कुछ दिन पहले रिटायर होते हुए जस्टिस संजय करोल ने कहा था कि जज भगवान नहीं होते, उससे भी गलती हो सकती है। अब कल का भगवान की तरह संविधान और कानून को ताक पर रख दिया गया जस्टिस उज्जवल भुईया का बयान सुन लो।
जस्टिस भुईया ने कहा अलग विचार रखने वाले या सवाल पूछने वाले छात्रों को सजा की धमकी नहीं दी जा सकती क्योंकि ऐसा रवैया संवैधानिक नहीं है और सत्ता या पद का दुरुपयोग है। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय में ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां स्थापित विचारों की जांच की जा सके, उन पर सवाल उठाए जा सके और छात्र मुश्किल सवाल पूछने से नहीं हिचकिचाएं, सवाल पूछने का अधिकार बगावत या अवज्ञा नहीं है और “असहिष्णु मानसिकता” संविधान की भावना के विपरीत है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
जस्टिस भुईया का बयान ऐसे समय आया जब उन्होंने देखा कि कैसे दिपके & कंपनी के कथित छात्रों ने एक महीने पहले देश के अनेक हिस्सों खासकर दिल्ली में हिंसा फैलाई। 15-16 साल की लड़कियों ने प्रधानमंत्री के लिए किस तरह गालियां दी। उन्हें भला NEET से क्या लेना देना था। क्या उन पर कोई कार्रवाई संविधान के विरुद्ध होगी?
जो गालियां प्रधानमंत्री मोदी को स्कूल जाने वाले लड़के लड़कियों ने दी, वो अगर आपको दी जाएं तो सारी अकल ठिकाने आ जाएगी। कोई आपको कहे कि आप जिसके पक्ष में निर्णय देते हो उसकी बीवी बहन के साथ पहले सोते हो तो कैसा लगेगा? ऐसी बातें प्रधानमंत्री के लिए कही गई।
आप विश्वविद्यालय में स्थापित विचारों के खिलाफ अलग विचार रखने और सवाल पूछने की बात करके छात्रों में अनुशासनहीनता का भाव जगाना चाहते हैं। JNU में लगने वाले नारों का आप समर्थन कर रहे हैं क्या? देश के टुकड़े टुकड़े करने के नारे लगते हैं, कश्मीर की आज़ादी लेने के नारे लगते हैं, ब्राह्मणवाद से आज़ादी लेने के नारे लगते है और ना जाने क्या क्या नारे लगते हैं। ये कोई अलग विचार नहीं माने जा सकते जिनका आप समर्थन कर रहे हैं।
उमर खालिद और शरजील इमाम भी JNU के छात्र ही है। उन्हें दंगा करने की अनुमति दे देनी चाहिए क्या? चिकेन नेक को काटने की आज़ादी शरजील इमाम को दे देनी चाहिए क्या क्योंकि ये उसका अलग विचार है?
अलग विचार तो आतंकियों के भी होते हैं। यासीन मलिक को भी छोड़ देना चाहिए क्या क्योंकि terror funding उसके अपने विचार से सही है और घुसपैठियों को खुला निमंत्रण दे देना चाहिए क्योंकि उनकी वकालत करने वाले भी बहुत से वकील सुप्रीम कोर्ट में खड़े होते हैं। क्या सुरक्षाबलों को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई बंद कर देनी चाहिए क्योंकि उनका अलग विचार होता है कश्मीर को भारत से अलग करना? ऐसे तो देश की सुरक्षा ही खतरे में पड़ जाएगी।
आजकल यदाकदा जस्टिस भुईया के उलटे पुल्टे बयान आते रहते हैं। आज एक और बयान सामने आया उनका कि 76 वर्षों से कोई भी “Distinguished Jurist” सुप्रीम कोर्ट का जज क्यों नहीं बना जबकि हाई कोर्ट के जज और वकील ही सुप्रीम कोर्ट के जज बनते है। पहले ही कॉलेजियम ने न्यायपालिका का सर्वनाश किया हुआ है और आप एक द्वार और खोल देना चाहते हैं जिससे भाई भतीजावाद में और वृद्धि हो। एक सवाल यह भी है कि क्या “Distinguished Jurist” सुप्रीम कोर्ट के जज बनना भी चाहते है क्योंकि उनकी कमाई तो अपने profession में बहुत है, जज बनकर क्या करेंगे?

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