सारा बवाल ज्ञानेश कुमार पर काट रही कांग्रेस तो फिर वो खुद कैसे जीतती रही राज्यों में; खुद गांधी सरनेम चोरी किया हुआ है और इल्जाम वोट चोरी का लगाते हो

सुभाष चन्द्र

राहुल गाँधी को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कीजड़ फेंकने से पहले देश में हुए पहले चुनाव को याद कर लेना चाहिए था जब जवाहर लाल नेहरू ने इतिहासिक वोट चोरी कर रामपुर से हिन्दू महासभा के 6000 वोटों से निर्वाचित विशन सेठ को अपने लाडले मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को जितवाने के लिए खुलेआम वोट चोरी कर विशन सेठ को जलूस से अगवा कर उनके सामने उनके वोट आज़ाद के खाते में डाल हारे हुए आज़ाद को विजयी घोषित किया था। राहुल और इसे समर्थन दे रही पार्टियां जवाब दो "वोट चोर कौन कांग्रेस या चुनाव आयोग?"  

2014 लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस की UPA सरकार के बनाए हुए मुख्य चुनाव आयुक्त थे VS Sampat जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को 30 वर्ष बाद पूर्ण बहुमत मिला और कांग्रेस को मात्र 44 सीट मिली। तब यह आरोप क्यों नहीं लगाया कि वोट चोरी हुई।

-फरवरी, 2017 में कांग्रेस पंजाब चुनाव जीती - CEC थे नसीम ज़ैदी;

-दिसंबर, 2018 में कांग्रेस छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान चुनाव जीती - तब CEC थे सुनील अरोड़ा;

-2022 और 2023 में कांग्रेस हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के चुनाव जीती - CEC थे राजीव कुमार;

-2019 और 2024 में गठबंधन के साथ कांग्रेस झारखंड चुनाव जीती -तब भी CEC राजीव कुमार थे;

-2015 और 2020 के चुनाव भी महागठबंधन जीता लेकिन तब किसी को वोट चोरी याद नहीं आई;

-2026 में तो केरल में ज्ञानेश कुमार के रहते कांग्रेस चुनाव जीती, फिर भाजपा या ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी क्यों नहीं की।

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लोकतंत्र और चुनावी जवाबदेही पर एक सवाल

 इन राज्यों में कांग्रेस की आखिरी सरकार:
• तमिलनाडु – 1967
• पश्चिम बंगाल – 1977
• सिक्किम – 1984
• उत्तर प्रदेश – 1989
• बिहार – 1990
• गुजरात – 1995
• ओडिशा – 2000
• आंध्र प्रदेश – 2014
 ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) नियुक्त किए गए।
अब सवाल यह है:
जब कांग्रेस दशकों से कई राज्यों में सत्ता से बाहर है, तो हर चुनावी हार के लिए मोदी, EVM या चुनावी व्यवस्था को दोष क्यों दिया जाता है?
पार्टी के नेतृत्व, नीतियों, जनसमर्थन और बदलती हुई मतदाता प्राथमिकताओं की भी समीक्षा क्यों नहीं की जाती?
लोकतंत्र में चुनाव जीतना और हारना प्रक्रिया का हिस्सा है। चुनावी धांधली के आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत होने चाहिए और राजनीतिक दलों को अपने चुनावी प्रदर्शन की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।

अब SIR को लेकर ज्ञानेश कुमार के खून के प्यासे हो गए और कपिल सिब्बल, ममता बनर्जी, राहुल गांधी उन्हें गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं और महाभियोग लाना चाहते हैं। किसने रोका है, दम है तो महाभियोग चलाओ। जिसके SIR को डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में लागू करना चाहता है, उस ज्ञानेश कुमार का चरित्र हनन करते हुए लाज नहीं आती। और तो और कॉकरोच भी धमकी दे रहे हैं आंदोलन की। 

2014 के बाद वैसे वोट चोरी के अलावा EVM में दोष निकालते रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में 45 याचिकाएं दायर की गई लेकिन सब ख़ारिज हो गई। अब सीधा निशाना बनाया है ज्ञानेश कुमार को और यह तय है कि संसद का आने वाला शीतकालीन अधिवेशन भी बर्बाद करने की तैयारी हो गई है।

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ज्ञानेश कुमार के परिवार को निशाना बनाया जा रहा है और कहा जा रहा है कि उनकी बेटियां/ दामाद सभी 2014 के बाद IAS/IRS बने हैं। इससे तो ये लोग UPSC को भी निशाना बना रहे हैं। 

ज्ञानेश कुमार के परिवार में -

मेधा रूपम (बड़ी बेटी): मेधा रूपम 2014 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी हैं, वर्तमान में वे गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की जिलाधिकारी (DM) के पद पर तैनात हैं;

मनीष बंसल (बड़े दामाद) (मेधा रूपम के पति) भी 2014 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी हैं- वे वर्तमान में आगरा के जिलाधिकारी (DM) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं;

अभिश्री कुमार (छोटी बेटी): अभिश्री 2018 बैच की भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी हैं;

अक्षय लाबरू (छोटे दामाद- (अभिश्री के पति) 2017 बैच के IAS अधिकारी हैं;

मनीष कुमार (भाई - IRS)पद/कैडर: ज्ञानेश कुमार के छोटे भाई मनीष कुमार भी भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी हैं;

उपेंद्र कुमार जैन (बहनों के पति/जीजाजी - IPS)पद/कैडर: वे 1991 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी हैं। 1991 में कैसे नियुक्त हो गए अगर 2014 के बाद के आरोप हैं।

मेधा रूपम और उसके पति 23-24 साल की आयु में IAS बने और अपनी योग्यता के आधार पर बने। अगर कोई पक्षपात किया जाता तो आज मेधा नोएडा में और उसका पति आगरा में Posted न होते, बल्कि साथ एक स्टेशन पर होते। अगर मोदी ने IAS/IRS बनवा दिया तो ज्ञानेश कुमार तो 1988 के IAS हैं जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। तो क्या राजीव गांधी ने उन्हें IAS बना दिया।

Eligibility age for IAS 21 से 32 वर्ष है। ये क्या UPSC में भी पेपर लीक का मुद्दा उठाना चाहते हैं?

कांग्रेसी भूल जाते है कि विजयलक्ष्मी पंडित शिक्षित नहीं थी लेकिन बड़े बड़े पदों पर बिठाया उन्हें नेहरू ने।

गली का कुत्ता हर किसी पर भौंकता है वह भी बिना वजह और अपने साथ औरों को जोड़ लेता है। आज विपक्ष की हालत ऐसी ही है। जिस परिवार ने “गांधी सरनेम” चुराया हुआ है, वह वोट चोरी की बात कर रहा है।

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