प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त, 2023 को कहा था और उसके बाद भी कई बार कहा है कि वंशवादी/परिवारवादी पार्टियां लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और कुछ समय बाद ये अपने आप या तो ख़त्म हो जाएंगी या अप्रासंगिक हो कर रह जाएंगी। और यही हो रहा है।
हकीकत में ममता की हार उस दिन दीवारों पर लिख दी गयी थी जब स्थानीय पुलिस को मतदान केन्द्रों से दूर रहने का आदेश हुआ था। क्योकि ममता के शासन में ममता और इसके मुस्लिम कट्टरपंथियों के अत्याचारों से त्रस्त हिन्दू ममता की पार्टी को उखाड़ फेंकने का मौका देख रहे थे। भगवान ने उनकी आवाज़ सुन ली और अत्याचारी ममता को चारों खाने चित कर दिया। वही स्थिति हिन्दू विरोधी पार्टियों की भी होने वाली है।
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
KCR की BRS भी खत्म हो रही है। उसकी बेटी कविता ने ही अलग पार्टी तेलंगाना राष्ट्र सेना बना ली। देवे गौडा की जनता दल(सेकुलर) भी नाममात्र के लिए बची है। शरद पवार की एनसीपी खंड खंड हो गई और बालासाहेब ठाकरे की शिव सेना उद्धव की हाथों से एकनाथ शिंदे ने छीन ली। मजे की बात है कि आज संजय राउत शिंदे को कह रहा है कि अगर आप माफ़ी मांग लो तो उद्धव की शिव सेना में वापस आ सकते हो। अब बताओ, शिंदे को, जो उपमुख्यमंत्री है, क्या किसी पागल कुत्ते ने काटा है जो उद्धव की पार्टी में विलय करेगा वह भी माफ़ी मांग कर? संजय राउत पगला गया लगता है।
इन परिवारवादी पार्टियों के अलावा वामपंथी दलों, CPM और CPI का भी देश भर में लगभग सफाया हो गया है और उनकी माओवादियों की आतंकी सेना को अमित शाह ने ख़त्म कर दिया।
कांग्रेस की हालत एक राष्ट्रीय पार्टी की बजाय क्षेत्रीय दल जैसी हो गई जो 3-4 राज्यों को छोड़ कर बाकी सभी राज्यों में अपने दम पर चुनाव भी नहीं लड़ सकती। ये ऐसी पार्टी बन गई जो केरल में 15 दिन तक मुख्यमंत्री नियुक्त नहीं कर सकी और कर्नाटक में सिद्दरमैया को हटा तो दिया सिस्टम उसी के हाथ में है बेशक शिवकुमार CM बन गया। पता नहीं सिद्धारमैया कब क्या खेल कर दे और शिवकुमार को उखाड़ दे?
अब तृणमूल कांग्रेस वैसे तो अखिल भारतीय पार्टी होने का दावा करती थी लेकिन केवल बंगाल तक सीमित थी और कल मूल से (जमीन से) उसका तृण (घास/तिनका) उखड़ गया। जो ममता सत्ता के नशे में चूर बंगाल में हिंदुओं का दमन करती रही, जो बांग्लादेशी और रोहिंग्या को पनाह देती रही, उसके 80 में से 58 विधायक अलग हो गए और विपक्ष के नेता की कुर्सी भी तृणमूल कांग्रेस के हाथ से छीन ली। सांसद भी कब अलग हो जाएं कहा नहीं जा सकता।
जो ममता की पार्टी के नेता और अभिषेक बनर्जी अमित शाह जैसे भाजपा नेताओं को गाली बकते थे और धमकी देते थे, वो अकेले रह गए या बिल में छुप गए। चुनाव में ममता का जहाज डूबता दिखाई दे रहा था और कहते हैं कि जहाज को डूबता देख कर चूहे कूदकर पहले बाहर निकल जाते हैं। मगर ममता के जहाज से चूहे पहले बाहर नहीं निकले बल्कि अब खुद ही आधे डूबे हुए जहाज को पूरी तरह डुबाने में लगे हैं।
कल तक ममता बनर्जी इंडी गठबंधन को घास नहीं डालती थी लेकिन अब दौड़ कर गठबंधन की मीटिंग में शामिल होने को तैयार है। मोदी को हटाए बिना चैन से नहीं बैठूंगी, ऐसी घोषणा कर रही है। बहुत अच्छी बात है। तुम सब मिलकर उसे हटाते रहो और वो 10 जून को देश का नेहरू के बाद सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने वाला प्रधानमंत्री बन जाएगा।
ये तो मैंने बताया कि कैसे वंशवादी/परिवारवादी पार्टियां ख़त्म हुई या हो रही हैं, लेकिन ये बात अब राहुल गांधी भी कह रहा है कि भाजपा से लड़ने के लिए केवल कांग्रेस रहेगी और बाकी सभी पार्टियां ख़त्म हो जाएंगी। कांग्रेस कैसे रहेगी और कितनी रहेगी भाजपा से लड़ने के लिए, ये उसे भी नहीं पता और भाजपा से कैसे लड़ेगी, बस केवल मोदी को गालियां देकर।

No comments:
Post a Comment