स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस इतना ही तो कहा था कि हमने नक्सलवाद को ख़त्म कर दिया और अब बस दिमागी नक्सलवाद से निपटना बाकी है। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया कि कौन हैं दिमागी नक्सल।
लेकिन छुपे हुए सांप अपने बिलों से स्वयं बाहर निकल पड़े और होड़ लग गई अपने को “दिमागी नक्सल” साबित करने की। सबसे पहले पी चिदंबरम बोला उसे “दिमागी नक्सल” होने पर गर्व है। जिसने हिंदुओं को आतंकवादी कहा वो दिमागी तौर पर ही नहीं असल में नक्सली है।
उधर महुआ मोइत्रा भी बोली वो भी दिमागी नक्सल है। तुम्हारी सरकार ने तो 15 साल में पूरे बंगाल को नक्सलबाड़ी बना दिया। इसलिए तुम्हारी तो पूरी पार्टी ही नक्सलियों की है।
जो महबूबा मुफ़्ती कश्मीर में तिरंगा उठाने वालों की खून की नदियां बहाने की बात करती थी, वो दिमागी नहीं बल्कि पाकिस्तानी नक्सल है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
एक और असली नक्सली है योगेंद्र यादव उर्फ़ सलीम मियां। उनके बयान ही बताते हैं कि वो परले दर्जे का नक्सली है। कुछ बयान सलीम मियां के देखिये -
“मैं राहुल गांधी और विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बोलते बोलते थक गया हूँ कि चुनाव प्रक्रिया से मोदी और भाजपा को हरा नहीं पाएंगे। नेपाल और बांग्लादेश की तरह जनता को लेकर सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
कॉकरोच बहुत अच्छा खेले। इतना तो हम भी नहीं कर पाते परंतु जिस तरह जल्दबाजी में आंदोलन का अंत हुआ, उससे बहुत दुख हुआ, 10-12 दिन और टिक जाते तो धर्मेंद्र की जगह नरेंद्र भी लपेटे आता। प्रधान की जगह प्रधानमंत्री को भी इस्तीफ़ा देना पड़ता।
अब यह देश लोकतंत्र से नहीं, सड़क से चलेगा”।
सलीम मियां को पता नहीं कि उसी नेपाल में लगता है कोई विराथु पैदा हो गया है जो हिंदुओं पर अत्याचार करने वालों को ठोक रहा है।
इसके बयान काफी है इसे UAPA में गिरफ्तार करने के लिए।
ये जो ‘दिमागी नक्सल” होने पर गुरुर कर रहे हैं, उनका इलाज भी नरेंद्र मोदी के दिमाग में होगा। उनकी विदेशी फंडिंग पर सरकार की नज़र होगी और जो अभी अमेरिका से दीपके जैसे कॉकरोच आयात किये गए थे, उनकी भी हवा ख़राब होगी। सुना है दीपके अमेरिका भागने के चक्कर में था लेकिन एयरपोर्ट पर ही दबोच लिया गया और उसे लिखत में दे दिया गया है कि तुम देश छोड़ कर तब तक नहीं जा सकते, जब तक तुम्हारे कानूनी मामले सुलझ न जाएं।
नरेंद्र मोदी कोई काम जल्दबाजी में नहीं करते। दूर की सोचते है जहां तक हम नहीं सोच सकते।
बेहतर होगा इंडी गठबंधन का नाम अब “नक्सली गठबंधन” कर दिया और सबसे बड़े “दिमागी नक्सल” को उसका अध्यक्ष बना दिया जाए।

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