सुप्रीम कोर्ट कैसे केंद्र को अपमानित करता है?

सुभाष चन्द्र

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की एक सभा में  Justice B.V. Nagarathna ने कहा कि केंद्र और राज्य स्तर की सरकारें देश में मुकदमेबाजी की सबसे बड़ी जनक हैं और वे लगातार सामान्य मामलों तथा अपीलों को अंत तक लड़कर अदालतों में लंबित मामलों का बोझ बढ़ाती है। 

* सबसे बड़ी वादी (Primary Litigant):

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सरकार केवल न्याय व्यवस्था की सहभागी नहीं है, बल्कि मुकदमेबाजी की सबसे बड़ी वजह भी है। केंद्र और राज्य सरकारें देश में सबसे अधिक मुकदमों के लिए जिम्मेदार हैं;

* लगातार अपीलें (Relentless Appeals):

हालाँकि सरकार सार्वजनिक रूप से अदालतों में लंबित मामलों पर चिंता व्यक्त करती है, लेकिन वही सरकार नियमित मामलों और अपीलों को अंतिम स्तर तक लड़कर इस लंबित बोझ को और बढ़ाती है;

* “मॉडल लिटिगेंट” का विरोधाभास:

 राज्य से अपेक्षा की जाती है कि वह संयमित तरीके से मुकदमे लड़े और एक “आदर्शवादी” की तरह व्यवहार करे, लेकिन न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि व्यवहार में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है;

* संस्थागत कारण (Institutional Drivers):

 उन्होंने कहा कि अक्सर नौकरशाही में जवाबदेही और जांच के भय के कारण ये अपीलें की जाती हैं। अधिकारी विवादों को सुलझाने के बजाय अदालतों में मामला जारी रखना अधिक सुरक्षित समझते हैं, ताकि उन पर लापरवाही का आरोप न लगे;

कुछ दिन पहले जस्टिस नागरत्ना ने कहा है कि “Judges who are unable to live within their known source of income and fall prey to greed and temptation must be weeded out of the system” - मतलब साफ है जज भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं

उसके भी पहले कहा था -“नोटबंदी से काला धन सफ़ेद में बदला; हम सब जानते हैं कि 8 नवंबर 2016 को क्या हुआ था, कालेधन का खत्म कहां हुआ? यह कालेधन को सफ़ेद बनाने का एक अच्छा तरीका था” यानी सीधे मोदी जी को चुनौती दी थी

यह कोई नया राग नहीं है जो जस्टिस नागरत्ना ने अलापा है

इसके पहले भी 11th August, 2023 को Justices BR Gavai, PS Narasimha, and Prashant Kumar Mishra की पीठ ने कहा था करीब 70% सरकार के केस Frivolous होते हैं सरकार litigation policy को क्रियान्वित करने की बात करती है लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है

मई, 2023 में भी जस्टिस गवई की बेंच ने कहा था करीब 40% केंद्र और राज्य सरकारों के केस आधारहीन होते हैं

मैंने एक RTI में सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस गवई की बेंच की टिप्पणी पर पूछा था कि केंद्र सरकार कितने cases में पार्टी है मुझे 10 नवंबर, 2023 के जवाब में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हैरान करने वाली जानकारी दी गई जिसमें बताया गया कि केंद्र सरकार 11349 मामलों में Petitioner है और 35601 मामलों में Respondent है यानी 46950 मामलों में मात्र 24% केस में सरकार वादी है मतलब केवल 24% केस सरकार ने फाइल किये हुए थे

जाहिर है 11349 मामलों में सरकार की अपील भी शामिल होंगी जो हाई कोर्ट के उसके खिलाफ फैसलों के विरुद्ध फाइल की गई होंगी और इसलिए गवई बेंच का सरकार के cases को frivolous कहना उचित नहीं था

इसका मतलब साफ़ है केंद्र सरकार मुख्य Litigant है वो भी frivolous cases में कहना सही नहीं है 

ऐसा ही  सर्टिफिकेट जस्टिस नागरत्ना ने भी दे दिया क्या सरकार को किसी मामले में अपील करने का भी अधिकार नहीं है? उदाहरण के लिए क्या ट्रायल कोर्ट के शराब घोटाले में केजरीवाल गैंग को डिस्चार्ज करने के खिलाफ भी अपील नहीं करनी चाहिए? और अगर हाई कोर्ट सरकार की अपील खारिज करती है तो क्या उसे सुप्रीम कोर्ट जाने का भी अधिकार नहीं है?

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