अभिसार शर्मा और तहसीन पूनावाला ( फोटो साभार-x@abhisarsharma,x@tahseenpoonawala)
इस देश को सबसे ज्यादा नुकसान अगर पहुंचा रहे हैं तो विदेशों में बैठे भारत विरोधी नहीं बल्कि इनके उनके दलाल। इसमें विरोधी तो शामिल हैं ही कुछ पत्रकार भी शामिल हैं। ये वही दलाल पत्रकार जिनके कहने पर 2014 से पहले की सरकारों में मंत्री और संवैधानिक पदों पर नियुक्तियां होती थी। लेकिन वर्तमान मोदी सरकार ऐसे किसी दलाल को घास तक नहीं डालती।
इतना ही नहीं, चर्चा थी कि जिस नॉर्वेजियन पत्रकार Helle Lyng की अभिसार शर्मा दलाली करता घूम रहा है उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी कुछ प्रश्न करने की इच्छा जाहिर की थी लेकिन मोदी ने भी इसे घास नहीं डाली।
कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला ने खुलासा किया है कि यूट्यूबर अभिसार शर्मा ने गौतम अडानी से मिलकर उनसे रहम की भीख माँगी थी।इस मुद्दे पर मंगलवार (19 मई 2026) को सोशल मीडिया पर कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला और यूट्यूबर अभिसार शर्मा के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
दरअसल नॉर्वेजियन पत्रकार हेले लिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बदसलूकी और विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रेस ब्रीफिंग में की गई टिप्पणियों से जुड़े विवाद को लेकर पूनावाला ने भारत के रुख का समर्थन किया था।
हेले लिंग को संबोधित अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा- “मैं भारत में विपक्ष की आवाज में से एक हूँ और रोजाना टेलीविजन और सोशल मीडिया पर सरकार पर हमला करता हूँ, प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों की कड़ी आलोचना करता हूँ, लेकिन आज तक किसी ने मेरे खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। मुझे यह बात बेहद आपत्तिजनक लगती है कि आप मेरे देश की प्रेस की स्वतंत्रता की तुलना अमीरात या क्यूबा से कर रहे हैं… बेशक, सभी भारतीय अभिव्यक्ति की और भी अधिक स्वतंत्रता चाहेंगे, लेकिन भारत में मीडिया की स्वतंत्रता की तुलना उन शासन व्यवस्थाओं से करना, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाती हैं, सरासर गलत और दुर्भाग्यपूर्ण है।”
इस पर यूट्यूबर शर्मा ने पोस्ट कर पूनावाला पर बीजेपी के लिए काम करने और विपक्षी रुख को छोड़ने का आरोप लगाया। शर्मा ने कहा, “विपक्ष की आवाज होने का दिखावा करना बंद करो। तुम भाजपा और उसके समर्थकों की नफरत को नॉर्मल बना रहे हो। तुम सत्ता प्रतिष्ठान के चाटुकार के सिवा कुछ नहीं हो। विपक्ष की आवाज होने का यह ढोंग बंद करो,”
No Tehseen. You are still a sycophant of the current regime . And yes even Kanchan Gupta had got an appointment with the late Arun jaitley. And no one finally helped us. We won the case in court fair and square because the case was bogus. The same IRS officer SK Srivastava was… https://t.co/K1A7AobOEM
— Abhisar Sharma (@abhisar_sharma) May 19, 2026
सोशल मीडिया पर हो रही बहस के बीच एक यूजर ने पूनावाला पर अडानी एजेंट होने का आरोप लगाया। इसका जवाब देते हुए पूनावाला ने अभिसार शर्मा पर पलटवार किया।
पूनावाला ने आरोप लगाया कि शर्मा ने खुद अडानी ग्रुप ने जो कानूनी कार्रवाई शुरू की थी, उस सिलसिले में उद्योगपति गौतम अडानी से मिलने का समय माँगा था। उन्होंने कहा कि शर्मा सार्वजनिक टिप्पणियों में अक्सर अडानी ग्रुप पर निशाना साधते हैं। इसके बावजूद गौतम अडानी से संपर्क करने की कोशिश की थी।
Bhai you are telling Abhisar that I, Tehseen am an "Adani agent !" 😂Just ask @abhisar_sharma here only : did he or did he not seek an appointment with Gautam bhai Adani meet him and ask for a favor and not to be acted against! Again very easy to call me names ... !
— Tehseen Poonawalla Official 🇮🇳 (@tehseenp) May 19, 2026
Love ❤️
दिलचस्प बात यह है कि शर्मा का आत्मविश्वास जल्द ही गायब होता दिखा और उन्होंने पूनावाला के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
माना जा रहा है कि यह विवाद अभिसार शर्मा और ब्लॉगर राजू पारुलेकर के खिलाफ अडानी ग्रुप के किए गए आपराधिक मानहानि मामले से जुड़ा है।
सितंबर 2025 में अडानी ग्रुप ने शर्मा और पारुलेकर के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद गाँधीनगर की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें नोटिस जारी किए थे। अडानी ग्रुप के वकील संजय ठक्कर ने कथित तौर पर कहा कि ये नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 223 के तहत जारी किए गए थे। इसके मुताबिक किसी अपराध का संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।
शिकायतों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356(1-3) के तहत प्रावधानों का हवाला दिया गया, जो पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता के तहत मानहानि प्रावधानों के अनुरूप हैं।
अडानी ग्रुप ने आरोप लगाया कि शर्मा ने एक वीडियो अपलोड किए थे, जिसमें असम में भूमि आवंटन और कथित राजनीतिक पक्षपात के संबंध में आपत्तिजनक दावे किए गए थे, जबकि परुलेकर पर कथित ‘घोटालों’ और ‘राजनीतिक पक्षपात’ का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट करने का आरोप लगाया गया था। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को ‘बेबुनियाद और भ्रामक’ बताया था और दोनों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
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