राहुल LoP हैं या Leader of Propaganda या Leader of Dictator? अमित शाह की संसद में बहस की चुनौती, राहुल गाँधी ने ठुकराया प्रस्ताव बोले- हमें नहीं सुनना, इस्तीफा दो

                                                     साभार : NDTV & Indiatoday
एक समय था जब रिकी पोंटिंग की अजेय ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराने के लिए ICC ने दुनिया भर के धुरंधरों को मिलाकर एक 'ICC टीम' बनाई, लेकिन आश्चर्य देखिए...
वहाँ भी ऑस्ट्रेलिया ही जीती! तब विरोधी टीमें गिलक्रिस्ट या हेडन का विकेट लेने में ही अपनी जीत मान लेती थीं या "बैट में स्प्रिंग" होने की अफ़वाहें उड़ाकर दिल बहलाती थीं।
भारतीय राजनीति में आज ठीक यही हो रहा है!
अपना पैमाना इतना ऊँचा कर लो कि लोग आपकी एक खरोंच को भी अपनी महाविजय मान लें। आज सत्ता पक्ष को 240 सीटें मिलीं, लेकिन विपक्ष ने ऐसे जश्न मनाया मानो 40 पर रोक दिया हो। संसद में थोड़े से हंगामे या एक मंत्री के इस्तीफे को वो ऐसे सेलिब्रेट कर रहे हैं जैसे कोई 'गृहयुद्ध' जीत लिया हो।
यह मानवीय प्रवृत्ति है जैसे डिस्कवरी चैनल पर जब कोई खरगोश शेर से बच निकलता है, तो दर्शक खुश होते हैं। यह खरगोश से हमदर्दी नहीं, बल्कि शेर से ईर्ष्या और खौफ है। विपक्ष की हालत भी आज उसी खरगोश जैसी है।
याद रहे, 240 सांसदों के साथ मनमोहन सिंह और नरसिम्हा राव ने भी सरकार चलाई है, और अटल जी ने तो 200 से कम में!
एक दौर था जब 2013 में सुषमा स्वराज और अरुण जेटली जी की सदन में गर्जना मात्र से सरकार बिल वापस लेने पर मजबूर हो जाती थी। आज विपक्ष संसद न चलने देने को ही अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मान बैठा है। पहले जो नॉर्मल था, आज वह उपलब्धि है।
सच कहूँ तो सत्ता पक्ष का इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा, जिसे शत्रु मिला भी... तो शस्त्र और बुद्धि दोनों से शून्य!
दिल्ली के जंतर-मंतर में सीजेपी प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और उत्पात को लेकर अभी भी चर्चा जारी है। कुछ समय से संसद में अमित शाह के ना आने से विपक्ष बार-बार उनसे इस्तीफे और जवाब की माँग कर रहा था। लेकिन अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने की खुली चुनौती दे डाली है।

राहुल के नितरोज मांगों में बदलाव से साबित करता है कि राहुल राहुल LoP हैं या Leader of Propaganda या Leader of Dictator? यह कटु सत्य है कि राहुल की तानाशाही को INDI गठबंधन को समझना होगा कि राहुल कांग्रेस को तो डुबो ही रहे हैं साथ में समस्त विपक्ष को भी डुबो रहे हैं। कभी तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र का इस्तीफा और अब गृह मंत्री का। क्या है ये सब तमाशा? राहुल और विपक्ष को समझना होगा कि देश संविधान से चलेगा तानाशाही से नहीं। अब UPA की सरकार नहीं, और यही रवैया रहा तो दूर भविष्य तक नहीं आने वाली।   

अमित शाह ने कहा है कि संसद में आज ही इस पर बहस शुरू की जाए और वह हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालाँकि, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने गृह मंत्री के इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया है। राहुल गाँधी का कहना है कि देश का युवा गृह मंत्री को सुनना नहीं चाहता है और उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

संसद में चर्चा के लिए अमित शाह का प्रस्ताव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस पूरे विवाद पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने विपक्ष पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को जानबूझकर बाधित कर रहा है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर होने वाली बहस से भाग रहा है।

