जब कांग्रेस राज में हाथ की HMT घडी के लिए , LPG, दो पहिया स्कूटर के लिए महीनों पहले बुकिंग और घर में मरम्मत करवाने के लिए राशनिंग ऑफिस से सीमेंट परमिट लेना पड़ता था

साभार : सोशल मीडिया

भारत भी कितना विचित्र देश है जहाँ सरकारी स्तर पर झूठ परोसा जाता है और जनता है कि उसे ही सच मान लेती है। शिक्षित भी अनपढ़ों की तरह ज्ञान पेलते नज़र आते हैं। वैसे जनता भी कितनी महामूर्ख है जो आँखों देखी मक्खी तक खा रही है। बच्चों की जाति हमेशा ददिहाल पर होती है ननिहाल पर नहीं। लेकिन भारत में कितना बड़ा छलावा चल रहा है कि फ़िरोज़ जहांगीर की औलादें अपने दादा की बजाए नाना का भी नहीं किसी और की जात अपनाये हुए है। जब इन्दिरा गाँधी का निकाह फिरोज से हुआ तो sarname फिरोज का होना चाहिए लेकिन नाम चल रहा है गाँधी।
दरअसल, वोट चोरी, evm से छेड़छाड़ आदि से जनता को गुमराह करने वाले राहुल गाँधी या कांग्रेस देश को बताए कि कांग्रेस राज में पनडुब्बी पर कौन ऐश करता था? पनडुब्बी देश की रक्षा के होती है या ऐश करने के लिए? जब युद्ध के दौरान हर एयरलाइन के पायलट को 24 घंटे ड्यूटी पर रहने का नियम है फिर 1971 इंडो-पाक युद्ध के दौरान पायलट राजीव गाँधी इटली क्यों चले गए, क्यों नहीं उन पर कानूनी कार्यवाही की गयी? वो इसलिए पायलट राजीव प्रधानमंत्री का बेटा था। हाँ, अगर राजीव की बजाए कोई अन्य होता उसे नौकरी से निकाल दिया जाता। क्या वजह थी कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सिर्फ मोहरा बनाकर प्रधानमंत्री पद की गरिमा को चोट पहुंचाई? किस हैसियत से पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को किसी भी सरकारी कार्यक्रम में पहली पंक्ति में जगह दी जाती थी? क्यों हर विदेशी मेहमान को सोनिया से मिलवाया जाता था? लोकतंत्र और संविधान का मजाक ही नहीं जितनी धज्जियाँ कांग्रेस ने उड़ाई हैं शायद किसी अन्य पार्टी ने नहीं। क्या वह लोकतंत्र और संविधान का मजाक नहीं था?
पूंजीपतियों को सीधा जितना फायदा कांग्रेस ने पहुंचाया है किसी ने नहीं। सेर को किलो/लीटर में बदल दिया मतलब ग्राहक से पैसे पूरे लो कम वजन में सामान दो क्योकि सेर किलो/लीटर से ज्यादा होता है। इतना ही नहीं सोना और चांदी भी तोला से ग्राम में बिकवानी शुरू कर दी। 1 तोला होता है लगभग 11.120 ग्राम। फिर कहते हो वर्तमान सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा रही है।
देखिए सोशल मीडिया पर पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ का वीडियो। यह कोई पहला या आखिरी नहीं, सोशल प्लेटफार्म पर राष्ट्रीय और हिन्दुत्व मुद्दों को बहुत बेबाकी से उठाते रहते हैं।
कोई पत्रकार राहुल गांधी से यह नहीं पूछ रहा कि राहुल जी जब तक नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं बने थे तब तक आप की नानी आपकी दोनों मौसी दोनों मौसी के पति बच्चे यानी आप का इटली का पूरा खानदान दिल्ली में रहता था।
उनको 3 सरकारी बंगले किस हैसियत से अलॉट किए गए थे और वह किस हैसियत से तमाम सरकारी कार्यक्रम में शामिल होते थे?
और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के 15 दिन के बाद यह पूरा माइनों खानदान किसी चोर की तरह इटली क्यों चला गया?
