प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरोधी इतनी नीचता पर गिर चुके हैं कि जब भी देश में कोई विदेशी आता है विरोधी कोई न कोई हंगामा कर भारत की छवि ख़राब इस तरह कर रहे जैसे वो कोई भारतीय नहीं बल्कि किराये के टट्टू हों। जिन्हे जहाँ चाहो छोड़ दो। क्या ये उपद्रवी चाहते हैं कि देशप्रेमी पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मियों को पीछे कर इन्हे छटी दूध पिलाने सड़क पर उतरें? आखिर बर्दाश्त की भी एक हद होती है।
भारत वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था, कूटनीति और तकनीकी प्रगति के कारण तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और यह जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बढ़ता कद, अपनी शर्तों पर ट्रेड एग्रिमेंट और बहुपक्षीय मंचों (जैसे ब्रिक्स और जी20) पर अग्रणी भूमिका ने विश्व के शक्तिशाली देशों को हैरान कर दिया है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय ताकतें भारत की छवि खराब करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के विरोधियों को मोहरा बना रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों और जांच रिपोर्टों के अनुसार, घरेलू असंतोष (जैसे परीक्षा पत्र लीक और छात्र मुद्दों) को हथियार बनाकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को एक अस्थिर राष्ट्र के रूप में पेश करने की बड़ी साज़िश रची जा रही है। इसके तहत 12 और 13 सितंबर 2026 को होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान फिर बड़े हिंसक आंदोलन का टूलकिट तैयार किया गया है।
🚨#BIGANNOUNCEMENT🚨
— Saurav Das (@SauravDassss) August 24, 2026
The Cockroach Janta Party calls for a peaceful protest march at India Gate, New Delhi on September 5.
The National Working Committee expressed serious doubts over whether the Government of India intends to honour its commitments made to the young generation… pic.twitter.com/XXNIognlmO
CJP का 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च का ऐलान
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर 2026 को दिल्ली में बंद और राष्ट्रव्यापी शांतिपूर्ण विरोध मार्च का ऐलान किया है। सीजेपी ने भारत सरकार पर युवाओं से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। कॉकरोच जनता पार्टी की नेशनल वर्किंग कमेटी की 24 अगस्त, 2025 को 2 बजे ऑलाइन मीटिंग हुई। इसमें फैसला लिया गया कि 5 सितंबर को शांतिपूर्ण मार्च नई दिल्ली के इंडिया गेट से शुरू होगा। प्रदर्शनकारी यहां से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर आगे बढ़ेंगे। CJP ने बताया कि मार्च का नेतृत्व NEET परीक्षा से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिजन और पुलिस बर्बरता के पीड़ितों के परिवार करेंगे। सीजेपी के मुताबिक, इन परिवारों के साथ छात्र और युवा संगठन भी मार्च में शामिल होंगे। इसके अलावा देशभर से युवा नागरिकों के दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है।
कॉकरोच जनता पार्टी का 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च, CJP ने केंद्र पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप#CJP #ProtestMarch #NewDelhi #ATVideo #Dangal |@sahiljoshii | pic.twitter.com/MqtmF9poyB
— AajTak (@aajtak) August 24, 2026
CJP ने वादों को पूरा नहीं करने का लगाया आरोप
नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान सीजेपी सरकार के सामने तीन मांगें रखी थीं। सबसे बड़ी मांग थी शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। यह मांग पूरी होने के बाद सीजेपी ने आंदोलन को वापस ले लिया था। सरकार के सामने दो और मांगें रखी गईं थीं, नीट पेपर लीक की वजह से खुदकुशी करने वालों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को रद्द करना। सीजेपी का कहना है कि केंद्र सरकार ने उन्हें इन दोनों वादों को पूरा करने का भरोसा दिया था, जो अब तक नहीं हुआ। हैरानी की बात यह है कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं का धैर्य एक महीने में ही टूट गया है और उन्हें सरकार के वादे याद आ रहे हैं, जबकि झारखंड में छात्र अभी तक आंदोलन कर रहे हैं।
एक बार CJP फिर करने जा रही है
— Drx Santosh Yadav (@Santosh13298329) August 24, 2026
CJP पार्टी का कहना है सरकार ने जो वादे किये थे वो अभी पूरे नहीं हुये हैं
ये आंदोलन NEET में मृतक छात्रों के परिवार और पुलिस बर्बरता से पीड़ित परिवार करेंगे...