अमित शाह ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह सदन के भीतर हर एक सवाल का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि वे अपनी राजनीति छोड़कर संसद को शांति से चलने दें।

अमित शाह ने समय और तारीख तय करते हुए विपक्ष को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि संसद में इस मुद्दे पर आज दोपहर 3 बजे से ही बहस की शुरुआत कर दी जानी चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह खुद सदन के अंदर मौजूद रहेंगे और पूरी बात सुनेंगे।

इसके बाद, अगले दिन यानी गुरुवार (13 अगस्त) को दोपहर तीन बजे वह इस पूरी चर्चा का एक विस्तृत और स्पष्ट जवाब सदन के पटल पर रखेंगे। उन्होंने विपक्ष से कहा कि अब यह फैसला उन्हें ही करना है कि वे सदन में चर्चा करना चाहते हैं या फिर सिर्फ हंगामा करके भागना चाहते हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष की उस माँग को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें सिर्फ उनके एकतरफा बयान की माँग की जा रही थी। अमित शाह का तर्क था कि संसद में किसी भी बड़े और महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने के लिए पहले से ही नियम और कायदे तय होते हैं।

इतने गंभीर मामलों पर केवल एक बयान देकर खानापूर्ति नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार ही सदन में पूरी चर्चा होनी चाहिए और उसके बाद ही वह हर सवाल का विस्तार से जवाब देंगे। जरूरत पड़ने पर सरकार स्पीकर की अनुमति से प्रश्नकाल को भी स्थगित करने के लिए तैयार है।

‘लापता’ होने पर अमित शाह का जवाब

विपक्ष के नेताओं द्वारा खुद पर ‘लापता’ होने और भागने जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह संसद सत्र के दौरान रोज संसद आते हैं और अपने कार्यालय में मौजूद रहते हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया कि वे सदन के अंदर इसलिए नहीं जा पा रहे हैं क्योंकि विपक्षी दल लगातार सदन में हंगामा कर रहे हैं और कार्यवाही को चलने नहीं दे रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के हर जरूरी मुद्दे पर जनता और सदन के प्रति जवाबदेह है।

छात्रों पर लाठीचार्ज और राहुल गाँधी के तीखे सवाल

यह पूरा विवाद पिछले दिनों दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज, गोलीबारी और पैलेट गन के इस्तेमाल के बाद शुरू हुआ है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार और गृह मंत्री को इस बात के लिए घेर रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी इस पूरे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं।

राहुल गाँधी ने सरकार से सीधा और कड़ा सवाल पूछा है कि आखिर प्रदर्शन कर रहे मासूम छात्रों पर गोलियां चलाने और लाठियाँ बरसाने का आदेश किसने दिया था। गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से बहस की चुनौती मिलने के कुछ ही मिनटों के बाद राहुल गाँधी ने मीडिया के सामने आकर उसे सिरे से खारिज कर दिया।

राहुल गाँधी ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी और छात्र अब गृह मंत्री की कोई भी सफाई, कल्पना या भाषण सुनने में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं रखते हैं। राहुल गाँधी ने कहा कि दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स सीधे तौर पर देश के गृह मंत्रालय के अधीन काम करते हैं।

उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि क्या छात्रों पर गोली चलाने का आदेश खुद अमित शाह ने दिया था। राहुल गाँधी ने कहा कि अगर यह आदेश अमित शाह ने दिया है, तो वह इसके लिए पूरी तरह से दोषी हैं। अगर यह आदेश उन्होंने नहीं दिया है, तो वह अपने पद के काबिल नहीं हैं और पूरी तरह से अक्षम हैं।

दोनों ही स्थितियों में गृह मंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। राहुल गाँधी ने अंत में यह भी आरोप लगाया कि सरकार के पास उनके किसी भी सवाल का कोई ठोस जवाब नहीं बचा है और अब सरकार पूरी तरह से डर चुकी है।

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