आज राहुल गांधी नानी से मिलने के बहाने बार-बार इटली आते हैं लेकिन कभी 10 साल कांग्रेस के सत्ता के दौरान और उसके पहले जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तब यह धूर्त इटली नहीं जाते थे क्योंकि सोनिया गांधी के मायके का पूरा खानदान दिल्ली में रहता था और लुटियंस जोन में पांच बंगले उन्हें रहने को दिए गए थे।
यहां तक कि सोनिया गांधी के बचपन का दोस्त क्वात्रोची भी हर सरकारी सुविधा ले रहा था।
सोनिया गांधी की मां पाउलो माइनो सरकारी कार्यक्रम में भाग लेती थी राष्ट्रपति भवन में कई सरकारी कार्यक्रम में शामिल होती थी पूरी सरकारी मशीनरी उनके आगे पीछे घूमती थी।
सोनिया गांधी की तीन बहने हैं जिसमें से दो बहने तो भारत में ही रहती थी और एक बहन का रोम और मिलान में बहुत बड़ा एंटीक स्टोर है।
और कई पुरातत्वविद ने इस बात का खुलासा किया था कि भारत से कई म्यूजियम में दुर्लभ चीजों को प्रदर्शनी के बहाने विदेश ले जाया जाता था और फिर वहां बड़े नाटकीय ढंग से उन्हें चोरी हुआ दिखा दिया जाता था और बाद में पता चलता था कि वह सोनिया गांधी के बहन के स्टोर में बिकने के लिए गया है।
इस तरह से भारत की तमाम बेशकीमती दुर्लभ मूर्तियां तमाम आर्टीफैक्ट्स विदेशों में प्रदर्शनी के बहाने ले जाए गए और वहां चोरी की नौटंकी बता कर सोनिया गांधी के बहन के स्टोर में पहुंचा दिया गया था।
नेहरू चाचा ने इतना सशक्त भारत बनाया कि 𝟏𝟗𝟖𝟒 में जब इंदिरा जी की मृत्यु हुई और राजीव गाँधी जी प्रधान मंत्री बने, तो देश मे आम नागरिक को दो बोरी सीमेन्ट लेने के लिये भी तहसीलदार से परमिट लेना पड़ता था। ऐसा लम्बे समय तक चला रहा!
01 एक किलो चीनी खरीदने तक के लिये भी परमिट लगता था। शादी विवाह में एक क्विंटल चीनी लेने के लिये,तो लोग महीनों पहले से सोर्स सिफारिश खोजते फिरते थे। मुंडन, सालगिरह, शादी तक में लोगों की संख्या सीमित कर दी गयी थी। शादियों में लोग चाय और पकोड़े आदि खाकर नेग देकर जाना पड़ता था। ऐसा वृद्ध लोगों ने देखा है!
तब भारत में एलपीजी के कनेक्शन के लिये 0𝟐 दो से 0𝟑 तीन साल से लेकर 05/10 साल तक का समय लगता था। यकीन मानिए, घर में एलपीजी होते हुए, भी गृहणियां स्टोव जलाती थीं, क्योंकि उन्हें डर रहता था कि, अगर गैस खत्म हो गयी, तो ब्लैक और लम्बी लम्बी लाइनों में रात भर लगने के बाद अगला पूरा दिन खड़े रह, गैस सिलेंडर भरवाना बहुत बड़ा काम था। एजेंसी के सामने बहुत लम्बी लाइन होती थी!
ये वो ज़माना था, जब देश मे बजाज स्कूटर प्रीमियम पर बिकते थे, मतलब 𝟓𝟎𝟎𝟎 का स्कूटर और 𝟔𝟎𝟎𝟎 ब्लैक! तब 𝟏𝟏,𝟎𝟎𝟎 में स्कूटर मिलेगा। तब टेलीफोन के कनेक्शन मिलने में 0𝟕 से 𝟏𝟎 साल लग जाते थे और बहुत जबरदस्त ब्लैक होती थी।
इसी तरह सन 1970 के आसपास ट्रैक्टर खरीदना के लिए नंबर लगाना पडता था और उस समय में मैसी फर्ग्यूसन ट्रैक्टर की कीमत लगभग 18 हजार रुपए थी और उसका नंबर आने में 10 से 15 साल लगते थे, तथा तत्काल लेने पर करीब 15 हजार के अधिक देना पडता था! यह राशि उस वक्त बहुत अधिक थी!
