आईबी अफसर अंकित शर्मा को 25 फरवरी, 2020 को राक्षसों की तरह मार कर ताहिर हुसैन और उसके गिरोह ने इंसानियत की सभी मर्यादाएं तार तार कर दी थी और ताहिर हुसैन के पीछे खड़ा था केजरीवाल और उसकी आम आदमी पार्टी। अगर ताहिर हुसैन पकड़ में न आता तो वो अभी भी केजरीवाल का चहेता होता। वो पकड़ा गया तो केजरीवाल ने उसे पार्टी से निकाल कर अपना पल्ला झाड़ लिया लेकिन यह तो सत्य ही है कि दंगों के समय वो केजरीवाल का ही आदमी था और दिल्ली दंगे ठीक उस समय करवाए गए जब डोनाल्ड ट्रंप भारत की यात्रा आने वाले थे।
निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट को अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के साथ इस बात का भी संज्ञान लेना होगा कि दंगा भारत को बदनाम करने उस समय किया गया था जब विदेशी मेहमान अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत आए हुए थे। दूसरे, इन हत्यारों की पैरवी करने वाले वकीलों के साथ भी सख्ती से पेश आना होगा।
अंकित को 51 बार चाकुओं से छलनी कर दिया। ये लोग इंसान कहलाने लायक ही नहीं है। ये बर्बरता ताहिर हुसैन ने अपनी कौम की सोच के अनुसार दिखाई, ऐसा कहने में कोई संशय नहीं होना चाहिए। यही बर्बरता हमास ने इजरायल के लोगों के साथ दिखाई थी।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
ताहिर हुसैन के साथ उसके गिरोह के नाज़िम, कासिम, जावेद और अनस को भी ऐसे आरोपों में दोषी पाया है जबकि 6 लोगो को बरी कर दिया। इस तरह अगर देखा जाए तो कोर्ट ने ताहिर और उसके साथियों को निष्पक्ष तरीके से दोषी ठहराया है, अगर ऐसा न किया होता तो सभी 11 अभियुक्तों को दोषी करा देता।
ताहिर हुसैन जैसे दंगाइयों और आतंकियों को अपने बचाव की चिंता नहीं होती क्योंकि उसके लिए जमीयत उलेमा-ए-हिंद अपनी वकीलों की फ़ौज खड़ी कर दता है। इस उलेमा ने कोर्ट में ताहिर के साथ उसके दंगाइयों की भी पैरवी की थी।
ताहिर जैसे लोग और अन्य आतंकी अपने मुल्ला मौलवियों के बहकावे में आकर हत्या और आतंकी हमले तो कर देते हैं लेकिन यह भूल जाते है कि एक दिन तो उनकी गर्दन देर से ही सही कानून के हाथ में आ सकती है।
आज ताहिर हुसैन को दोषी करार दिए जाने पर सेक्युलर दलालों के मुंह में सीमेंट भर गया है, केजरीवाल ने एक शब्द नहीं बोला क्योंकि ताहिर ने जिसकी हत्या की वो सरकार की IB का हिंदू अधिकारी था।
कल मैंने अपने लेख में लिखा था कैसे अमेरिका, नीदरलैंड और स्विट्ज़रलैंड भारत के अल्पसंख्यकों (मुसलमानों) के लिए आंसू बहाते हैं और कहते हैं कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है, अब वो देश आंखे खोल कर देख लें कि जिस अल्पसंख्यक समुदाय के लिए वो टसुए बहाते हैं, वह अल्पसंखयक क्या करते हैं भारत में। उन देशों को अभी पता नहीं है “सर तन से जुदा” क्या होता है लेकिन उन्हें बस भारत को बदनाम करने के लिए ढोल पीटने से मतलब है।
अंकित शर्मा के पिता ने ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की है और यही होना चाहिए क्योंकि उसके बिना अंकित के लिए इंसाफ अधूरा रहेगा। ईश्वर उसकी आत्मा को शांति दे।
अभी दिल्ली दंगों के लिए उमर खालिद और शरजील इमाम पर भी फैसला होना है। खालिद के माता पिता तो न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी के सामने अपने बेटे की बेगुनाही बता कर आ चुके हैं। उत्तराखंड के दिलबर सिंह नेगी की 24 फरवरी, 2020 को भीड़ ने बुरी तरह पिटाई कर जिंदा जला कर हत्या कर दी थी। अभी उसकी हत्या के बारे में फैसला आना है लेकिन कुछ आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
लोग ताहिर हुसैन को आम आदमी पार्टी का पूर्व पार्षद कहते हैं। पूर्व क्यों कहते हो, वो दिल से तो अभी भी केजरीवाल की जमात में शामिल है। ताहिर हुसैन के दोषी करार दिए जाने से केजरीवाल का मुंह काला हो गया।

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