5 सितंबर से दिल्ली इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च… pic.twitter.com/gYEuImT682
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन की टाइमिंग पर उठे सवाल
सीजेपी के नेताओं को झारखंड में कई हफ्तों से आंदोलन कर रहे छात्र याद नहीं आ रहे हैं। झारखंड की राजधानी रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच पुलिस ने आंदोलन के नेताओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। 21 अगस्त को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने कम से कम तीन FIR दर्ज की हैं। इन मामलों में 14 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 200 से अधिक अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। छात्रों के आंदोलन स्थल रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और उसके आसपास प्रशासन ने धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी है और स्टेडियम के गेट बंद कर दिए गए हैं। झारखंड सरकार की इस सख्ती के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी को झारखंड के छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है,क्योंकि कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं का मकसद कुछ और है। 5 सितंबर को होने वाले बंद और राष्ट्रव्यापी विरोध मार्च की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
🚨 जंतर मंतर 2.0 का संदिग्ध टाइमिंग उजागर! 🎯
— Manoj Singh (@PracticalSpy) August 25, 2026
🗣️ रिपोर्टर: 5 सितंबर क्यों चुना?
🗣️ दिपके: “हमने रैंडमली सोचा था।”
🗣️ रिपोर्टर: लेकिन ये BRICS समिट के साथ मेल खाता है। क्या भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने के लिए ये तारीख चुनी गई?
🗣️ दिपके: “हमें BRICS समिट के बारे में… pic.twitter.com/dMdhhZZpMd
12 और 13 सितंबर 2026 को दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन
राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर 2026 को 18वां ब्रिक्स सम्मेलन होने जा रहा है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में ग्यारह सदस्य देश- ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात शामिल हो रहे हैं। इनके अलावा दस भागीदार देश भी शामिल होंगे। ब्रिक्स सम्मेलन से पहले देश के विभिन्न शहरों में कई sectoral और मंत्रिस्तरीय बैठकें आयोजित की जा रही हैं। ब्रिक्स युवा एवं खेल मंत्रियों की बैठक 22 और 23 अगस्त, 2026 को विशाखापत्तनम में आयोजित की गई। इससे पहले 21 अगस्त को जयपुर के रामबाग पैलेस में ब्रिक्स देशों के पर्यटन मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। दो दिवसीय मंत्रिस्तरीय बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के पर्यटन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस तरह 12-13 सितंबर को होने वाले मुख्य सम्मेलन से पहले कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
#WATCH | 12-13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में BRICS Summit 2026 का आयोजन होगा। 11 सदस्य देशों और 10 Partner Countries वाला BRICS अब #GlobalSouth के लिए एक अहम मंच बन चुका है। भारत की अध्यक्षता में Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability पर फोकस रहेगा।
— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) August 22, 2026
बदलती… pic.twitter.com/AcYeW7HY5z
11 सदस्य देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, शासनाध्यक्ष और प्रतिनिधिमंडल होंगे शामिल
इस उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन में लगभग 20 देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, शासनाध्यक्ष और प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकीयन सहित कई वैश्विक नेताओं के शामिल होने की संभावना है। इसको देखते हुए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।समिट से जुड़े बड़े कार्यक्रमों, जैसे ब्रिक्स बाजार, ब्रिक्स रन एंड राइड, ब्रिक्स म्यूरल्स एंड पेंटिंग और ब्रिक्स फूड फेस्टिवल के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। समिट शुरू होने से पहले 30 अगस्त को एनडीएमसी द्वारा ब्रिक्स रन एंड राइड का भी आयोजन किया जाएगा। समिट से जुड़े लगभग सभी कार्यक्रम भारत मंडपम् में आयोजित होंगे। इसके अलावा ज्यादातर विदेशी मेहमान NDMC के तहत आने वाले फाइव स्टार होटल्स में ठहरेंगे। लेकिन समिट में शामिल होने वाले 20 देशों के मेहमानों की नजर में भारत की अच्छी छवि बनाने के लिए अलग से बंदोबस्त करने के लिए कहा गया है।
BRICS समिट में शामिल हो सकते हैं रूसी राष्ट्रपति पुतिन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी ब्रिक्स समिट में शामिल हो सकते हैं। मॉस्को में सोमवार 24 अगस्त, 2026 को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जल्द मुलाकात की उम्मीद जताई। दोनों नेताओं ने भारत-रूस के रिश्तों और आपसी सहयोग को लेकर भी चर्चा की। जयशंकर रविवार को मॉस्को पहुंचे थे। वह रूस के अपने दो दिन के दौरे पर हैं। जयशंकर ने पुतिन से कहा कि पीएम मोदी ब्रिक्स समिट के लिए पुतिन का भारत में स्वागत करेंगे। दोनों नेताओं की सालाना बैठक भी जल्द होगी। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी किर्गिजस्तान में होने वाली SCO समिट में उनसे मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
Pleased to call on President Vladimir Putin of Russia in Moscow today. Handed over a personal message from Prime Minister @narendramodi.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) August 24, 2026
Briefed him on the deliberation held under the 27th IRIGC-TEC, reviewing our cooperation across a wide range of domains. Value his guidance… pic.twitter.com/jAWTLqUrEp
चीन के राष्ट्रपति की BRICS समिट में शामिल होने की उम्मीद
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में शामिल हो सकते हैं। यह उनका 7 साल बाद भारत का पहला दौरा होगा। भारत 12-13 सितंबर को BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा। रॉयटर्स के मुताबिक, जिनपिंग के साथ करीब 400 अधिकारियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल आ सकता है। जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। तब उनके साथ 200 से कम अधिकारी थे। जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े। भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।
🚨 Chinese President Xi Jinping is likely to attend next month's BRICS summit in New Delhi with a large delegation of 400 instead of the 200 visited in 2019.
