‘लोकतंत्र की हत्या’ के मिशन पर राहुल गांधी को सवालों ने ऐसा किया बेआबरू, अपनी ही प्रेस कांफ्रेंस में हुए शर्मसार

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश पर ऊँगली उठाकर राहुल गाँधी ने साबित कर दिया है कि वह नेता प्रतिपक्ष नहीं बल्कि उपद्रवी नेता है। राहुल ने अब तक जितने भी मुद्दे उठाए हैं उनमे राष्ट्र और जनहित कम उपद्रव ज्यादा झलकता है। दूसरे, परिवार की सबसे ज्यादा तड़प सत्ता से दूर रहने की है। राहुल द्वारा बेसिर पैर की बातों से सत्ता के पास भी पहुंचना बहुत मुश्किल है। INDI गठबंधन में शामिल जितनी भी पार्टियां हैं उनको अपनी प्रतिष्ठा को देखते हुए कांग्रेस से दूरी बनाना उनके ही हित होगा, वरना राहुल कांग्रेस को तो डुबो रहे हैं साथ में उनको भी। नगर निगम से लेकर संसद तक कांग्रेस के जितने भी सदस्य हैं सभी गठबंधन में शामिल पार्टियों की बदौलत हैं।     
आप क्रोनोलॉजी समझिए.....

* सोनिया गांधी की शादी राजीव गांधी से 1968 मे होती है...तब वो इटालियन नागरिक थीं।
* 1970 मे राहुल गांधी का जन्म होता है....तब भी वो इटालियन नागरिक थीं।
* 1972 मे प्रियंका वाड्रा का जन्म होता है...तब भी वो इटालियन नागरिक थीं।
* 1980 के चुनाव मे नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की वोटर लिस्ट मे उनका नाम शामिल होता है, उनकी वोट डालने तस्वीर सबने देखी है,लेकिन तब भी वो इटालियन नागरिक ही थीं ।
* सोनिया गांधी अपनी शादी के 15 साल बाद 1983 मे भारत की नागरिक बनीं और 1980 मे उनका नाम वोटर लिस्ट मे था, उन्होंने वोट भी डाला।
* इसके खिलाफ पिछले साल 2025 के अगस्त मे दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट मे पहली सुनवाई हुई, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग हुई।
* सितंबर 2025 मे कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
* दिसंबर 2025 मे याचिकाकर्ता ने रिवीजन याचिका दायर की।
* 22 सितंबर 2026 को सेशंस कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के पुराने आदेश को रद्द कर मामले की नए सिरे से सुनवाई का आदेश जारी कर दिया ।
* अगले ही दिन 23 सितंबर को Indian Express में Propaganda स्पेशलिस्ट अखबार में चुनाव आयोग के खिलाफ एक खबर छापी जाती है कि ज्ञानेश कुमार अपनी मर्ज़ी से फैसले करते हैं।
                                                           साभार: सोशल मीडिया 
चुनाव आयोग 3 सदस्यों की संस्था है किसी को Veto पावर नहीं है जो भी फैसले होते हैं majority से यानि 2-1 या 3-0 से होते हैं। मीटिंग मे एक दूसरे से सहमति असहमति तो हर बोर्ड मे होती है। यही तरीका होता है किसी निर्णय पर पहुंचने का।
भारत का चुनाव आयोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनावों के संचालन के लिए जाना जाता है। लेकिन चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्थाओं पर बार-बार सवाल उठाना और विभिन्न मंचों पर भारतीय चुनावी प्रणाली को कटघरे में खड़ा करने से देश के लोकतंत्र की साख को नुकसान पहुंचाता है। इस तरह देश की करोड़ों जनता द्वारा निर्वाचित सरकार और पूरी चुनाव प्रक्रिया को अवैध बताना जनादेश का अपमान है। अपनी राजनीतिक हार स्वीकार करने के बजाय जनता में भ्रम और अविश्वास फैलाने से देश में असंतोष बढ़ सकता है, जिससे लोकतांत्रिक स्थिरता को खतरा उत्पन्न हो सकता है और अराजकता पैदा हो सकती है। लेकिन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए राहुल गांधी चुनाव आयोगी की विश्वसनीयता खत्म कर भारतीय लोकतंत्र की हत्या करने के मिशन पर काम कर रहे हैं।

