पौराणिक गाथा : बरमावस्या पर विशेष; ज्येष्ठ मास की महिमा" जब यमराज को भी लौटना पड़ा खाली हाथ!

 
एक बड़ी घटना ज्येष्ठ मास में घटती है जब यमराज को एक पतिव्रता नारी की भक्ति के आगे झुकना पड़ा था।

ज्येष्ठ मास की एक अत्यंत प्रभावशाली और शास्त्रसम्मत कथा है जो यमराज और मृत्यु पर विजय से जुड़ी है। यह कथा है 'सती सावित्री और सत्यवान' की, जिसे 'वट सावित्री व्रत कथा' के रूप में ज्येष्ठ मास की अमावस्या को पूरे भारत में सुना जाता है।
​प्रणाम मित्रों! जिस प्रकार वैशाख मास में यमराज चिंतित हुए थे, उसी प्रकार ज्येष्ठ मास वह समय है जब एक नारी की भक्ति ने यमराज के विधान को ही बदल दिया था। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को होने वाली यह कथा शास्त्रसम्मत और परम कल्याणकारी है।

​ शास्त्रसम्मत प्रमाण
​स्कंद पुराण और मत्स्य पुराण के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या और पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस महीने की तपती गर्मी में किया गया व्रत 'अक्षय' फल देता है।
​"ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे पूर्णिमायां विशेषतः।
वटमूलं समाश्रित्य सावित्री व्रतमाचरेत्॥"
​(अर्थ: ज्येष्ठ मास के पक्ष में वट वृक्ष के मूल में बैठकर सावित्री व्रत का पालन करना समस्त सुखों को देने वाला है।)
​ कथा: सती सावित्री और यमराज का संवाद
​शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ मास की इसी भीषण तपन में माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण बचाने के लिए यमराज का पीछा किया था। जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर दक्षिण दिशा की ओर चलने लगे, तो सावित्री भी उनके पीछे चल दीं।
​यमराज ने उन्हें बहुत डराया, ज्येष्ठ की गर्मी और दुर्गम रास्तों का भय दिखाया, लेकिन सावित्री की भक्ति अडिग थी।

​सावित्री ने यमराज से तर्कपूर्ण और धर्मसम्मत बातें कीं, जिससे यमराज अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने सावित्री को तीन वरदान दिए, लेकिन सावित्री ने अपनी चतुर भक्ति से यमराज को ऐसा बांधा कि अंततः यमराज को सत्यवान के प्राण वापस लौटाने पड़े।
​यह ज्येष्ठ मास की महिमा ही है कि इसमें की गई साधना मृत्यु के देवता को भी प्रसन्न कर देती है। इसीलिए ज्येष्ठ मास में वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा की जाती है, क्योंकि इसी वृक्ष के नीचे सावित्री को उनका सुहाग वापस मिला था।
भावुक अपील: क्या आपकी भक्ति में इतनी शक्ति है?
​मेरे प्रिय धर्म-प्रेमियों, सावित्री की यह कथा हमें सिखाती है कि ज्येष्ठ की गर्मी हो या जीवन की कठिन परीक्षा, अगर संकल्प अटूट हो तो विधाता का लेख भी बदला जा सकता है।

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