गर्त में स्वयं जाने को उत्सुक है कांग्रेस; राहुल विंची कांग्रेस के लिए भस्मासुर साबित हो रहा है

सुभाष चन्द्र

जिस मनुस्मृति को लेकर सनातन विरोधी राहुल और इसकी पटकथा लिखने वाले मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने हिन्दू नारी पर टिप्पणी कर सनातन को बदनाम करने की नाकाम कोशिश करने वाले भूल रहे हैं कांग्रेस में ही महिलाओं का जितना अपमान हो रहा है शायद ही किसी अन्य पार्टी में होता हो। 'टंच माल' आदि क्या क्या नहीं कहा गया। नारी का अपमान करने में इटली की महिला प्रधानमंत्री तक को नहीं बक्शा।  

आधा अधूरा ज्ञान सबसे ज्यादा सामाजिक प्रदूषण फैलाता है। एक समय था और शायद अभी भी बसपा और अन्य सेक्युलर दल मनुस्मृति को घृणा की दृष्टि से देखते हैं। अब इस बारे में राहुल विंची अपना आधा अधूरा ज्ञान बांट कर महिलाओं को बरगलाने की कोशिश कर रहा है लेकिन महिला आरक्षण का समर्थन नहीं करता।

मनुस्मृति के बारे में भ्रांति फ़ैलाने वालों को यह भी नहीं पता होगा कि मनु कौन थे? हिन्दू पौराणिक मान्यताओं और ग्रंथों के अनुसार, हाँ, स्वयंभू मनु और उनकी पत्नी शतरूपा को ही पृथ्वी पर मानव जाति (संसार के मनुष्यों) का पहला जोड़ा माना गया है। इन्हीं दोनों की संतानों से आगे चलकर पूरी मानव सृष्टि की उत्पत्ति और विस्तार हुआ।

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मनुस्मृति में नारी को पूजनीय कहा गया है और राहुल विंची महिलाओं को उल्टा पाठ पढ़ा रहा है। मनुस्मृति में कहा गया है -

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।

यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥

श्लोक का अर्थ

जहाँ नारियों का सम्मान (पूजा) होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ उनका सम्मान नहीं होता, वहाँ किए गए सारे अच्छे कार्य भी निष्फल हो जाते हैं।

मनुस्मृति में समाज को चार मुख्य वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) में विभाजित किया गया है और इसे एक कठोर व पदानुक्रमित (hierarchical) सामाजिक व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें जन्म आधारित श्रेष्ठता और अलग-अलग कर्तव्यों का विधान है। 

बस इतना पढ़ कर मनुस्मृति को ये राहुल जैसे नेता कोसने लगते हैं।

लेकिन वे कभी नहीं पढ़ते कि भगवान कृष्ण ने भगवद्गीता में वर्ण और जाति व्यवस्था का आधार जन्म के बजाय गुण और कर्म (स्वभाव) को बताया है।

कई विद्वान मानते हैं कि यदि मनुस्मृति केवल जन्मगत श्रेष्ठता पर बल देती है, तो वह गीता के आध्यात्मिक समता और कर्म-प्रधान संदेश से मेल नहीं खाती। हालांकि, पारंपरिक व्याख्याकार यह भी कहते हैं कि मनुस्मृति का मूल उद्देश्य भी कर्म और आचरण पर आधारित था, जो समय के साथ विकृत हो गया हो सकता है। जैसा आज राहुल जैसे लोग विकृत कर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।

राहुल विंची हिंदू मान्यताओं पर बढ़चढ़ कर व्याख्यान देता है और महिलाओं की हालत ख़राब होने के लिए मनुस्मृति को दोष दे रहा है लेकिन कभी इस्लाम में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण के बारे कुछ क्यों नहीं बोलता। हलाला पर बोलने की हिम्मत नहीं।

 

राजीव गांधी ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकार कुचलने के लिए सुप्रीम कोर्ट का शाहबानो का फैसला ही पलट दिया। बड़े बड़े इस्लामिक स्कॉलर महिलाओं को “खेत” कहते हैं और उन्हें पुरुषों के बराबर अधिकार नहीं हैं। तीन तलाक़ आम बात थी जो प्रथा मोदी सरकार ने ख़त्म कर दी लेकिन कांग्रेस ने समर्थन नहीं किया।

मुस्लिमों में महिलाओं की क्या हालत है यह जानने के लिए राहुल गांधी अपने ही सांसद इमरान मसूद के बेटी के साथ उसके पति ने क्या सलूक किया, वो ही पता कर ले। बेटी को मारा पीटा गया और घर से निकाल दिया। 

जहां तक जाति व्यवस्था का प्रश्न है वो ईसाइयों और मुसलमानों में भी व्याप्त है। एक जाति का मुर्दा दूसरी जाति के कब्रिस्तान में दफ़न नहीं कर सकता। शादी नहीं कर सकते। इतना ही नहीं, एक दूसरे के चर्च और मस्जिद में नहीं जा सकते।  

नवरात्रों में तेजस्वी यादव और राहुल गांधी ने मछली मांस पार्टी की थी। राजद और कांग्रेस की विधानसभा में एक तिहाई सीट रह गई। अखिलेश यादव ने भी गंगा जी पर मांसाहार की इफ्तार पार्टी और हड्डियों के टुकड़े और मांस का झूठन फेकने को सही कहा, वो भी एक तिहाई रह जायेगा। और अब अजय राय सावन के महीने में मछली पार्टी कर रहा है वो कही कांग्रेस को 99 से 33 पर न ले आए।

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