चुनाव आयोग की छवि खराब करने की सुनियोजित साजिश 
किसी भी बहु-सदस्यीय निकाय में विचारों का मतभेद या आंतरिक बहस एक स्वाभाविक और स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे “धांधली” के रूप में पेश करना भ्रामक है। द इंडियन एक्सप्रेस में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने साथियों की चिंताओं को दूर करने की कोशिश नहीं की। इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयुक्त किसी मुद्दे पर विचार के दौरान सवाल उठा सकते हैं, स्पष्टीकरण मांग सकते हैं या अपनी टिप्पणी दे सकते हैं। लेकिन ऐसी टिप्पणी को औपचारिक असहमति यानी डिसेंट नहीं माना जा सकता। आयोग के मुताबिक, जिन आदेशों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उन पर तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर हैं।

 

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और EC पर राहुल के सवाल
चुनाव आयुक्तों को लेकर सामने आई द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कथित मतभेद की रिपोर्ट को आधार बनाकर एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्च खोल दिया। आंतरिक मतभेदों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने आयोग के कामकाज की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। गुरुवार (24 सितंबर) की शाम को राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की। इस दौरान उन्होंने ज्ञानेश कुमार को सरकारी गवाह बन जाने की सलाह दी। राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश ने वोट चोरी की है। वे देशद्रोही हैं। मैंने उनकी नियुक्ति का विरोध किया था, लेकिन सरकार ने मेरी बात नहीं मानी।

पत्रकारों के सवालों ने राहुल गांधी की खोली पोल
राहुल गांधी ने गुरुवार (24 सितंबर) को दिल्ली के इंदिरा भवन में एक 55 मिनट का प्रेजेंटेशन दिया। इस प्रेजेंटेशन का शीर्षक ‘Destroyers of Democracy’ था। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री शाह समेत 19 लोगों की तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने कहा कि यह सभी लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं। राहुल ने कहा कि लोकतंत्र को खत्म करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जांच होनी चाहिए। राहुल ने अमित शाह का वह वीडियो दिखाया, जिसमें उन्होंने भाजपा की 14 से 30 साल तक सरकार रहने की बात कही थी। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी का ‘400 पार’ वाला बयान दिखाया। लेकिन प्रेजेंटेशन के आखिर में सवाल और जवाब का दौर चला, जिसमें पत्रकारों के तीखे सवालों ने ‘लोकतंत्र की हत्या’ के मिशन पर निकले राहुल गांधी की पोल खोल दी।

वोट चोरी मामले में राहुल ने इंदिरा गांधी को किया बेनकाब 

सवाल नंबर 1: राहुल जी आपने कहा कि पिछले तीन वर्षों से इस इश्यू को उठा रहे हैं, वोट चोरी को लेकर नए नए खुलासे भी हो रहे हैं। तो आपको कब और क्यों महसूस हुआ कि वोट चोरी की जा रही है?

राहुल गांधी: देखिए, फील मैं आपको बताता हूं। जब मैं 7 साल का था, 1977 में इंदिरा गांधी पीएम थीं। हर कोई जानता था, खुद उनको भी पता की वह हार जाएंगी। महसूस हो जाता है कि आप हार जाएंगे। आपकी फीलिंग एक बार गलत हो सकती है, दो बार गलत नहीं हो सकती। दो-तीन चुनाव ऐसे थे जब हम टेक्निकली देख रहे थे। धीरे-धीरे वोट चोरी का शक बढ़ने लगा। फिर हम उस पर काम करने लगे।

सड़कों पर उतरने के सवाल पर बरगलाने लगे राहुल गांधी

सवाल नंबर 2: आपने कहा कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाया जाना चाहिए। इस्तीफा होना चाहिए। अपने अप्रूवर (गवाह) की सलाह दी है। अगर उन्होंने आपकी सलाह नहीं मानी तो क्या आप सड़कों पर उतरेंगे? जिस तरह आप सीजेपी आंदोलन के दौरान उतरे थे।

