INDI गठबंधन से लेकर विदेशों में बैठे इनके आका आरएसएस पर जो हमले कर रहे हैं, यह एक सोंची-समझी साज़िश है। गौरतलब, 1947 में भारत के टुकड़े हुए थे तब पाकिस्तान के बहुचर्चित समाचार पत्र Dawn ने लिखा था कि आरएसएस 1925 से पहले बन गया होता हिन्दुस्तान का बटवारा नहीं होता। तभी से संघ भारत विरोधियों की आँखों में घटकता रहता है। देश में किसी भी विपत्ति के आने पर ये संघ ही है जो सबसे पहले राहत कार्य में जुटता है। जबकि देश में इतने NGOs और लगभग हर पार्टी का सेवा दल है, कोई नहीं आता। सब इन सेवा दलों के नाम पर अपनी तिजोरियां भर ऐश कर जनता को गुमराह ही नहीं पागल बनाते हैं और अक्लबंध इन पार्टियों को हितकारी समझती है। वैसे इसमें हमारी मीडिया भी पीछे नहीं। जब आरएसएस के ऑफिस पर तिरंगा नहीं फहराने की बात होती है तो किसी एंकर ने माँ का दूध नहीं पिया किया कि 2014 में मोदी सरकार से पहले किसी को तिरंगा फहराने की इजाजत नहीं थी तो संघ कैसे फहराता?
अमेरिका की एक संस्था है USCIRF (US Commission on International Religious Freedom)। उसके कमिश्नर Gene Mills और चेयरमैन Asif Mahmood ने कहा है कि 29 अगस्त को मोहन भागवत जी के न्यूयॉर्क आने के खिलाफ Sanctions लगाई जाए, उनके लिए कोई राजनयिक शिष्टाचार न दिखाया जाए और अमेरिकी अधिकारियों को उनसे न मिलने दिया जाए।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
संघ प्रमुख 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर होंगे और 29 अगस्त को Madison Square में Universal Oneness Celebration वे लोगों को संबोधित करेंगे।
ये कैसा लोकतंत्र है अमेरिका में कि जिसे तुम पसंद नहीं करते उसे अपने देश में आने भी नहीं दोगे? जिस मोदी पर Asif Mahmood RSS का टैग लगा रहा है, उस पाकिस्तानी हरामखोर को पता नहीं कि कल ही अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने जम्मू कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया है और वहां की कानून व्यवस्था की प्रशंसा की है। ये काम RSS सदस्य मोदी के राज में हुआ है। जैसे Sergio Gor के बयान पर पाकिस्तान सुलग रहा है, वैसे ही Asif Mahmood भी सुलग रहा होगा?
उसे यह भी नहीं पता कि दो दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की प्रशंसा की है और भारत की तरह अमेरिका में भी वोटर पहचान पत्र बना कर EVM से चुनाव कराने को कहा है।
ये USCIRF POJK में पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे दमन पर खामोश है और बांग्लादेश में हुए हिंदुओं के कत्लेआम पर भी खामोश था। इसे बलूचिस्तान दिखाई नहीं देता और न चीन के उइघर मुसलमान दिखाई देते। इसने कभी 7 अक्टूबर, 2023 के हमास के इज़रायल पर बर्बर हमले की भी निंदा नहीं की। इस संस्था को अगस्त में पाकिस्तान के भारत में आतंकी हमले की साजिश भी नज़र नहीं आई जिसे विफल कर दिया गया और 250 से ज्यादा आतंकी पकड़े गए। मुझे तो लगता है अमेरिका में बैठ कर ये एक पाकिस्तानी हैंडलर का काम कर रहा है।
इसे बस भारत में मुस्लिमों की हालत ख़राब नज़र आती है जबकि RSS का सदस्य प्रधानमंत्री मोदी बिना किसी भेदभाव मुस्लिमों को सभी सुविधाएं दे रहा है।
इस संगठन की बातों को हलके में नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह अमेरिकी सरकार की संस्था है और सरकार के दिमाग में भारत और इज़रायल के लिए जहर घोलती है। इस संस्था का नजरिया अमेरिका के Democrats का लगता है।
अगर मोहन भागवत जी के आने पर आपत्ति है तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अमेरिका में मत आने दिया करो क्योंकि वह भी तो उसी RSS का सदस्य है जिसके प्रमुख मोहन भागवत हैं।

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