मोदी-योगी-अमित द्वारा कांग्रेस को उसी भाषा में जवाब देने पर कांग्रेस में बंट रही जूतों में दाल

आसमान पर थूका अक्सर अपने ऊपर आता है मतलब जब तक किसी नग्न के सामने नग्न ना हो तो नग्न अपने आपको सुरमा भोपाली समझ अपनी मनमानी करता रहता है। कांग्रेस इतने वर्ष सत्ता में रहकर अपने आपको सुरमा भोपाली समझ अपनी मनमानी करती रही। संविधान का मूल स्वरुप ही बिगाड़ दिया और बात करती है संविधान बचाओ का शोर मचाकर जनता को गुमराह करती फिर रही है। 2014 से अब तक संविधान में जितने सुधार हुए हैं उन सबसे परेशान हो गयी है। देशप्रेमी पार्टी को छोड़ रहे हैं। कांग्रेस चुनाव-दर-चुनाव हार रही है। जिस कारण कांग्रेस में जूते में दाल बंट रही है और कांग्रेस खा रही है, मजे में ना सही, मजबूरी में ही सही। मोदी-योगी-अमित कांग्रेस को उसी भाषा में जवाब दे रहे हैं जिसकी कांग्रेस हक़दार है।
आज कांग्रेस मोदी-योगी और अमित को क्या कुछ नहीं बोल रही, लेकिन भूल रहे हैं कि आज बीजेपी में मोदी, योगी और अमित शाह जैसों की कमी नहीं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा और अब बंगाल के शुभेंदु अधिकारी के काम को देख ले। मुस्लिम कट्टरपंथी कहते हैं कि 'जितने अफ़ज़ल मारोगे, हर घर से अफ़ज़ल निकलेगा' लेकिन बीजेपी हर राज्य से मोदी, योगी और अमित शाह निकाल रही है।
दूसरे, आतंकवादियों को दामाद की तरह पालने की बजाए उन्हीं की भाषा में जवाब देने पर कांग्रेस और इसकी पिछलग्गू पार्टियां बिलबिलाती दिखती हैं। इतना ही नहीं पाकिस्तान को कंगाल हालत में पहुँचाने में कांग्रेस का ही हाथ है क्योकि कांग्रेस जितनी कमजोर होगी पाकिस्तान भी उतना ही कमजोर होगा।
आज भाजपा कांग्रेस को उसके स्टाइल में ही जवाब दे रही है!
भाजपा उसी जूते का भरपूर उपयोग कर रही हैं जिस जूते से कभी कांग्रेस ने अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार को मारा था, आज नरेंद्र मोदी, योगी और अमित शाह उसी जूते से कांग्रेस को दाल परोस रहे हैं।
इसे ही कहते हैं 'मियां की जूती, मियां के सर।'

आज कांग्रेसी नेता यह कहते हुए कहीं भी मिल जाएंगे!
बीजेपी में नैतिकता नहीं है।
बीजेपी विधायक खरीद रही है।
बीजेपी सांसद खरीद रही है। बीजेपी सरकार गिरा रही है, विपक्ष को ख़त्म कर रही है, लोकतंत्र खतरे में, यह आखिरी चुनाव आदि आदि।
अटल बिहारी वाजपेयी जी के साथ सोनिया गांधी और उसके सलाहकार अहमद पटेल ने जो कुछ किया था पत्रकार स्वप्नदास गुप्ता के अनुसारः-
''अटल जी के आंखों में आंसू आ गए थे और वहां मौजूद कई लोगों ने अटल जी को रोते देखा था।''
16 अप्रैल 1999 को अटल जी के सरकार का बहुमत परीक्षण होने वाला था अटल जी आश्वस्त थे कि वह बहुमत साबित कर देंगे।
कांग्रेस ने इतना गंदा खेल खेला की एनडीए में शामिल अकाली दल के सांसद इंद्रकुमार गुजराल को तोड़ा और गुजराल ने ह्विप का उल्लंघन करके अटल बिहारी वाजपेयी जी के खिलाफ वोट डाला।
इसके अलावा उस वक्त फारुख अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कांफ्रेंस जो NDA में शामिल थी।
उस नेशनल कांफ्रेंस के सैफुद्दीन सोज को अहमद पटेल ने कुरान की कसम देकर अटल बिहारी वाजपेयी जी के सरकार के खिलाफ वोट देने को कहा था।
यह सब तो ठीक था। क्यों कांग्रेस सत्ता पाने के लिए कुरान को ले आयी? आज जब मन्दिरों के मुद्दों को बीजेपी लेकर आती है तो कांग्रेस और इसकी पिछलग्गू पार्टियां किस आधार पर धर्म को चुनावों में लाने के लिए बीजेपी को गलत बताती है? मुस्लिम वोटबैंक की खातिर मन्दिरों को विवादित बना दिया। कोर्ट में पुरुषोत्तम श्रीराम और रामसेतु को काल्पनिक किसने बताया?
उससे भी बढ़कर नीचता देखकर उस वक्त सब चौंक गए कि जब 15 फरवरी को ही उड़ीसा के मुख्यमंत्री का शपथ ले चुके गिरधर गोमांग सदन में आ गये थे।
नैतिकता के अनुसार जब वह मुख्यमंत्री पद का शपथ ले लिए तब उन्हें संसद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। लेकिन फरवरी में वह मुख्यमंत्री बने और अप्रैल तक उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया।
यह तो अटल बिहारी बाजपेयी जी की महानता थी कि उन्होंने सदन में खड़े होकर कहा थाः
''मैं सोनिया गांधी और गिरधर गोमांग के विवेक पर छोड़ता हूं कि क्या वह जो कर रहे हैं वह नैतिक रूप से ठीक है और मुझे विश्वास है कि अपनी अंतरात्मा की आवाज मानते हुए गिरधर गोमांग सदन की वोटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि वह एक मुख्यमंत्री बन चुके हैं।''
लेकिन उसके बावजूद भी भारत के लोकतंत्र की हत्या करते हुए सोनिया गांधी ने गिरधर गोमांग से वोट दिलवाया था और मात्र एक वोट से अटल जी की सरकार गिर गयी थी। बाद में लॉबी में सारे पत्रकार थे और अटल बिहारी वाजपेयी जी की आंखें आंसुओं से भरी हुई थी
क्योंकि अटल बिहारी वाजपेयी जी को विश्वास था की सोनिया गांधी और गिरधर गोमांग देश के लोकतंत्र का सम्मान करेंगे।
एक जमाना था जब बीजेपी में नैतिकता उदारवादी बहुत चलती थी और जिसका फायदा इन कांग्रेसियों ने उठाया।
अब नरेन्द्र मोदी और अमित शाह कांग्रेस को एक-एक वोट के लिए एक-एक सरकार के लिए तरसा दे रहे हैं।

जब भी कोई कांग्रेस की सरकार गिरती है तो कसम से हर देशप्रेमी और लोकतंत्र प्रेमी को बड़ा सुकून मिलता है। 

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