यही सत्य है कि भारत में JPC is Farce (स्वांग है)। सभी सदस्य अपनी अपनी पार्टी के रुख के अनुसार रिपोर्ट बनाते है - JPC में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे और यह JPC अगले शीतकालीन सत्र के प्रथम सप्ताह के अंतिम दिन अपनी रिपोर्ट सदन को देगी बशर्ते उसका कार्यकाल न बढ़ाया जाए।
स्वतंत्रता के बाद अभी तक 20 JPC बनी हैं लेकिन किसी ने भी अपनी Recommendations सर्वसम्मति से नहीं दी है। संसद के दोनों सदनों में JPC की सिफारिशों को रखा जाता है और सरकार अपना विधायी दायित्व पूरा करती है। जैसे JPC की सिफारिशों को ध्यान में रख कर FCRA में अगर कुछ फेरबदल की जरूरत हुई तो सरकार करेगी वरना जो बिल संसद में पहले ही पेश हो चुका है, उस पर बहस के बाद वोटिंग होगी।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
JPC बनाने का मकसद है - “Detailed examination and wider stakeholder consultation on transparency and provisions within the FCRA Amendment Bill”.
अब इसके लिए हो सकता मुस्लिम और ईसाई संगठन भी अपना पक्ष JPC के सामने रखना चाहेंगे और शायद उन्हें मौका दिया भी जाए जाए जैसे कुछ मुस्लिम संगठन वक्फ की JPC के सामने भी गए थे।
लेकिन क्योंकि विपक्ष का आरोप है कि FCRA बिल अल्पसंख्यक विरोधी है, इसलिए JPC की Meetings शांति से तो नहीं होंगी जैसे वक्फ संशोधन JPC में हुआ था, इस बार भी हो सकता है।
वक्फ संशोधन JPC में भाजपा के अभिजीत गंगोपाध्याय और TMC के कल्याण बनर्जी के बीच तीखी तकरार हुई और बनर्जी ने अपना पानी का ग्लास ही शीशे की टेबल पर दे मारा जिससे वे खुद चोटिल हो गए।
विपक्ष ने पूरा सत्र केवल FCRA बिल पास न होने देने के लिए बर्बाद कर दिया जो कभी किसी देश में नहीं होता। किसी देश में विपक्ष अपने प्रधानमंत्री के लिए असभ्य भाषा नहीं बोलता।
किसी देश का LoP सड़कों पर लेटा हुआ नहीं मिलेगा लेकिन ये सब भारत में होता है। LoP विदेशों से भारत के लोकतंत्र को बचाने की गुहार लगाता है और अबकी बार विदेशी शक्तियों ने CJP और संसद में विपक्ष के जरिए देश में लोकतंत्र को तोड़ने की कोशिश की।
हर कार्य पूर्ण होने का समय निश्चित होता है। शायद FCRA बिल के पास होने में अभी 3- 4 महीने का समय और है।

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