एम जे अकबर का करियर कैसे बर्बाद किया गया?

पत्रकार सुपर्णा शर्मा 
सुभाष चन्द्र

वर्ष 2017 में बॉलीवुड की तनुश्री दत्ता ने मी-टू अभियान चलाया नाना पाटेकर पर आरोप लगा कर। उसके बाद प्रिया रमानी ने अक्टूबर, 2018, में 25 साल पुराने कथित यौन शोषण का आरोप विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर पर लगा दिया, मंत्रीपद चला गया और आज 8 साल बाद भी वो रमानी के खिलाफ केस लड़ रहा है केस में किस किस तारीख को क्या हुआ, पहले ये देखिए ➖

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चर्चित YouTuber 
-अक्टूबर 2018 को प्रिया रमानी ने अकबर के खिलाफ sexual misconduct का आरोप लगाया जो कथित तौर पर दिसंबर,1993 में हुआ

-15 अक्टूबर, 2018 को अकबर ने रमानी पर आपराधिक मानहानि का केस दर्ज किया;

-29 जनवरी, 2019 को कोर्ट ने एक अभियुक्त के तौर प्रिया को समन किया;

-25 फरवरी, 2019 रमानी कोर्ट में पेश हुई और जमानत मिल गई;

-1 फरवरी, 2020 को कोर्ट ने अंतिम सुनवाई की; और 

-17 फरवरी, 2021 को (यानी एक साल बाद) कोर्ट ने अकबर का केस ख़ारिज करते हुए कहा कि WOMAN’S RIGHT TO DIGNITY OUTWEIGHS A MAN’S RIGHT TO REPUTATION. महिला उस अधिकार के लिए दशकों बाद भी आवाज़ उठा सकती है

-मार्च-सितंबर 2025 में अकबर ने हाई कोर्ट में अपील दायर की जो MP/MLA कोर्ट को भेज दी गई;

-हाई कोर्ट ने 16 मार्च, 2026 अंतिम सुनवाई के लिए तय की;

-लेकिन अब उसे बढ़ा कर 24 सितंबर, 2026 कर दिया गया है

- इस बीच MP/MLA कोर्ट के मुक़दमे अभी तक देख रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की जगह अब जस्टिस मनोज जैन देखेंगे

1 फरवरी, 2020 को सब तरह से सुनवाई पूरी करने के बाद चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार पांडेय ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर फैसले के लिए 10 फरवरी की तिथि तय की। उस दिन ये नहीं कहा गया कि दोनों पक्ष अपने लिखित बयान भी देंगे

लेकिन 10 फरवरी को यानी फैसले के दिन CMM पांडेय ने ये कह कर फैसले की तारीख 17 फरवरी कर दी कि लिखित बयान देर से भेजे गए दोनों पक्षों द्वारा। ये बात कुछ हजम नहीं हुई थी और उस दिन होने वाले फैसले पर शंका थी मुझे

जब आपने 10 फरवरी को फैसला देना था तो दोनों पक्षों को लिखित बयान 3 फरवरी तक देने को कहना था और तब ही तय तारीख पर फैसला हो सकता था मगर ऐसा नहीं किया गया

जैसा मैंने कल तरुण तेजपाल के केस में कहा था कि फैसले की तारीख बदलना कुछ गोलमाल की तरफ इशारा करता है और अकबर के केस में भी ऐसा ही हुआ

इस केस में सबसे रहस्यमय बात यह है कि एक तरफ प्रिया रमानी ने दिसंबर 1993 में अकबर पर Sexual Misconduct (रेप का नहीं) का आरोप लगाया दूसरी तरफ वह MJ Akbar की फरवरी,1994 में शुरू होने वाली पत्रिका Asian Age में जनवरी,1994 में ही नौकरी ज्वाइन कर गई

गूगल के अनुसार प्रिया ने लॉन्च से पहले की तैयारियों के लिए नौकरी ज्वाइन की यानी अकबर की कहानी फर्जी थी फिर 25 साल तक खामोश क्यों रही? 

इसका मतलब साफ है या तो प्रिया रमानी ने झूठे आरोप लगाए और या उसे MJ Akbar के व्यवहार से कोई समस्या नहीं थी क्योंकि Asian Age के मालिक तो वही थे जब MJ Akbar ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया तो उसे उनकी संस्था में जाना ही नहीं चाहिए था और यह साबित करता है कि इसकी शिकायत मनघडंत और किसी राजनीति से प्रेरित थी

MJ Akbar एक समय में भाजपा/RSS/Modi के कट्टर आलोचक थे लेकिन मार्च 2014 में भाजपा में शामिल हो गए और राज्यसभा के सदस्य बने उन्होंने विदेश राज्य मंत्री रहते इस्लामिक देशों से भारत के संबंधों को आगे बढ़ाया बस इसी कारण शायद उनके खिलाफ यह षड्यंत्र रचा गया और मोहरा बनी प्रिया रमानी

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