

उन्होंने केजरीवाल और 5 अन्य के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू करते हुए कहा कि इन प्रतिवादियों ने इंटरनेट मीडिया पर उनके खिलाफ अपमानजनक और मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की, जो अदालत की अवमानना है केजरीवाल ने एक तरफ अदालत में उनके प्रति सम्मान प्रकट किया, जबकि बाहर सुनियोजित अभियान चलाया इस अवमानना मामले की सुनवाई वह खुद करेंगी कुछ यूटूबर के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है

केजरीवाल का मुख्य मकसद येन केन प्रकारेण जस्टिस शर्मा को केस से अलग करना था जो पूरा हो गया लेकिन परंपरा तो गलत पड़ गई

कहते है जो घर न देखा हो, वह अच्छा लगता है केजरीवाल को क्या पता जिस नए जज के पास केस भेजा जाएगा, वो जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से भी खतरनाक साबित हो लगता है पहले केजरीवाल उस नए जज की भी हिस्ट्री खंगालेगा कि वो कौन सी सभाओं में जाता है, उसके बच्चे क्या करते हैं आदि आदि और अगर केजरीवाल को उसमे भी कुछ गड़बड़ लगी तो उस पर भी ऊँगली उठा देगा

वैसे स्वर्ण कांता ने शराब केस से अपने आपको अलग कर एक गलत परम्परा का बीज बो दिया जो आने वाले समय में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट के लिए नुकसानदेह साबित होगी। यानि आरोपी जब चाहे किसी भी जज को अपने केस से हटवाने के लिए कह सकता है। वैसे ऐसा हो भी चुका है लेकिन न्यायसंगत तरीके से, जिस वजह से उसकी चर्चा तक नहीं हुई। लेकिन जो तरीका केजरीवाल ने अपनाया है वह न्यायसंगत नहीं और केजरीवाल को सबक सिखाने स्वर्ण कांता को अलग नहीं करना चाहिए था 

जहां तक कोर्ट की अवमानना का केस है, उसकी सुनवाई जस्टिस शर्मा ने खुद करने को कहा है लेकिन यह आवश्यक नहीं है और कोई अन्य जज भी सुन सकता है मुझे लगता है, अवमानना की सुनवाई के लिए भी केजरीवाल जस्टिस शर्मा द्वारा सुनवाई करने पर आपत्ति कर देगा

लेकिन बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी 

अवमानना मामले में 6 महीने तक की जेल हो सकती है जो इनके लिए बड़ी बात नहीं है इज़्ज़त की परवाह नहीं हैं क्योंकि पहले ही बाजार में ये लोग नंगे हैं

केजरीवाल जस्टिस शर्मा से माफ़ी मांग लेगा। लेकिन वे उसे किसी हाल में माफ़ न करें और अधिकतम सजा दें

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