गोवा के CJP प्रोटेस्ट में उमर खालिद का पोस्टर, पुलिस ने मोहम्मद दानिश को आजाद मैदान से पकड़ा: BJP कार्यकर्ताओं ने की एक्शन की माँग


गोवा की राजधानी पणजी स्थित आजाद मैदान में शनिवार (25 जुलाई 2026) की शाम को माहौल उस समय अचानक गरमा गया, जब पुलिस ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के दौरान एक युवक को हिरासत में ले लिया। पुलिस द्वारा पकड़े गए इस युवक की पहचान मोहम्मद दानिश के रूप में हुई है, जो प्रदर्शन के दौरान हाथ में विवादित पोस्टर लेकर जेल में बंद उमर खालिद के समर्थन में नारेबाजी कर रहा था।

दरअसल, आजाद मैदान में लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी आंदोलन के समर्थन में और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए थे। इसी दौरान छात्र आंदोलन की आड़ में देश विरोधी मामलों के आरोपितों का महिमामंडन (Glorification) होते देख पुलिस तुरंत हरकत में आई और युवक को अपनी कस्टडी (Custody) में ले लिया।

यह पूरी घटना शाम लगभग 7 बजे की है, जब आजाद मैदान में प्रदर्शनकारी जमा होकर नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच भीड़ में मौजूद मोहम्मद दानिश नाम का युवक एक पोस्टर हाथ में लहराते हुए दिखाई दिया। इस पोस्टर पर स्पष्ट शब्दों में ‘फ्री उमर खालिद, शरजील इमाम, भीमा कोरेगाँव 16’ लिखा हुआ था। इस तरह के पोस्टर दिखने से वहाँ मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हड़कंप मच गया।

बिना आईडी के घूम रहा था दानिश

मैदान पर तैनात पुलिसकर्मियों ने जब इस पोस्टर को देखा, तो वे तुरंत युवक के पास पहुँचे और उससे उसके संबंध में पूछताछ शुरू कर दी। अधिकारियों ने उससे उसकी पहचान साबित करने के लिए कोई वैध दस्तावेज (identity document) दिखाने को कहा, लेकिन वह नाकाम रहा।

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जब युवक से पहचान पत्र माँगा गया तो उसने साफ मना कर दिया कि उसके पास कोई आईडी (ID) नहीं है।

मामले की जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “प्रदर्शन के दौरान सबसे पहले वहाँ मौजूद कुछ स्थानीय पत्रकारों ने उस युवक को घेरा और पोस्टर के बारे में सवाल-जवाब किए। इसके तुरंत बाद आजाद मैदान में तैनात पुलिस बल के जवानों ने हस्तक्षेप किया और उससे उसका पहचान पत्र दिखाने को कहा। हालाँकि उस व्यक्ति ने अधिकारियों से कहा कि वह उस समय कोई भी पहचान पत्र साथ लेकर नहीं चल रहा है।”

पुलिस अधिकारी ने आगे बताया, “मैदान में किसी भी तरह की अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था (Law & Order) की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए हम उस व्यक्ति को तुरंत पणाजी पुलिस स्टेशन ले आए, जहाँ उससे विस्तार से पूछताछ की जा रही है।” इस पूरी कार्रवाई का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें पुलिस अधिकारी युवक से उसका पहचान पत्र माँगते हुए दिख रहे हैं।

उधर जैसे ही इस घटना की जानकारी फैली, भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ता पणजी पुलिस स्टेशन के बाहर एकत्र हो गए। बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर धरना दिया और माँग की कि ‘फ्री उमर खालिद’ के पोस्टर लहराने वालों और उनके समर्थकों के खिलाफ सख्त धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।

पणजी में हिंसक प्रदर्शनों को लेकर कई FIR दर्ज

पणजी में इस तरह के अनाधिकृत प्रदर्शन को लेकर पहले भी पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। जिसमें गोवा पुलिस ने बिना अनुमति के निकाली गई सीजेपी की एकजुटता रैली को लेकर अज्ञात समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बीते सोमवार की शाम सैकड़ों की संख्या में लोग मिरामार सर्कल पर जमा हुए थे और वहां से मार्च निकालते हुए आजाद मैदान पहुँचे थे। बाद में जाँच में खुलासा हुआ कि आयोजकों ने इस प्रदर्शन के लिए स्थानीय प्रशासन से कोई पूर्व अनुमति (Prior Permission) नहीं ली थी।

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों 2020 में खालिद का अहम रोल

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र और पूर्व सिमी (SIMI) सदस्य के बेटे उमर खालिद को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 14 सितंबर 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार किया था। उस पर गैर-कानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है। फरवरी 2020 में भड़के इन दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी।

पुलिस जाँच के अनुसार, खालिद इस हिंसा की बड़ी साजिश (Conspiracies) के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था, जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान सड़कों को जाम करने और हिंसा भड़काने की योजना बनाई थी। पुलिस ने यह भी खुलासा किया है कि उसने जरूरी इंतजामों पर चर्चा करने के लिए आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और सह-आरोपी खालिद सैफी से मुलाकात की थी और जाँच के दायरे में शामिल संगठनों से भी उसके संबंध थे।

खालिद ने यह कहकर मुसलमानों को दंगे करने, सड़कें रोकने और लोगों को परेशान करने के लिए इकट्ठा किया था कि नया कानून ‘मुसलमानों के खिलाफ’ है। उसने ‘चक्का जाम’ में महिलाओं और बच्चों को भी शामिल करने की योजना बनाई थी।

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