हो सकता है मेरे लेख पर मुझे बहुत कुछ भला बुरा सुनने को मिलेगा लेकिन एक सीधी बात आरक्षण हटाओ आंदोलन करने वालों को कहना चाहता हूँ कि अगर आप सोचते हैं कि मोदी विरोध कर उसे हटा कर आप आरक्षण समाप्त करा सकेंगे, तो यह आपकी भूल है।
गौरतलब बात है कि आरक्षण का दुरुयोग होते देख डॉ भीमराव अम्बेडकर ने आरक्षण को ख़त्म करने की बात कही थी जिसे कोई आंबेडकर प्रेमी पार्टी लागु करनी की हिम्मत नहीं कर रहा विपरीत इसके जातिगत पार्टियां बनाकर जनता को गुमराह कर रही हैं। आरक्षण ख़त्म करने के लिए सबसे पहला आरक्षण विरोधियों को जातिगत आधारित पार्टियों को वोट देना बंद करना होगा। जबतक इन पार्टियों का खात्मा नहीं होगा आरक्षण ख़त्म नहीं हो सकता। दूसरे, चुनाव आयोग द्वारा घोषित आरक्षित सीटों पर भी वोट के अधिकार का उपयोग नहीं करना होगा।
आरक्षण को केवल एक अकेली भाजपा चाहे भी तो ख़त्म नहीं कर सकती क्योंकि आरक्षण को कोई भी पार्टी समाप्त नहीं करना चाहती। एक बार आंदोलन चलाने वाले खुद अपने नेताओं की सभी दलों से मीटिंग करें और चर्चा करे के देखें कि आरक्षण कैसे समाप्त किया जा सकता है।
कोई दल आपके साथ नहीं खड़ा होगा और बिना सबकी सहमति के उसे समाप्त नहीं किया जा सकता। अगर आंदोलन चलाने वाले स्वयं सत्ता में आ जाएं जिसकी कोई संभावना नहीं है, तब भी वे सत्ता में बैठ कर आरक्षण समाप्त नहीं कर सकेंगे। किसी अध्यादेश जारी करने से भी ख़त्म नहीं हो सकता क्योंकि सुप्रीम कोर्ट उसे स्टे कर देगा।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
भाजपा को हटाकर दूसरा आने वाला दल सवर्णों की क्या दुर्दशा करेगा इसकी आप लोग कर सकते। अभी दो दिन पहले ही राहुल गांधी ने मनुस्मृति का अपमान करके हिंदू मानस का अपमान किया है। राहुल गांधी आरक्षण को 50% से ज्यादा करने की भी बात करता है तो फिर विरोध उसके खिलाफ क्यों नहीं करते?
समाजवादी पार्टी ने नेता राजकुमार भाटी ने ब्राह्मणों को वेश्याओं से भी गिरा हुआ कहा था और अखिलेश यादव ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की।
विपक्ष को दीवारों पर लिखा दिखाई दे रहा है कि अगर हिंदू वोट एकजुट हो गया तो मुस्लिम वोट बैंक उनके लिए किसी काम का नहीं रहेगा और यह बंगाल में देख लिया। एकमात्र उपाय विपक्ष के सामने बचा है हिंदुओं को तोड़ने का और आरक्षण की आग लगा कर उनका उद्देश्य पूरा हो सकता है, तो क्या आरक्षण विरोधी विपक्ष के इशारों पर खेल रहे हैं और उसके लिए उत्तर प्रदेश और 2029 के चुनाव के लिए पिच तैयार कर रहे हैं।
आरक्षण कोई नई चीज़ नहीं है। 1932 के पूना पैक्ट में विधायिका और केंद्र सरकार की नौकरियों में SC/ST 1942-43 से लागू करके संविधान में 1950 में स्थाई रूप से जोड़ दिया गया था। विधायिका में आरक्षण जो 10 वर्ष के लिए दिया गया था उसे 1960 में ख़त्म होना था लेकिन उसे हर सरकार 10-10 वर्ष के लिए बढाती और अब यह 2030 तक चलेगा। सबसे मजे की बात है कि आरक्षण बढ़ाने का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों सर्वसम्मति से पारित होता है और कोई दल विरोध नहीं करता।
कई राज्यों ने आरक्षण 50% से ज्यादा करने की कोशिश की हैं लेकिन अदालत से स्वीकार नहीं हुआ - एक तमिलनाडू ऐसा राज्य है जहां आरक्षण 69% है - SC के लिए 18%, 30% for Backward Classes (BC), 20% for Most Backward Classes (MBC) और 1% ST के लिए है - केंद्र सरकार से आरक्षण हटाने की मांग करने से पहले तमिलनाडु में हल्ला बोल करना चाहिए क्योंकि वहां तो निर्धारित 50% की सीमा के ऊपर आरक्षण दिया जा रहा है -
ऐसा नहीं है जनरल कैटेगरी वाले कुछ नहीं कर रहे हैं - देश में Startups के बारे में जानकारी ज्ञानवर्धक हो सकती है जहां कोई आरक्षण नहीं है -
Total Startups: Recognized by the Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) surpassing 2.23 lakh as of March 2026.
Total Unicorns: India hosts around 110–130+ private companies valued at over $1 billion.
Total Workforce: Government data reports more than 23.36 lakh direct jobs created across these recognized entities
देश में पहले ही कई समस्याएं है - नए नए आंदोलन शुरू कर देश को आग लगाने से सभी का नुकसान होगा -

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