— Indian Tech & Infra (@IndianTechGuide) August 25, 2026
(NDTV) pic.twitter.com/yzCn8loP0c
एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच मंगलवार 25 अगस्त,2026 को Special Representatives स्तर की महत्वपूर्ण वार्ता हुई। बातचीत में भारत-चीन सीमा विवाद के साथ-साथ दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार और आगे की राह पर चर्चा हुई। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन के बीच संबंधों को स्थिर करने तथा सीमा पर शांति एवं विश्वास बहाल करने के प्रयास जारी हैं। बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS Summit में शामिल होने की उम्मीद है। ऐसे में डोभाल-वांग वार्ता को दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ब्रिक्स सम्मेलन पर अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व और भू-राजनीतिक तनाव का साया
सितंबर 2026 में नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन को लेकर अमेरिका की मुख्य चिंता ब्रिक्स देशों द्वारा अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को कम करने और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को अपनाने की कोशिशों से जुड़ी है। ईरान और अन्य सदस्य देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता खत्म करने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं और डिजिटल करेंसी लिंकेज पर जोर दे रहे हैं, जिससे अमेरिकी आर्थिक हितों को चुनौती मिल रही है। अमेरिका ने ईरान या अन्य विरोधी देशों के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भारी टैरिफ और प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है, जिससे भारत जैसे देशों के सामने रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती पैदा हो गई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण ब्रिक्स मंच पर भी सदस्य देशों के बीच स्पष्ट मतभेद देखे जा रहे हैं, जिसे कूटनीतिक हलकों में पश्चिमी प्रभाव और ब्रिक्स की एकजुटता के बीच खिंचाव के रूप में देखा जाता है।
🚨 कैलेंडर में तारीख नोट कर लो।
— Manoj Singh (@PracticalSpy) August 24, 2026
भारत 12-13 सितंबर को 18वें BRICS समिट की मेजबानी कर रहा है।⁰पुतिन, शी जिनपिंग और बाकी दिग्गज दिल्ली पहुँचेंगे।
CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में “फ्रेश प्रोटेस्ट” का ऐलान कर दिया है।
2020 में जब ट्रंप भारत आए थे, तब दिल्ली जल रही थी।
⁰शरजील इमाम,… pic.twitter.com/eg7nLUavHw
वैश्विक मीडिया की मौजूदगी में भारत की छवि खराब करने की साजिश
प्रधानमंत्री मोदी और देश विरोधी ताकतें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान वैश्विक मीडिया की मौजूदगी का फायदा उठाकर भारत की छवि खराब करने की कोशिश में हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे वैश्विक मंचों के दौरान बड़े पैमाने पर डिजिटल टूलकिट अभियान और जमीनी विरोध प्रदर्शन की तैयारी के संकेत मिल रहे हैं, ताकि भारत में मानवाधिकार और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए जा सकें। अगर 5 सितंबर से शुरू होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के मार्च के दौरान कोई हिंसा होती है, तो पुलिस कार्रवाई कर सकती है। ऐसी स्थिति में वैश्विक मीडिया और मानवाधिकार निकायों द्वारा सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की कोशिश की जा सकती है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया का हुआ था गलत इस्तेमाल
हाल ही में दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के ‘चलो संसद’ मार्च और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान जिस तरह सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किया गया, वो आंतर्राष्ट्रीय साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल अभियानों और ‘टूलकिट’ के ज़रिए किसी देश की घरेलू राजनीति या अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित करने की रणनीति आधुनिक हाइब्रिड वॉरफेयर (Hybrid Warfare) का एक प्रमुख हिस्सा बन चुकी है। टूलकिट का इस्तेमाल मुख्य रूप से सामाजिक असंतोष को भड़काने, विरोध प्रदर्शनों को संगठित करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किसी मुद्दे को बड़ा बनाने के लिए किया जा रहा है। सीजेपी प्रदर्शन के दौरान एल्गोरिदम के कारण उपयोगकर्ताओं को ध्रुवीकृत या अतिवादी वीडियो (जैसे केवल पुलिस कार्रवाई या केवल प्रदर्शनकारियों की आक्रामकता) अधिक दिखाए गए, जिससे समाज में अलग-अलग और परस्पर विरोधी धारणाएं बनीं। एल्गोरिदम को प्रभावित कर भीड़ के आक्रोश को और बढ़ाया गया।
🚨 आप इस पैटर्न को समझकर हैरान रह जाएंगे।🚨
— Manoj Singh (@PracticalSpy) August 25, 2026
