नेतन्याहू से बिगाड़ कर अमेरिका की कोई पार्टी और ट्रंप 75 लाख यहूदियों की नाराजगी नहीं झेल सकते

सुभाष चन्द्र

ईरान और लेबनान को लेकर ट्रंप ने कई बार नेतन्याहू को खरी खोटी सुनाई है लेकिन इज़रायल का कहना है कि हम किसी के गुलाम नहीं है, हम संप्रभु राष्ट्र हैं और अपनी चुनौतियों का सामना स्वयं कर सकते है। 

अब सवाल उठता है कि क्या ट्रंप, रिपब्लिकन पार्टी और Democrats अमेरिका में रहने वाले यहूदियों की नाराजगी झेल सकते हैं? जैसे भारत में सभी सेकुलर पार्टियां मुस्लिम वोट बैंक के पीछे रहती हैं, वैसे ही अमेरिका में यहूदी कौम एक बहुत बड़ा वोट बैंक है ट्रंप रोज रोज नेतन्याहू पर बरस कर क्या नवंबर में होने वाले चुनाव जीत सकते हैं?

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अमेरिका में रहने वाले करीब 54 लाख भारतीय लोगों का समर्थन लेने के लिए दोनों दल उतावले रहते  हैं जबकि 40-45 लाख मुस्लिम Democrats के साथ होते हैं और जिनमें करीब 7 लाख तो पाकिस्तानी हैं

दूसरी तरफ अमेरिका में यहूदियों की संख्या 63 से 75 लाख के बीच है यानी अमेरिका की आबादी का 2 से 2.5% यहूदियों की है जबकि इज़रायल की एक करोड़ आबादी में 75 लाख यहूदी हैं मतलब एक पूरा इज़रायल अमेरिका में बसता है

न्यूयॉर्क में यहूदी 21 लाख, Los Angeles में 6,17,000, फ्लोरिडा में 5,27,000 वाशिंगटन डी सी में 2,97,000, शिकागो में 2,94,000 और बोस्टन में 2,50,000 यहूदी रहते हैं यहूदी आबादी में करीब 44 लाख व्यस्क हैं, मतलब वोटर हैं

अमेरिका और इज़रायल के अलावा विश्व भर में यहूदियों की सख्या करीब 22 लाख है जिसमें सबसे अधिक 4,40,000 फ्रांस में हैं, कनाडा में 4,00,000 और ब्रिटैन में 3,00,000 लाख है

भारत में ब्रिटिश समय में 20000 यहूदी थे जिसमें बहुत से इज़रायल की स्थापना के बाद वहां चले गए और आज भी करीब 5000 यहूदी भारत में रहते हैं

यहूदी विश्व में कहीं भी रहें, उनकी प्रतिबद्धता इज़रायल के प्रति रहेगी और अगर अमेरिका या ट्रंप इज़रायल से संबंध बिगाड़ते हैं तो उससे उनकी छवि पर यहुदिओं के मन में दाग ही लगेगा

में कल भी लिखा था कि ईरान और हिजबुल्लाह (लेबनान) के लिए ट्रंप का नेतन्याहू से संबंध बिगाड़ना उचित नहीं है ट्रंप को ईरान के साथ हुए समझौते पर खुद ही विश्वास नहीं है तभी तो आज उन्होंने फिर कहा है कि अगर डील पसंद नहीं हुई तो फिर से बमबारी की जाएगी

कहने का तात्पर्य यह है कि अधिक समय तक इज़रायल को नाराज़ करके ट्रंप या अमेरिका यहूदियों की नाराजगी बर्दाश्त नहीं कर सकते अमेरिका के विकास में भारतीयों और यहूदियों का सबसे बड़ा योगदान है इसलिए शायद आज ट्रंप मोदी की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे थे और कह रहे थे कि मोदी शांत और संयमित है लेकिन मैं मोदी के जैसा शांत नहीं हूँ तो भाई शांत रहना सीखने के लिए मोदी को गुरु बना लो 

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