6 क़त्ल बलात्कारी ने नहीं किए बल्कि उसे मंदिर के “प्रसाद” की तरह जमानत देने वाले जज ने किए उस जज को सजा कौन देगा, जनता?

सुभाष चन्द्र

तेलंगाना के 28 वर्षीय राजकुमार के खिलाफ 16 मई 2026 एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की पोक्सो कानून में यौन शोषण की शिकायत दर्ज करती है। जून, 2026 में शाहबाद तेलंगाना की लोकल अदालत उसे “अग्रिम जमानत” दे देती है जिसका मतलब है बलात्कार का आरोपी गिरफ्तार ही नहीं हुआ कोर्ट की उदारता उस आरोपी के लिए वरदान बन गया क्योंकि कोर्ट ने आजकल के चलन के अनुसार मंदिर के प्रसाद की तरह जमानत दे दी - Bail is a rule and jail is an exeption. यही philosophy आजकल हर कोर्ट झाड़ रहा है

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नतीजा क्या हुआ? राजकुमार ने सबसे पहले उस लड़की का कत्ल किया जिसने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज की थी, फिर उसके घर जाकर लड़की की माँ और दादी की जान ली इतना ही नहीं, वो अपने घर गया और वहां अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों का भी खून कर दिया

कुछ समय पहले असम में भी पोक्सो एक्ट के आरोपी को जमानत दे दी गई और उसने सीधे उस महिला के घर जाकर उसकी हत्या कर दी जिसने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज की थी

अब राजकुमार के जघन्य अपराध के लिए बड़ी बड़ी बहस शुरू हो जाएंगी और उसे मानसिक रूप से विक्षिप्त साबित करने की कोशिश की जाएगी जबकि उसके खिलाफ तुरंत मुकदमा शुरू करके फांसी की सजा दे देनी चाहिए लेकिन अदालत सबूत ढूढ़ती फिरेंगी और अगर सजा दे भी दी तो हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट वर्षों लगाकर उसकी फांसी की सजा घटा कर आजीवन कारावास में बदल देंगी शायद एक बात ध्यान में रख कर कि Every Sinner has a future.

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या शाहबाद लोकल कोर्ट का जज जिम्मेदार नहीं है इन 6 लोगों की हत्या के लिए क्योंकि उसने राजकुमार को गिरफ़्तारी से पहले “अग्रिम जमानत” दे दी और उसने 6 मासूम लोगों की हत्या को अंजाम दे दिया उस जज का न्याय कौन करेगा - जनता ?

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