12 जुलाई, 2026, आज से 2 साल पहले 12 जुलाई, 2024 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने केजरीवाल को शराब घोटाले में ED के केस में अंतरिम जमानत देते हुए कहा था कि ED को किसी को भी अपनी मर्जी से गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है।
केजरीवाल की गिरफ़्तारी पर जब दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगाने से मना कर दिया और उसके खिलाफ सबूतों को देख कर यहां तक कह दिया कि ये अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ, उसी दिन ED ने उसे 21 मार्च, 2024 को गिरफ्तार कर लिया था। उसकी गिरफ़्तारी को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने बिंदुवार दलीलें देकर उचित ठहराया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट की पीठ जस्टिस शर्मा के फैसले को काट नहीं सकी।
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जब सुप्रीम कोर्ट के 2 जज जस्टिस परदीवाला और जस्टिस महादेवन राष्ट्रपति को आदेश दे सकते थे और इस मामले को संविधान पीठ को भेजने की जरूरत नहीं समझते थे जबकि वह पूरी तरह संवैधानिक मामला था और संविधान पीठ को भेजा जाना चाहिए था तो फिर दो जज, जस्टिस खन्ना और जस्टिस दत्ता गिरफ़्तारी की वैधता पर निर्णय क्यों नहीं दे सके।
केजरीवाल को तब तक के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी जब तक संविधान पीठ अपना निर्णय न सुना दे।
लेकिन आज दो वर्ष बाद भी केजरीवाल के मामले के लिए संविधान पीठ का गठन नहीं किया गया है। कैसे काम करता है सुप्रीम कोर्ट? क्या अंतरिम जमानत देकर काम पूरा हो गया और संविधान पीठ बनाना सुप्रीम कोर्ट भूल गया जबकि इस व्यक्ति ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर ही कीचड़ नहीं उछाली, उसने पूरी न्यायपालिका का अपमान किया।
अंतरिम जमानत तो अभिषेक मनु सिंघवी ने दिला दी, कैसे दिला दी, इस पर कुछ कहना उचित नहीं होगा लेकिन संविधान पीठ का गठन न होने में क्या गोलमाल है जबकि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या लगभग पूरी है?

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