राहुल गांधी: देखिए, जैसे मैंने पहले कहा कि ये जो सिचुएशन है। ये हिन्दुस्तान में पहले कभी नहीं हुआ है। हम नई जगह पहुंच गए हैं। ये जो चेन टूटी है। ये हिन्दुस्तान की मॉडर्न हिस्ट्री में कभी नहीं टूटी है। हमने अचानक पाया कि देश में वोट, कानून, संस्था और संविधान के बीच की कड़ी टूट गई है। सबको पता है कि सिस्टम डैमेज हो चुका है।

सवाल नंबर 3: क्या कोई ऐसा वक्त आएगा जब आप चुनावों का बहिष्कार करेंगे?

राहुल गांधी: धन्यवाद, धन्यवाद…मैं Distraction में नहीं जाऊंगा। मैं ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से बचता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद…।

सवाल नंबर 4: राहुल जी आपने कहा कि वोट डिस्ट्रॉय हो रहे हैं। एक प्रोसेस चल रहा है SIR, उस प्रोसेस में एक तरफ जहां करोड़ों लोग बाहर हो रहे हैं, वहीं जेन-जी के लिए अपना नाम जुड़वाना मुश्किल हो रहा है। रजिस्ट्रेशन में दिक्कत आ रही है। तो उसपर आप क्या कहेंगे।

राहुल गांधी: भाजपा को पता है कि जेन-जी इनके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और वो उन्हें वोट नहीं देना चाहते। वो हो रहा हैं। लेकिन एक और खतरनाक चीज हो गई है कि चुनाव आयोग का वोटर लिस्ट से कंट्रोल खत्म हो गया है। उसकी विश्वसनीयता खत्म हो गई है। वे भी इसे मान भी रहे हैं। और मुझे उनके बीच आपस की बातचीत की जानकारी है।

अवलोकन करें:-

सारा बवाल ज्ञानेश कुमार पर काट रही कांग्रेस तो फिर वो खुद कैसे जीतती रही राज्यों में; खुद गांधी
nigamrajendra.blogspot.com
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सुभाष चन्द्र राहुल गाँधी को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कीजड़ फेंकने से पहले देश में हुए पहले चुनाव को याद ..... 

सवाल नंबर  5 : सर, आपने कहा कि आपके पास पुख्ता सबूत है। ब्लैक और ह्वाइट सबूत है। तो क्या चुनाव आयोग अभी जवाब नहीं देता है तो कोर्ट का रूख करेंगे। क्या ये विकल्प है आपके पास, जाएंगे ?

राहुल गांधी: देखिए, मैंने कहा कि मेरा काम एक विपक्ष के नेता के रूप में नॉर्मल सिचुएशन में मेरा काम ऑपोजिशन का रोल है। सरकार पर प्रेसर डालने का रोल है। मेरा काम हिन्दुस्तान के लोकतंत्र को बचाने का नहीं है। मैं वो काम कर रहा हूं। स्टेज पर मैं वो काम कर रहा हूं।

सवाल नंबर 6: आप लगातार वोट चोरी का खुलासा कर रहे हैं। पर इसके जो नतीजे हैं उसमें देखने को मिल रहा है कि एसआईआर दर एसआईआर और जो बिहार का एसआईआर हुआ उसमें अगस्त से लेकर अक्टूबर तक का समय हमारे पास उपलब्ध था। क्या कारण था कि एक भी जो आपत्ति है इस दौरान नहीं उठाई गई और आप जिस तरह से कह रहे हैं कि ये लोकतंत्र के लिए खतरा है। तो वोट चोरी रुकेगी कैसे?

राहुल गांधी: मैम, वोटर लिस्ट की निष्ठा (सटीकता) बनाए रखना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी नहीं है। अगर वोटर लिस्ट गलत है, तो यह मेरी समस्या नहीं है। यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह वोटर लिस्ट की निष्ठा की गारंटी दे। मैं जाकर कह सकता हूँ कि मुझे लगता है यह गलत है, मुझे लगता है वह गलत है। लेकिन अंतिम अथॉरिटी चुनाव आयोग ही है।

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