हूतियों ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामकों पर हमला किया (फोटो साभार : People's Update)
सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच एक बार फिर से खूनी संघर्ष शुरू हो गया है। यमन की तरफ से दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों ने दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘अरामको’ और सऊदी के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है और लाल सागर के रास्ते होने वाले वैश्विक व्यापार पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
यमन की तरफ से सऊदी अरब पर अचानक कई मिसाइल और ड्रोन दागे गए। इन हमलों की वजह से सऊदी अरब के जिजान औद्योगिक शहर में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। जिजान की एक बेहद अहम सुविधा को इस हमले में सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है।
इस हमले की चपेट में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको से जुड़ी तेल सुविधा भी आ गई। हमलों के बाद सऊदी अरब के कई इलाकों में अचानक बिजली गुल हो गई। इसके अलावा यमनी हमलों ने सऊदी के यानबू और दमाद इलाकों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।
यानबू में इमरजेंसी अलर्ट और हूतियों की चेतावनी
सऊदी अरब के सिविल डिफेंस विभाग ने खतरनाक हालात को देखते हुए यानबू प्रांत के लिए नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म पर आपातकालीन अलर्ट जारी किया है। यह पूरा विवाद तब और भड़क गया जब शुक्रवार (24 जुलाई) देर रात सऊदी अरब ने यमन के हूती-नियंत्रित शहर होदेइदा पर हवाई हमले किए थे।
हूती के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों के बाद कड़ी चेतावनी जारी की थी कि सऊदी अरब को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। हूती समूह से जुड़े अल मसीरा टीवी के अनुसार, सऊदी हमलों में होदेइदा में दूरसंचार प्राधिकरण की सुविधाओं को भारी नुकसान पहुँचाया गया था। साथ ही कमरान द्वीप पर भी बमबारी की गई, जिसमें एक महिला के घायल होने की खबर सामने आई थी।
इससे पहले बुधवार (22 जुलाई) को हूती विद्रोहियों ने बड़ा दावा किया था कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को अपना निशाना बनाया है। हूती हमलों की वजह से कम से कम एक जहाज को गंभीर नुकसान भी पहुँचा है।
हूतियों ने यह आक्रामक कार्रवाई 20 जुलाई को घोषित की गई अपनी नाकेबंदी के तहत की है। उनका कहना था कि यह हमला सना हवाई अड्डे पर हुए हमले का एक करारा जवाब है। हालाँकि, सऊदी समर्थित सरकार ने पहले सना हवाई अड्डे पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी।
सऊदी की जवाबी कार्रवाई
सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना ने इन सभी हमलों का जवाब दिया। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल मल्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि सेना ने यमन के होदेइदाह प्रांत में हूती मिलिशिया के सभी वैध सैन्य ठिकानों पर उचित सैन्य जवाबी कार्रवाई की है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यमन के होदेइदाह, रास इस्सा और सालिफ बंदरगाह समुद्री आवाजाही के लिए पूरी तरह खुले हुए हैं। वहाँ लगातार कमर्शियल जहाज आ-जा रहे हैं। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि हवाई यातायात को खुला रखने के लिए किसी भी एयरपोर्ट को निशाना नहीं बनाया गया है, लेकिन हूती विद्रोहियों ने खुद सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फ्लाइट ऑपरेशंस रोक रखे हैं।
Fires erupt in Jizan, Saudi Arabia, due to Yemeni missile and drone strikes
— Press TV 🔻 (@PressTV) July 25, 2026
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2022 का शांति समझौता टूटा
साल 2022 में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच एक अनौपचारिक शांति समझौता हुआ था, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच बड़ी लड़ाइयाँ रुक गई थीं। मौजूदा में जो हुए हमले है, वो पिछले कुछ सालों में सऊदी गठबंधन सेना और हूतियों के बीच हुई पहली ऐसी बड़ी और खौफनाक घटना हैं।
इस नए संघर्ष के शुरू होने से दोनों देशों के बीच शांति की सारी उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं। सऊदी अरब ने चेतावनी दी है कि वह अपने जहाजों, नागरिकों और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाना जारी रखेगा। इस जंग के कारण यमन के लाल सागर के समुद्री मार्ग से होने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर दुनियाभर के देशों में गहरी चिंता बढ़ गई है।
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