इन 5 विधानसभा चुनावों में बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में खोने के लिए कुछ नहीं था। फिर भी देशहित में असम और बंगाल में बीजेपी की जीत 2014, 2019 और 2024 लोक सभा चुनावों से कहीं ज्यादा बड़ी है। इन दोनों राज्यों में बीजेपी की जीत नहीं राष्ट्रवाद की जीत है। बंगाल को कांग्रेस से लेकर ममता बनर्जी ने अपनी कुर्सी की खातिर देश की सुरक्षा को घुसपैठियों, कट्टरपंथियों और बारूद के ढेर पर बैठा रखा था। यही हाल कांग्रेस ने north-east का कर रखा था जिसे राहुल गाँधी की बदसलूकी से कुंठित होकर कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थामने वाले हिमंत सरमा ने असम को देश से जोड़ने में जो मेहनत की है उसे झुठलाना सरमा के साथ बेइंसाफी होगी।
बंगाल में एक C कांग्रेस का, दूसरा CPM का और तीसरा TMC का तीनों का सर्वनाश हो गया।
यानी triple C डूब गया। पिछले 2021 के चुनाव में कांग्रेस और CPM को कोई सीट नहीं मिली थी लेकिन इस बार 2-2 सीट पर आगे हैं। मगर TMC तीसरे C वाली 215 से घट कर 82 पर आ गई यानी 133 सीट कम और दूसरी तरफ भाजपा 73 से 205 पर पहुंच गई यानी 132 सीट अधिक। मतलब जो ममता ने खोया वो भाजपा ने ले लिया।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
मैंने पहले चरण की वोटिंग के बाद अपने 24 अप्रैल के लेख में लिखा था “अगर दूसरे चरण में भी यही स्थिति रहती है और भाजपा के वोट 38% से 6-7% भी बढ़ गए तो सत्ता की चाबी उसके हाथ में होगी” और आज यही हुआ कि सत्ता भाजपा के हाथ में आ गई।
कांग्रेस एक बार फिर से मुस्लिमों की पार्टी साबित हुई है। एक चैनल पर बता रहे थे कि कांग्रेस के असम में आगे चल रहे 23 उम्मीदवारों में से 19 मुस्लिम हैं और केरल में कांग्रेस को UDF में 60-62 सीट मिल रही हैं तो गठबंधन के साथी दल “मुस्लिम लीग” को 22; क्या यह साबित नहीं करता कि कांग्रेस केवल मुस्लिमों के भरोसे चल रही है?
असम में भाजपा की सरकार तीसरी बार बनी है और पुडुचेरी में भी। हिमंता बिस्वा सरमा ने कमाल किया है जो भाजपा 101 सीट पर आगे हैं और कांग्रेस कुल 22 पर। पवन खेड़ा के खुद कांग्रेस का “पेड़ा” बना दिया। तरुण गोगाई की हार के जिम्मेदार राहुल गाँधी और पवन खेड़ा हैं।
उधर सनातन धर्म को डेंगू, मलेरिया और कोढ़ कहने वाली DMK खुद ख़त्म हो गई और चीफ मिनिस्टर MK Stalin स्वयं भी हार गया। और कर लो सनातन को ख़त्म।
बंगाल चुनाव में एक बात मजेदार हुई जिससे एक पुरानी बात याद आ गई। मोदी जी एक कुर्सी लेकर लक्षद्वीप की बीच पर बैठ गए और मालदीव निपट गया। बंगाल में मोदी जी “झालमुड़ी” क्या खाई, वो ममता बनर्जी को ही खा गई।
लेकिन बंगाल में जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, उसे सरकार चलाना अंगारों पर चलने से कम नहीं होगा क्योंकि 15 साल के ममता राज के चलते उसके लोग प्रशासन पर कब्ज़ा किए बैठे हैं। पूरी पुलिस फाॅर्स उसकी मर्जी से चलती थी। ऐसे लोगों पर विश्वास करना अत्यंत कठिन होगा और इसलिए सरकार चलाना आसान नहीं होगा। बंगाल में सनातन, राष्ट्रवाद को स्थापित करने के लिए योगी आदित्यनाथ मॉडल अपनाना होगा। योगी ने जिन-जिन क्षेत्रों में प्रचार किया अधिकतर सीटें बीजेपी के खाते आने से बहुमत के आंकड़े को पार करने में सहायक सिद्ध हुई। पिछले चुनावों में भी योगी ने बीजेपी को सीटें दिलवाने में अहम् भूमिका निभाई थी। असम मुख्यमंत्री हिमंत की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता।
फिर बंगाल में घुसपैठियों की समस्या कम नहीं है। उनके लिए तो कोलकाता से ढाका के लिए ट्रेन चला देनी चाहिए, चुपचाप बैठो और निकल जाओ वरना ठोक पीट कर निकाला जायेगा।
एक प्रमुख काम जरूरी है कि बांग्लादेश सीमा से लगते हुए बंगाल के 14 और असम के 3-4 जिलों को काट कर केंद्र शासित प्रदेश बना देना चाहिए जहां से उन्हें बाहर करना आसान हो और घुसना कठिन हो जाए। पूरे केंद्र शासित प्रदेश को BSF के हवाले कर देना चाहिए।
बंगाल की जनता को भाजपा सरकार से रातों रात सब कुछ ठीक होने की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। जो बर्बादी 35 साल के CPM और 15 साल के ममता राज में हुई है, उसे पटरी पर लाने में समय लगेगा। एक घोषणा तो आज मोदी जी ने कर दी कि 5 लाख मुफ्त इलाज की सुविधा का ऐलान पहली ही कैबिनेट मीटिंग में कर दिया जायेगा।

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