भारत में पल रहे पकिस्तानपरस्तों की लगता है कि उनकी आत्मा मर चुकी है। 2014 चुनाव से पहले आतंकवाद ने भारत में कितना खून-खराबा किया भूल गए। ये पाकिस्तानपरस्त भूल गए कि 2014 चुनाव से पहले सरकारें आतंकवादियों का महिमामंथन कर हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद का शोर मचाकर हिन्दुओं को बदनाम किया जाता था। बेगुनाह साधु/संत और साध्वी को आतंकवाद के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर जेलों में अमानवीय व्यवहार किसी जाता था। अगर वही व्यवहार आतंकियों के साथ किया होता इन पाकिस्तानपरस्तों ने सड़क से संसद तक आसमान सिर पर उठा लिया होता। जिस ATS करकरे की मौत होने पर साध्वी प्रज्ञा द्वारा ख़ुशी जाहिर करने पर विपक्ष चुनाव आयोग तक पहुँच गया। इन बेगैरतों ने स्वामी असीमानन्द, साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित पर कितने अत्याचार किए थे उस पीड़ा को समझने की कोशिश की? दूसरे, ये बेशर्म पाकिस्तान में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों पर क्यों नहीं बोले? क्या इन लोगों के घर मातम मच जाता है कि मातम में डूबे होने की वजह से मुंह नहीं खुलता? बटवारे के बाद पाकिस्तान में कितने प्रतिशत हिन्दू थे आज कितने ये बेशर्म जवाब देंगे? आखिर ये दोगलापन क्यों?
जब हरिद्वार पुलिस ने ड्रोन के जरिए मजहबी बस्तियों की छतों की वीडियो बनाई |
— THE JAT ASSOCIATION (@Jatassociation) July 1, 2026
तो ऐसा कोई सा भी घर नहीं दिखा जिस पर ईंट पत्थर हजारों की संख्या में ना दिखे हों | 😡
मतलब जिस दौर में हिंदू छत साफ रख वास्तु दोष मिटा रहा है उस दौर में मजहबी पत्थर रख आगे की तैयारी कर रहे हैं | pic.twitter.com/msEhVuziqQ
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने एक संयुक्त पहल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को खुला पत्र लिखा है। पत्र में दोनों देशों से टकराव की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने और आपसी रिश्तों को फिर से सामान्य बनाने की अपील की गई है। इस पत्र पर भारत की 61 और पाकिस्तान की 56 प्रमुख हस्तियों के हस्ताक्षर हैं। भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, आरजेडी सांसद मनोज झा सहित कई पूर्व अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं। वहीं पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत कई प्रमुख लोगों ने इस पहल का समर्थन किया है।
पत्र में कहा गया है कि लगातार बढ़ती शत्रुता से दोनों देशों के विकास, क्षेत्रीय स्थिरता और आम नागरिकों के हित प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए भारत और पाकिस्तान को संवाद का रास्ता अपनाकर दक्षिण एशिया में शांति और सहयोग का माहौल बनाना चाहिए।हस्तियों ने दोनों सरकारों के सामने 11 प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें—
- भारत-पाकिस्तान के बीच आधिकारिक वार्ता दोबारा शुरू हो।
- जम्मू-कश्मीर समेत सभी विवादित मुद्दों पर बातचीत हो।
- सीमा पर सैन्य तनाव कम किया जाए।
- दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाया जाए।
- सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान फिर शुरू किया जाए।
- क्रिकेट और अन्य खेलों की द्विपक्षीय सीरीज बहाल की जाए।
- सीधी हवाई सेवाएं दोबारा शुरू हों।
- वीजा प्रक्रिया आसान बनाई जाए।
- दोनों देशों में हाई कमिश्नर की नियुक्ति फिर से हो।
- बस सेवाएं, करतारपुर कॉरिडोर और अटारी-वाघा बॉर्डर पर सामान्य आवाजाही बहाल की जाए।
- दोनों देशों के बीच व्यापार दोबारा शुरू किया जाए।
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