किसी का चरित्र हनन करों और कोई अन्य अपराध अगर निचली अदालत सख्ती दिखा रही है तो दलाल वकीलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँच जाओ कोई गिरफ़्तारी नहीं। क्या इसीका नाम कानून है? कानून अँधा नहीं दलाल वकीलों और उनके इशारे पर नाचने वाले जजों ने बनाया हुआ है। जब तक देश में दलाल वकीलों और उनकी कठपुतली बने जज रहेंगे इंसाफ को भूल जाना चाहिए। अगर इसी तरह सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाही होनी है क्यों नहीं सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना चाहिए। नहीं चाहिए ऐसे अदालतें जो आदमी और दलाल वकीलों के इशारे पर डांस करती हो। सुप्रीम ने साबित कर दिया कि देश में दो कानून है एक आम नागरिक को निचोड़ने के लिए और दूसरा नेताओं को ऐश करवाने के लिए। जब सुप्रीम कोर्ट ही कानून में भेदभाव करे तो निचली अदालतों को दोष नहीं देना चाहिए।
जब पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में गुवाहाटी हाई कोर्ट के खिलाफ अपील की, तो मैंने कई जगह टिप्पणी की थी कि अब उसे जमानत मिल जाएगी और आज वही हुआ। सवाल इस बात है कि फिर सुप्रीम कोर्ट को उसे हाई कोर्ट भेजने की जरूरत ही क्या थी, उसी दिन ही खुद बेल दे देते। सुप्रीम कोर्ट के जजों से बेहतर और उचित तो हाई कोर्ट के जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया थे जिन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते तो political overtones हो सकता था लेकिन खेड़ा ने एक निर्दोष महिला पर दोषारोपण किया।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
“The allegations and counter - allegations, as apparent in the present case, prima facie, appear to be politically motivated and seemingly influenced by such rivalry, rather than disclosing a situation warranting custodial interrogation”.
“The right of personal liberty is a cherished fundamental right, and any deprivation thereof must be justified on a higher threshold, particularly where the surrounding circumstances may indicate the presence of political overtones”.
मतलब खेड़ा अपराध करेगा और फिर आप उसे Personal Liberty के लिए जमानत दे देंगे, यह काम फिर जस्टिस सैकिया ने क्यों नहीं किया? आप political overtones की बात कर रहे हैं लेकिन पवन खेड़ा की रिंकी भुईया के साथ क्या राजनीतिक दुश्मनी थी जो खेड़ा ने उसका चरित्र हनन करने के लिए फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर आरोप लगाए। जो कुछ जवाब दिया खेड़ा को वह हिमंता ने दिया लेकिन रिंकी भुईया ने तो कुछ नहीं कहा, बस केस दर्ज किया है। Therefore, allegations were malicious but the reactions from Himanta were justified and quite warranted.
आपने खेड़ा को जांच में सहयोग करने और सबूतों से छेड़छाड़ न करने के लिए कहा है। क्या इतना शरीफ आदमी है खेड़ा जो आपकी बातें मानेगा। उसे पता है अभिषेक मनु सिंघवी की सुप्रीम कोर्ट में “चलती” है। वो तो जांच में बहाने बना बना कर जाएगा ही नहीं और जब फर्जी दस्तावेज़ बनाए तो उन्हें नष्ट करने की भी कोशिश करेगा।
आज के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने एक बार न्यायपालिका पर भरोसा फिर से ख़त्म कर दिया और कोई भी कह सकता है Setting और Paisa खेल कर गया।
सुप्रीम कोर्ट के ऐसे ही निर्णयों ने कांग्रेस और विपक्ष के नेताओं की हिम्मत बढ़ा रखी है।
इस वजह से वे लोग जो मुंह में आता है बोलते हैं क्योंकि उन्हें पता है अंत में सुप्रीम कोर्ट से बचाव हो जाएगा। Political Rivalry का मतलब यह नहीं है कि आप विरोधियों को अपशब्द कहने की अनुमति दे देंगे जो आज आपने दे दी।
कुछ दिन पहले खड़गे ने प्रधानमंत्री को Terrorist कहा। इसलिए ही बहुत से केस दर्ज नहीं होते कि सुप्रीम कोर्ट हाथ बांध कर बैठ जाएगा। राहुल गांधी हो या केजरीवाल हो, उन्हें अभय दिया हुआ है। राहुल गांधी देश के खिलाफ, सेना के खिलाफ और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बोलता है और केजरीवाल ने तो आपकी न्यायपालिका पर कलंक लगा दिया लेकिन आप चुप बैठे है।
आज सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को बेल देकर साफ़ कर दिया कि कोई भी किसी पर फर्जी दस्तावेजों के साथ आरोप लगा सकता लेकिन गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। यानी जालसाजी एक आधिकारिक धंधा घोषित कर दिया।

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