कल(सितम्बर 10) चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने 14 साल की निशु आज़ाद के कथित उत्पीड़न और उसे डराने धमकाने के मामले में सख्त संज्ञान लिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी भी बच्चे के खिलाफ हिंसा या गवाह/पीड़ित परिवार को धमकाने के मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
ऐसी 14 साल की लड़की को आप बचा रहे हैं। उसका अपराध अक्षम्य है। ऐसी गंदी गलियां देने वाली और भी बहुत लड़कियां और लड़के थे वहां।
अब सोचिए आपके फैसलों से नाराज होकर कोई अगर आपकी तेरहवीं का खाना और समोसे बांटे तो आपको कैसा लगेगा? यह बात अगर निशु आज़ाद आपकी लिए कहती तो क्या ठीक था और यह भी कहती कि आप एक अनपढ़ हैं जो चीफ जस्टिस बन गए, जिसे लॉ का L भी पता नहीं।
आज आपने एक और फरमान जारी कर दिया कि कॉकरोचों के खिलाफ FIR की अनुमति केवल सुप्रीम कोर्ट देगा और यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति नहीं दे सकती। यह तब है जब कॉकरोच आपके फैसलों को मानने से इंकार कर चुके हैं।
आपने अनुच्छेद 142 का दुरुपयोग कर सभी कथित छात्रों की FIR पर कार्रवाई पर रोक लगा दी। जबकि अनुच्छेद 142 कहता है Constitution of India grants the Supreme Court the unique power to pass any decree or order necessary for delivering "complete justice" in any pending case.
Key Powers and ScopeComplete Justice: Allows the apex court to go beyond rigid statutory limits or procedural technicalities when existing laws fail to provide a specific remedy.
अभी तो कथित छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज ही हुई थी, अभी तो complete justice देने की नौबत आई ही नहीं थी और इसलिए 142 का इस्तेमाल सर्वथा अनुचित था।
जिस प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया के 35 देश अपना सर्वोच्च सम्मान दे चुके हैं उसके लिए कॉकरोचों द्वारा गाली देना शायद आपको अच्छा लगा है?
क्या आपको प्रधानमंत्री मोदी को CJP के आंदोलन में शामिल लड़के लड़कियों का गालियां देना सही लगा? वो प्रधानमंत्री हैं, उन्होंने अगर ऐसे उद्दंड लोगों को माफ़ भी कर दिया तो क्या कानूनी तौर पर भी आप उन्हें छोड़ देंगे? संसद भवन उखाड़ने की धमकी देना क्या उचित था और क्या मोदी जी की माँ के लिए गालियां देना उचित था? अगर किसी विदेश में किसी ने प्रधानमंत्री को ऐसे गालियां दी होती उसको जेल हो गयी होती, लेकिन भारत में सुप्रीम कोर्ट ऐसे लोगों को बचाने के लिए बैठी है।
लेकिन आपने सभी को एक झटके में अभय दान देकर गलत परंपरा शुरू कर दी। आप अपने आदेशों पर पुनर्विचार कीजिए और जो लोग NEET से नहीं जुड़े थे, उनके खिलाफ कार्रवाई आदेश दीजिए। ऐसे तो देश का सर्वनाश कर देंगे आप। अराजकता फ़ैलाने वालों को अगर छोड़ दिया जाएगा तो देश कहां जाएगा?
आपने साबित कर दिया कि जज भगवान होते हैं जो कभी गलती नहीं करते।

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