चंपत राय जी ने कह कर कि कलंक लेकर नहीं जाऊंगा, कुछ इशारा कर दिया; रामगोपाल यादव को भी SIT समन करे और चोरों के नाम देख कर सोचो वो “कौन जात हैं”?

सुभाष चन्द्र

जुलाई 1 को चंपत राय जी ने कहा है कि अयोध्या में उनकी सेवा पूरी हो गई लेकिन अपने पर कलंक लेकर नहीं जाऊंगा यह बात कह कर ही उन्होंने इशारा कर दिया कि वो समय आने पर कुछ ऐसे भेद खोलेंगे जिससे उन पर हो रहा मीडिया ट्रायल बेनकाब होगा उन्हें ऐसा करना ही चाहिए लेकिन उन्हें ही नहीं हर किसी को एक सीख भी लेनी चाहिए कि किसी पर अतिविश्वास कभी कभी घातक होता है। 

चोरों ने अपने आकाओं के कहने पर खेल तो खेल दिया लेकिन अंजाम नहीं सोंचा। 

तरह तरह की कहानियां सोशल मीडिया में गढ़ी जा रही है चंपत राय के बारे में आज कहीं पढ़ा जिसमें लिखने वाला कह रहा है कि SIT के सदस्यों को आते ही उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि पहले मुझसे पूछताछ करो और पूछताछ में कई बार SIT के लोगों को धमकी दी जबकि सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने अपने चैनल पर कहा कि चंपत राय ने सबसे पहले SIT को पूरी व्यवस्था से अवगत कराया

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एक स्टोरी बाजार में है कि चंपत राय ने मंदिर में गुप्त कैमरे लगाए हुए थे जिनसे उन्हें चोरी के बारे में पता चला इस बात का चंपत राय ने कभी खंडन नहीं किया  मीडिया ने कभी इस विषय को उठाया ही नहीं मीडिया तो उन्हें शीघ्र जेल भेजने के प्रयास कर रहा है मैं फिर कहता हूँ जितनी इन पत्रकारों की उम्र है, उससे ज्यादा समय तो चंपत राय समाज, संघ, विहिप और राम मंदिर को दे चुके हैं उनकी व्यवस्था में हो सकता है कुछ कमी रह गई हो लेकिन उन पर चोरी का आरोप लगाना मूर्खता है

जिसके मुंह में जो आ रहा है, बोल रहा है जुलाई 1 को  समाजवादी रामगोपाल यादव कह रहे थे कि 20 हजार करोड़ रुपए का घपला हुआ है जिसमें दान राशि, सोना चांदी के आभूषण चोरी हुए हैं जबकि अखिलेश यादव ने 7 करोड़ की बात की थी

उचित समय आने पर चंपत जी ने धमाका कर मीडिया से लेकर विपक्ष को औंधे मुंह गिराएंगे, लेकिन SIT से लेकर मीडिया में से किसी में रामगोपाल और अखिलेश से यह पूछने की हिम्मत नहीं कि 'किन लोगों से तुम्हे कैसे मालूम हुआ कि 20 हजार करोड़ रुपए का घपला हुआ है जिसमें दान राशि, सोना चांदी के आभूषण चोरी हुए हैं', पुलिस और SIT को इसे गंभीरता से लेने की जरुरत है।  

मेरा मानना है कि कालनेमि पार्टी “समाजवादी पार्टी” के इन दोनों नेताओं को SIT को समन करके पूछना चाहिए कि जिस रकम की चोरी की बात आप कर रहे हो, वह आपको कहां से पता चली और उसके सबूत दीजिए और अगर सबूत नहीं देते तो FIR कर अंदर कर देना चाहिए आज यह मत समझना कि इनके और अन्य दलों के मन में भगवान राम के प्रति कोई श्रद्धा पैदा हो गई है, उनकी मंशा तो 2027 तक उत्तर प्रदेश के चुनाव तक इस मुद्दे को भुनाने के लिए जीवित रखना है लेकिन योगी बाबा इस घोटाले में हर किसी का पर्दाफाश कर देंगे, हर किसी का मतलब विपक्षियों समेत

जुलाई 1 को रिपब्लिक भारत पर बताया गया पकड़े गए 8 कथित चोरों के घर से कितना धन बरामद हुआ है -

-अविनाश शुक्ल - 20 लाख रुपए और डॉलर;

-करुणेश पांडेय - 18 लाख रुपए 

-लवकुश मिश्रा - 14 लाख रुपए;

-अनुकल्प मिश्रा - 16 लाख रुपए;

-रामशंकर मिश्रा - 7 लाख रुपए;

-मनीष यादव - 2 लाख रुपए;

-टिन्नू यादव - 1 लाख रुपए 

-अविनाश - 1121 US डॉलर;

गिरफ्तार हुए 8 में 6 लोग वाराणसी की सैनिक सिक्योरिटी सर्विस के कर्मचारी थे, स्टेट बैंक को एक अनुबंध के अनुसार 1 जनवरी, 2026 एजेंसी ने 65 लोग हाउसकीपिंग के लिए दिए गए थे लेकिन स्टेट बैंक ने उन्हें मंदिर में दान गणना में लगा दिया इसलिए घपले में स्टेट बैंक भी अपने को पाक साफ़ नहीं कह सकता 

समाज के एक वर्ग के लोग जो UGC पर सबसे ज्यादा भड़क रहे थे, वो देख सकते हैं कि ऊपर दिए गए 8 में पहले 5 लोग कौन हैं? 

जुलाई 1 को फेसबुक की किसी की पोस्ट में लिखा था कि राम मंदिर से चोरी का पाप किसके हिस्से आएगा मोदी, भाजपा, आरएसएस या विहिप के? वो क्या मंदिर निर्माण रोकने का पाप भी किसी के सिर मढ़ेगा और मंदिर निर्माण करने का पुण्य किसी को देगा मोदी, भाजपा, आरएसएस या विहिप को या केवल पाप बांटना चाहता है, पुण्य नहीं 

आज वो लोग भी राम नाम की गंगा में स्नान करना चाहते हैं जिनके राज में अयोध्या की सरयू कारसेवकों की रक्त से लाल कर दी गई थी

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