कांग्रेस और इसका गुलाम INDI गठबंधन नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी की कार्यशैली पर ऊँगली तो उठा सकते हैं लेकिन कांग्रेस का चीन के साथ MoU के बारे में पूछने के लिए किसी ने अपनी माँ का दूध ही नहीं पिया। दूसरे, सोनिया गाँधी का कश्मीर विरोधी संस्था का सदस्य होने पर भी पूछने के लिए किसी ने माँ ने इन्हे दूध ही नहीं पिलाया।
ये चिदंबरम 2004 से 2008 के अंत तक वित्त मंत्री रहा था और 2006 में BRICS का गठन हुआ जबकि इसकी पहली मीटिंग 2009 में हुई। आज चिदंबरम को ये ब्रह्म ज्ञान कैसे और कहां से हो गया कि BRICS और SCO से हमें कोई फायदा नहीं हुआ।
SCO 2001 में बना और 2005 में भारत को Observer का स्टेटस मिला। फिर कांग्रेस की सरकार को BRICS और SCO में घुसने की क्या जरूरत थी? यानी कांग्रेस में कोई दूरदर्शिता नहीं थी जो समझ सकती कि इन संगठनों से कोई फायदा नहीं होगा?
डॉ मनमोहन सिंह BRICS की पहली 5 मीटिंग में फिर क्यों गए जो 2009, 2010, 2011, 2012 और 2013 में हुई थी? आज फिर दर्द क्यों हो रहा है जब मोदी की सरकार ने BRICS की बैठक का सफल आयोजन किया है?
कांग्रेस की समस्या यह है कि मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती लोकप्रियता उसे रास नहीं आती और इसलिए हर बात में आलोचना करने से मतलब है। शायद इसलिए ही कांग्रेस ने विदेशों से मिले किसी सर्वोच्च सम्मान के लिए मोदी को बधाई नहीं दी।
चिदंबरम को BRICS और SCO से देश को कुछ फायदा नज़र नहीं आता तो इस बात का जवाब दे कि कांग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की बीच हुए 2008 के MOU से देश को क्या फायदा हुआ? देश को तो नहीं कांग्रेस को अवश्य फायदा हुआ जो आज कांग्रेस और राहुल गांधी पूरी तरह चीन की गोद में बैठे हैं।
कांग्रेस के बारे में एक मजेदार बात और बताता हूँ। कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए जितिन प्रसाद आज मोदी के मंत्री की हैसियत से जिनपिंग का स्वागत करने गए थे। कांग्रेस में अभी रहे होते तो सत्ता के लिए अंधेरे में भटक रहे होते और राहुल गांधी के पीछे पीछे चल कर चापलूसी कर रहे होते।
आज के BRICS के घोषणा पत्र में पहलगाम में आतंकी हमले की निंदा की गई है जो भारत की कूटनीतिक जीत है। घोषणा पत्र में आतंकवाद के प्रति और आतंकवाद को समर्थन देने वालों के प्रति zero tolerance की बात कही गई है।
मजे की बात है इस घोषणा पत्र पर ईरान ने भी हस्ताक्षर किए हैं जो खुद अनेक आतंकी संगठनों को मदद कर इज़रायल पर हमले करता है। हमास, हिज्बुल्ला और हूती उसके ही पाले हुए संगठन हैं और ईरान इज़रायल और यहूदियों को जीने का अधिकार भी नहीं देना चाहता। खामनेई ने इज़रायल पर हमले के लिए हमास की निंदा नहीं की और हमले की तारीफ करते हुए कहा था ये फिलिस्तीनियों की जीत है।
शायद इसलिए ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा है कि “हर देश की आवाज़ सुननी चाहिए”। मोदी ने समुद्री मार्गों पर सुरक्षा पर भी बल दिया और एक Comprehensive Policy बनाने के लिए कहा। यह संदेश ईरान और अन्य देशों के लिए था जो आयल टैंकरों पर हमले करते हैं और समुद्री मार्ग बाधित करते हैं।
आज का साझा घोषणा पत्र सर्वसम्मति से जारी हुआ। ऐसा ही साझा घोषणा पत्र सर्वसम्मति से 9 सितंबर, 2023 के दिल्ली में आयोजित G20 में जारी हुआ था। अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में सर्वसम्मति से घोषणापत्र जारी होना बड़ी बात होती है। यह साबित करता है कि वैश्विक स्तर पर मोदी की आवाज़ और विचार कितने प्रभावी हैं। बाकी जिसका काम ही आलोचना करना है, वो रोता रहे या भौंकता रहे।


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