पिछले कुछ दिनों पहले डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए कहा था कि वो 2026 के अंत में भारत जाने का विचार कर रहे हैं।
लेकिन सितम्बर 17 को अमेरिकी संसद ने “Lindsey O Graham Sanctioning Russia and Iran act of 2026 पास कर दिया। इस बिल के पक्ष में 262 वोट पड़े और विपक्ष में 159। सीनेट ये बिल अगस्त में पहले ही पारित कर चुकी है। Lindsey ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का सदस्य है।
इस बिल के पारित होने से ट्रंप को उन 5 बड़े देशों के आयात पर 100 टैरिफ लगाने की शक्तियां मिल गई जो रूस से तेल या गैस खरीदेंगे - चीन और भारत उसमे सबसे ऊपर हैं।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
भारत ने साफ़ कर दिया है कि इस तरह के कदम से द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की सम्भावना है। भारत अपने 1.40 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। वह विभिन स्रोतों से और बाजार की बदलती परिस्तिथियों के आधार पर यह काम जारी रखेगा।
लगता है यह बिल BRICS के सफल आयोजन के प्रतिशोध के लिए पारित कराया गया है। अगर भारत पर ट्रंप 100% टैरिफ लगाते हैं तो किस मुंह से वो भारत आएंगे और ट्रेड डील तो ख़त्म ही समझो।
डोनाल्ड ट्रंप भूल रहे हैं कि अगर पुतिन से यूरोप के देशों और ब्रिटेन को गैस (LNG) सप्लाई बंद कर दी तो उनके लोग ठंड से मर जाएंगे। रूस पर पहले ही 30,000 से ज्यादा प्रतिबंध लगे हुए हैं जो अमेरिका EU देशों और ब्रिटेन ने लगाए हुए हैं। पुतिन पलटवार करेगा तो मुश्किल होगी।
यूक्रेन अकेला लड़ने की हिम्मत नहीं रखता रूस से। उसके साथ कौन लड़ रहे हैं उसे खाद पानी देकर यह भी देखिए -
-अमेरिका ने 31 मार्च 2026 तक 195 बिलियन डॉलर दिए;
-NATO देशों ने 27 बिलियन डॉलर की मदद दी अमेरिका के जरिए;
-EU और उसने 27 सदस्य देशों ने 240 बिलियन डॉलर की मदद दी। इसके अलावा 125 बिलियन यूरो लोन और रेफुजियों को सपोर्ट के लिए दिए; 78 बिलियन यूरो मिलिट्री सपोर्ट और यूक्रेन के लोगों को EU सदस्य देशों में रिफ्यूजी के रूप में रखने के लिए दिए और 17 बिलियन यूरो पूरी तरह से रिफ्यूजियों पर खर्च किये;
-ब्रिटेन ने 33 बिलियन डॉलर की multi-year commitments की; इसके अलावा 16 बिलियन पाउंड्स के हथियार मुहैया कराए; 5.6 बिलियन पाउंड्स की आर्थिक मदद अलग से की जिसमें वर्ल्ड बैंक के लोन की गारंटी भी शामिल हैं।
तो इस तरह देखा जाए तो रूस अकेले यूक्रेन से युद्ध नहीं लड़ रहा। उसके खिलाफ परोक्ष रूप से लड़ रहे हैं अमेरिका, ब्रिटेन, NATO देश, EU और EU के 27 देश। अगर इनका साथ न हो तो यूक्रेन की कोई औकात नहीं है रूस से लड़ने की।
एक तरफ ट्रंप ने 100% टैरिफ लगाने का बिल पास कराया और दूसरी तरफ रूस यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए अपना दूत भी पुतिन के पास भेजा। फिर तो sanctions ही चलने दो, युद्ध रोकने की क्या जरूरत है लेकिन शायद ट्रंप युद्ध रुकवा कर Nobel Prize के चक्कर में हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधि की मुलाकात पुतिन से तब हुई जब पुतिन और मोदी मिल चुके थे और डॉ जयशंकर जेलेंस्की से मिल चुके थे। यानी बातचीत का आधार तैयार हो गया था। लेकिन पुतिन ने अमेरिका के सामने बस दो शर्ते रखी। पहली डॉन बॉस्को पर कब्ज़ा नहीं छोड़ेंगे और दूसरी यूक्रेन को NATO एंट्री नहीं मिलेगी।
डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को विश्व में अकेला करके मानेंगे क्योंकि विश्व की आधी आबादी तो BRICS देशों में हैं। इस्लामिक देश वैसे ही ट्रंप को पसंद नहीं करते। मुझे नहीं लगता अब डोनाल्ड ट्रंप भारत आ सकेंगे।

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