उस नेहरु खानदान के शासनकाल के जमाने में हर किसी वस्तु का ब्लैक मार्केटिंग होता था। साथ ही हर तरह के खाद्य पदार्थ और सीमेंट जैसी अनेक प्रकार की वस्तुओं में बहुत मिलावट होती थीं।
आधुनिक भारत के निर्माता नेहरू चाचा कितने बड़े युगद्रष्टा थे, इसका एक और क़िस्सा सुनिये। नेहरू चचा ने 𝟏𝟗𝟓𝟕 में राजधानी दिल्ली के विकास के लिए 𝐃𝐃𝐀 की स्थापना की।
ऐसी एजेंसी जो मास्टर प्लान बनाती थी,उसमें अगले 𝟓𝟎 वर्षों की ही प्लानिंग करती थी कि, 𝟓𝟎 साल बाद ये शहर कैसा होगा। इसकी प्लानिंग करके ही शहर बसाया जाता है। उसकी सड़कें, पुल, सार्वजनिक परिवहन, रेलवे स्टेशन, बिजली पानी की व्यवस्था सब 𝟓𝟎 साल का सोच कर की जाती है।
नेहरू चाचा कहते थे, "मेरे सपनों का भारत" चाचा ने सपने में भी कभी नही सोचा था कि, दिल्ली वाले जिंदगी में कभी कार तो क्या, स्कूटर भी खरीद पाएंगे इसलिये 𝟔𝟎 और 𝟕𝟎 के दशक में बनाये गए, दिल्ली के 𝐃𝐃𝐀 फ्लैट्स देख लीजिये। किसी फ्लैट में कार, तो छोड़ो स्कूटर खड़ा करने तक की जगह नहीं है।
नेहरू चाचा कितने बड़े युगद्रष्टा थे, इसकी एक और मिसाल '𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚 𝐔𝐧𝐛𝐨𝐮𝐧𝐝𝐬' नामक किताब के लेखक गुरुचरण दास ने दी है। आप 𝟔𝟎 और 𝟕𝟎 के दशक में 𝐏&𝐆 के 𝐂𝐄𝐎 रहे हैं। नेहरू जी एवं इंदिरा जी के भारत में किसी कंपनी को टूथपेस्ट की ज़्यादा ट्यूब बनाने के लिए भी भारत सरकार से आज्ञा लेनी पड़ती थी और वो आज्ञा बहुत देरी में मिलती थी!
𝟕𝟎 के दशक में एक बार तमिलनाडु में फ्लू फैल गया 𝐏&𝐆 का मशहूर विक्स इन्हेलर और विक्स वेपोरब तब भी बनता था। फ्लू फैला, तो विक्स बाजार से गायब हो गई। कंपनी ने भारत सरकार से 0𝟓 लाख अतिरिक्त विक्स इन्हेलर बनाने की इजाजत मांगी। वो इजाजत डेढ़ महीने में आयी, तब तक फ्लू ठीक हो चुका था। हमेशा ऐसा ही होता था!
बजाज के पास तब भी यह क्षमता थी कि, वे लाखों स्कूटर बना देते, पर नेहरू जी और इंदिरा जी ने उनको कभी भी बड़ी संख्या में स्कूटर बनाने नहीं दिए, जिससे ब्लैक मार्केटिंग बंद हो सके।

गुरुचरण दास लिखते हैं कि, बिड़ला जी के एक बेटे आदित्य बिड़ला ने भारत मे जब हिंडाल्को खड़ी की, तो नेहरू इंदिरा ने उनको इतना परेशान किया कि, उन्होंने फिर कभी देश में लम्बे समय तक कोई फैक्ट्री नहीं लगाई। जबकि उन्होंने अपने जीवन मे देश के बाहर 𝟑𝟐 बहुत बड़ी बड़ी फैक्टरी लगाई।  

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