•जब भारत में संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला था और कई महत्वपूर्ण बिल्स (जिनमें FCRA भी शामिल था) चर्चा के लिए आने वाले थे…
•अभिजीत दीपके भारत आया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की ताकि कोई बिल… pic.twitter.com/6y79FSA0tT
अतीत में कांग्रेस और मोदी विरोधी ताकतों ने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और महत्वपूर्ण अवसरों पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश की
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान युवा कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन
20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का आयोजन किया गया था। इसमें देश व विदेश के भी काफी प्रमुख लोग आमंत्रित थे तथा यह इवेन्ट अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में था। इसमें 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, कंपनियों के सीईओ और एआई एक्सपर्ट शामिल हुए थे। इस दौरान भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं ने अर्धनग्न (शर्टलेस) होकर विरोध प्रदर्शन किया था। युवा कांग्रेस के करीब 6-10 कार्यकर्ताओं ने अंदर पहुंचकर अपनी शर्ट और जैकेट उतारकर नारेबाज़ी की।
देश की छवि खराब करने की कोशिश #AAPkepaap? भारत में मंडपम में चल रहे इंडिया एआई एक्सपो समिट में आज युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे भी लगाए. वो नारे लगाते हुए पवेलियन में पहुंचे और टीशर्ट उतारकर प्रदर्शन… pic.twitter.com/VgllaSiGty
— Zee News (@ZeeNews) February 20, 2026
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि धूमिल करने की कांग्रेस की कोशिश
युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की शॉर्ट लेस प्रदेश की पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई। कई राजनीतिक दलों ने प्रदर्शन करने के तरीके पर सवाल खड़े किए। भाजपा ने इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर हुए विरोध को देश की छवि धूमिल करने वाला और शर्मनाक बताया था। देश को बदनाम करने के लिए रची गई इस साजिश का पर्दाफाश करने के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मात्र तीन दिनों में दो राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए कांग्रेस के सात नेताओं को गिरफ्तार किया था। इसमें भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि, राष्ट्रीय समन्वयक नरसिम्हा यादव सहित कई कार्यकर्ता शामिल थे।
दुनिया कर रही है भारत का गुणगान, कांग्रेस ने किया देश का अपमान!
— BJP (@BJP4India) February 21, 2026
आज पूरी दुनिया की निगाहें दिल्ली पर टिकी हैं, जहां आयोजित 'Global AI Summit' में 45 देशों की हाई-टेक AI कंपनियां, 20 राष्ट्रों के प्रमुख और Google से लेकर Microsoft तक के दिग्गज CEO भारतीय टैलेंट और डिजिटल इंडिया के… pic.twitter.com/4ELAguN2VL
2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान उमर खालिद का ऐलान और दिल्ली दंगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 24 और 25 फरवरी 2020 को भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए थे। जब ट्रंप अहमदाबाद और नई दिल्ली में आधिकारिक कार्यक्रमों में व्यस्त थे, उसी दौरान 24-25 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली (जैसे सीलमपुर, जाफराबाद, मौजपुर, खजूरी खास) में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर हिंसक झड़पें और सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। राजधानी में हुई इस हिंसक घटना से वैश्विक स्तर पर भारत की छवि पर असर पड़ा और ट्रंप के दौरे की चमक फीकी पड़ गई। दिल्ली पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट और गृह मंत्रालय के अनुसार, यह हिंसा सुनियोजित थी। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि हिंसा का समय जानबूझकर ट्रंप के दौरे के वक्त रखा गया था, क्योंकि उस दौरान प्रशासनिक अमला और सुरक्षा एजेंसियां वीआईपी मेहमान की सुरक्षा व व्यवस्था में व्यस्त थीं। इस हिंसा में 50 से अधिक लोगों की जान गई थी और भारी नुकसान हुआ था। दिल्ली दंगे से पहले उमर खालिद ने ऐलान किया था, “हम वादा करते हैं कि 24 तारीख को जब डोनाल्ड ट्रंप हिन्दुस्तान आएंगे, तो हम ये बताएंगे कि हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री और हिन्दुस्तान की सरकार हिन्दुस्तान को बांटने का काम कर रही है। महात्मा गांधी के वसूलों की धज्जियां उड़ा रही हैं। ये बताएंगे कि हिन्दुस्तान की आवाम हिन्दुस्तान के हुक्मरानों के खिलाफ लड़ रही है। हम तमाम लोग सड़कों पर निकलकर आएंगे।”
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