मंदिर के ख़ज़ाने में जाए दान की पाई पाई; बांके बिहारी मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश; लेकिन यह नियम तो सभी मंदिरों, चर्चों और दरगाहों पर भी लागू होना चाहिए

सुभाष चन्द्र

सनातन को बदनाम करने हिन्दू विरोधी नितरोज कोई न कोई हत्कण्डा अपना रहे हैं। लेकिन किसी में दिल्ली की जामा मस्जिद, निजामुद्दीन दरगाह और अजमेर शरीफ आदि में आ रहे चढ़ावे पर बोलने की हिम्मत नहीं। जिस दिन हिन्दू विरोधी मस्जिदों और दरगाहों में आने वाले चन्दे का हिसाब मांगना शुरू किया वक़्फ़ में बेशुमार धन होगा। किसी सरकारी अनुदान की जरुरत नहीं होगी।  

अगस्त 25 को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने बांके बिहारी मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे पर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि दान की पाई पाई मंदिर के ख़ज़ाने में जानी चाहिए। मंदिर की मैनेजिंग समिति को दान की रकम के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करनी चाहिए कोर्ट ने कहा कि सबसे पहले दान देवता को समर्पित होना चाहिए सेवायत उस रकम पर पहले अपना हिस्सा नहीं ले सकता जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि पुजारी का देवता पर “गार्निशी राइट” नहीं हो सकता

बहुत अच्छा निर्णय है लेकिन यह निर्णय देश के सभी मंदिरों पर लागू होना चाहिए - मंदिरों पर ही क्यों, चर्चों, दरगाहों और मस्जिदों पर भी लागू होना चाहिए - चर्च का धन क्या जीसस का नहीं होना चाहिए और दरगाह का चढ़ावा जिसके नाम पर दरगाह है उसका नहीं होना चाहिए - इसी तरह मस्जिद का धन भी अल्लाह का होना चाहिए

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देश में अनेक राज्यों ने मंदिरों को अपने अपने नियम/कानून बना कर कब्जे में लिए हुए हैं और राज्य सरकार अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मंदिरों के धन को लूटती हैं
-तमिलनाडु में केवल मंदिरों के लिए Tamil Nadu Hindu Religious and Charitable Endowment act, 1959 लागू है;

-आंध्र प्रदेश में A.P. Charitable and Hindu Religious Institution and Endowment Act, 1987 लागू है;

-कर्नाटक में Karnataka Hindu Religious Institutions and Charitable Endowment Act, 1997 लागू है;

-तेलंगाना में Telangana Endowment Act लागू है;

-केरल में Travancore - Cochin Hindu Religious Institution Act, 1950 लागू है (जो Guruvayur or Devaswom boards के लिए है);

- ओडिशा में Odisha Hindu Religious Act, 1951 से लागू है;

-बिहार में Bihar Hindu Religious Trust Act, 1950 से लागू है;

-मध्य प्रदेश में Madhya Pradesh Public Trust act, 1951 लागू है;

महाराष्ट्र अपने Maharashtra Public Trusts Act, 1950 से और बड़े  पब्लिक ट्रस्ट और Prominent Temples की देखरेख विधानसभा से पारित कानूनों से करता है

ये सभी कानून केवल हिंदुओं के लिए हैं, कोई कानून मुस्लिमों और ईसाइयों के लिए नहीं हैं इसका उद्देश्य राज्य सरकार को मंदिर प्रशासन पर कंट्रोल रखना, मंदिरों की वित्त व्यवस्था, प्रॉपर्टी और मंदिरों की जमीन जायदाद पर नियंत्रण रखना है इन मंदिरों में राज्य सरकार मंदिर प्रशासन को संभालने के लिए अपने कमिश्नर नियुक्त करती हैं

यानी देवता का धन सीधे सीधे राज्य सरकार के अधीन है

सुप्रीम कोर्ट को चाहिए suo moto संज्ञान लेकर राज्यों के ऐसे सभी ट्रस्टों की जाँच करने के आदेश दे कई राज्यों में मंदिरों का धन निकाल कर मस्जिदों और चर्चों पर खर्च किया जाता है 

निर्णय केवल मंदिरों के लिए नहीं होने चाहिए बल्कि अन्य मजहबों के लिए भी होने चाहिए और मंदिरों के लिए निर्णय करना जरूरी है तो जो मंदिर राज्य सरकार के कब्जे में हैं, उन पर भी नियम लागू किये जाने चाहिए

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