इन्हे जानते हैं, कौन है ये ?ये सोवियत संघ (USSR) के अंतिम राष्ट्रपति "मिखाईल गोरवाचौव" हैं । इनकी खूबी ये थी कि अभी का रूस जो तब अविभाजित सोवियत संघ हुआ करता था, को 7 टुकड़ो में खंड खंड कर बाँटने का श्रेय जाता है..।
ये अमेरिका के डीप स्टेट का मोहरा थे जिन्हें सोवियत संघ के सर्वोच्च पद तक पहुँच गया और उसे खंडित कर डाला था। 15 वर्षों तक इनको पाल-पोस कर अमेरिका ने राष्ट्रपति के पद तक पहुँचवाया था। उसके बाद देश छोड़ भाग गया था,अमेरिका ने ही शरण देकर गोरवाचौव को अपने यहाँ के एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की नौकरी भी दी और अंत में वहीँ मरे।
डीप स्टेट अब भारत में भी एक प्यादे को संसद के नेता विपक्ष की कुर्सी तक पहुँचवा पाने में सफल हो चुके हैं। भारत के दुश्मन और वो सतत प्रयासरत है, देश को जातियों मे बाँटने में, कभी चुनी सरकार पर मिथ्या आरोप, कभी न्यायलायों पर आरोप, अब निर्वाचन आयोग, चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ षड़यंत्र कर झूठा आरोप लगा तमाशा कर रहा है आजकल।
बाकी अब विचार आपको करना है इस विदेशी गर्भ से उत्पन्न औलाद पर..क्या यह देश भक्त हो सकता है?
गौरतलब है कि रौउल विंची के ब्रिटिश नागरिक होने का केस दिल्ली और इलाहबाद हाई कोर्ट में पेंडिंग है जिस पर जल्द सुनवाई होनी है । कांग्रेस गिरोह और उसके दिहाड़ी वाले चमचों बेलचो ने इस पर एकदम मौन साध रखा है।
मित्रो सावधान रहिए, ये भारत मिखाईल गोरवाचौव है । कही ये भारत को भी बर्बादी की राह पर न ले जाए।
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