मई, 2013 में कांग्रेस छत्तीसगढ़ में रमन सिंह सरकार को बदलने के लिए “परिवर्तन यात्रा” निकाल रही थी। 25 मई को झीरम घाटी में नक्सलियों ने घात लगा कर हमला किया जिसमे 32 लोगों की मौत हुई और 38 घायल हुए। मरने वालों में नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार और योगेंद्र शर्मा शामिल थे। वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्या चरण शुक्ला गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी मौत 11 जून, 2013 को हुई।
अब 16 सितंबर को NIA कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने 10 माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है लेकिन कांग्रेस संतुष्ट नहीं है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक बुला कर कहा है कि आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा क्योंकि पूरा न्याय नहीं हुआ है और NIA का दुरूपयोग बताया है।
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ये झीरम घाटी का खेल कांग्रेस का ही रचा हुआ था क्योंकि अजीत जोगी का काफिला अलग मार्ग से बाद में गया और जिस काफिले में VC Shukla थे उसे पहले ही अलग दुर्गम मार्ग से भेजा गया। अजीत जोगी को जैसे पता था वहां क्या होगा। कांग्रेस के कुकर्म के लिए अपराधियों को अंजाम तक पहुंचाने का काम मोदी सरकार में NIA ने किया।
षड़यंत्र अजीत जोगी का था जो इस बात से साबित होता था कि वह अलग काफिले में गया शुक्ला जी के साथ नहीं गया। मरे भी कांग्रेसी और अब दोषियों को मृत्युदंड मिला तब भी खुश नहीं है कांग्रेस। मतलब कांग्रेस का हाथ आतंकियों के साथ।
कांग्रेस अपने समय को याद करे जब 6 अप्रैल, 2010 को दंतेवाड़ा में माओवादियों ने 76 CRPF जवानों की निर्मम हत्या की थी और JNU में वामपंथियों ने जश्न मनाया था लेकिन राहुल गांधी या कांग्रेस ने निंदा नहीं की। उन जश्न मनाने वालों में कन्हैया कुमार अब कांग्रेस में है।
दंतेवाड़ा नरसंहार का मामला कांग्रेस सरकार ने NIA को सौंपा तक नहीं और नरसंहार के किसी दोषी को सजा नहीं हुई। जनवरी, 2013 में ट्रायल कोर्ट ने सभी गिरफ्तार 10 अभयुक्तों को बरी कर दिया due to a lack of sufficient evidence and a failure by the prosecution to prove involvement beyond a reasonable doubt.
उसके बाद हाई कोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी।
आज NIA द्वारा झीरम घाटी में हुए नरसंहार के लिए 10 माओवादियों को मृत्युदंड से भी कांग्रेस संतुष्ट नहीं है तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि दंतेवाड़ा का केस केंद्र की कांग्रेस सरकार ने NIA को क्यों नहीं दिया जबकि उसके लिए राज्य सरकार की सिफारिश की जरूरत भी नहीं होती।
क्या कांग्रेस अब न्याय पूरा न होने के नाम पर मृत्युदंड पाए लोगों को बचाने का कोई मार्ग तलाश रही है क्योंकि कांग्रेस राज में माओवादी हिंसा चरम पर थी और अब मोदी सरकार ने माओवादियों सफाया कर दिया है?

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