इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर ने पुलिस के कामकाज पर टिप्पणी करते हुए राज्य के सभी प्रशासनिक अधिकारियों को नकारा कह दिया। पहले उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस अफसरों की वफ़ादारी संविधान के प्रति नहीं, बल्कि सत्ताधारी पक्ष के प्रति है। वो ‘ट्रांसफर-पोस्टिंग इकॉनमी’ ध्यान में रखकर आचरण करते है।
जस्टिस दिवाकर को यह नहीं भूलना चाहिए कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से पहले उत्तर प्रदेश की कितनी दुर्गति थी। अगर जस्टिस दिवाकर योगी से पहले और बाद के प्रदेश की तुलना नहीं कर सकते उनकी मंशा पर प्रश्न खड़ा हो सकता है।
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मामला गाजियाबाद के 3 व्यक्तियों पर लगे गैंगस्टर एक्ट का था जिसे जस्टिस दिवाकर ने निरस्त कर दिया। मुझे उन लोगों पर लगे गैंगस्टर एक्ट निरस्त करने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन यह मान लेना कि वे प्रतिशोध की भावना से लगाए गए, यह भी उचित नहीं है।
आपने बिकरू कांड का जिक्र किया और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए जबकि उस कांड में मरने वाला विकास दुबे भी कोई शरीफजादा नहीं था और 8 पुलिसकर्मी भी बलिदान हो गए थे।
जस्टिस दिवाकर को एक कड़वा सच और भी स्वीकार करना चाहिए कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के 10 जजों ने मुख़्तार अंसारी की जमानत अर्जी सुनने से मना कर दिया था। उनकी वफ़ादारी किसके लिए थी, संविधान के प्रति या मुख़्तार अंसारी जैसे खूंखार अपराधी के प्रति? शायद जस्टिस दिवाकर के पास इसका जवाब नहीं होगा?
जिस जज दिनेश कुमार सिंह ने मुख़्तार अंसारी को 7 साल की सजा सुनाई, उसका कुछ दिन बाद कर्नाटक हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी एक दिन राहुल गांधी पर एफ आई आर के आदेश देते हैं और अगले दिन वापस ले लेते हैं और केस ही छोड़ देते हैं।
जस्टिस गोविन्द माथुर ने दंगाइयों के फोटो हज़रतगंज चौक पर लगाने से मना कर दिया और जस्टिस चंद्रचूड़ ने दंगाइयों से 275 करोड़ के नुकसान की भरपाई करने के लिए मना कर दिया।
उत्तर प्रदेश के पुलिस और कार्यपालिका के अधिकारियों का उत्तर प्रदेश की पिछले 9 साल में हुई प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान है जिसे जस्टिस दिवाकर ने प्रदेश के सभी अधिकारियों को एक लाठी से हांक कर भुला दिया। नेतृत्व योगी जी का है लेकिन उनकी योजनाओं का क्रियान्वयन तो अधिकारी ही करते है। आज प्रदेश माफिया और बाहुबलियों से मुक्त है। 9 साल में 293 अपराधी एनकाउंटर में मारे गए और अगर न मारे जाते तो उनके मुक़दमे 20-20 साल आपकी अदालतों में धक्के खाते।
प्रदेश ने चहुंओर प्रगति की है। 2016-17 में राज्य का जीडीपी 13.30 लाख करोड़ था जो अब 30.25 लाख करोड़ है। राष्ट्रीय जीडीपी में योगदान 8.6% से बढ़ कर 9.5% हो गया है और राज्य देश में दूसरे नंबर की इकॉनमी है। निर्यात वैल्यू 88,000 करोड़ से बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपए हो गई। टूरिज्म का रेवेनुए 11,000 करोड़ से बढ़ कर 70,000 करोड़ रूपए हो गया। इतना ही नहीं इंफ्रास्टचर में निवेश जो एक्सप्रेस वेज़, एयरपोर्ट्स, और आने वाले प्रोजेक्ट्स में होगा वह राज्य की इकॉनमी को एक ट्रिलियन डॉलर की तरफ ले जा रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल भी प्रदेश में बन रही है।
दौड़ते घोड़े को चाबुक मारना ठीक नहीं है। एक साधु योगी ने प्रदेश का कायापलट कर दिया। एक दो मामलों की वजह से पूरी कार्यपालिका के अधिकारियों पर कलंक लगाना उचित नहीं है।

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