कांग्रेस पार्टी और उसके नेता राहुल गांधी द्वारा महिलाओं के अधिकारों और पितृसत्तात्मक सोच के विरोध में ‘मनुस्मृति’ को लेकर दिए गए बयानों और देश भर में इसे जलाने के पार्टी के आह्वान पर राजनीतिक विवाद छिड़ा हुआ है। राहुल गांधी ने ‘स्मैश द पैट्रियार्की’ यानी पितृसत्तात्मक सोच और व्यवस्था को खत्म करने की अपील की। इसी बीच दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में खुली एक ‘एपस्टीन फाइल्स’ ने कांग्रेस के महिला विरोधी चेहरे को उजागर कर दिया है। महिलाओं की आजादी की बात करने वाले राहुल गांधी और उनके सांसद किस तरह महिलाओं को उपभोग की वस्तु मानते हैं, इसका प्रमाण जेएनयू जैसी प्रगतिशील, सेकुलर, लिबरल और वामपंथियों के गढ़ कही जाने वाली यूनिवर्सिटी की 11 छात्राओं ने दिया है।
Angomcha Bimol Akoijam, accountability is not a presumption of guilt. It is an obligation to answer. #NationalShameAngomchapic.twitter.com/N9GEGu0jg7
— अमित (@Amit96_) September 8, 2026
प्रोफेसर डॉ. बिमोल अंगोमचा पर यौन शोषण का आरोप
दरअसल, जेएनयू में 11 छात्राओं ने प्रोफेसर डॉ. बिमोल अकोइजम अंगोमचा पर मौखिक परीक्षा के दौरान ‘एक्स्ट्रा मार्क्स’ के बदले सेक्सुअल फेवर (यौन संबंध) की मांग करने का गंभीर आरोप लगाया है। सितंबर 2026 में सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले की जांच यूनिवर्सिटी की इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) कर रही है। छात्र संगठन एबीवीपी (ABVP) का दावा है कि आरोपी प्रोफेसर वर्तमान में कांग्रेस के सांसद हैं, जिसके चलते उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। साथ ही राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर मामले को दबाने के आरोप लग रहे हैं।
Why has this JNU professor suddenly gone viral over the past two days?
Meet Dr. Angomcha Bimol Akoijam—a JNU professor who is also a Congress MP from Manipur.
Academic by profession. Politician by mandate. And now, suddenly at the center of the spotlight. pic.twitter.com/NPryNuOtUS— Dr. Dang
(@LethalTm35880) September 9, 2026
कौन हैं प्रोफेसर डॉ. बिमोल अकोइजम अंगोमचा ?
प्रोफेसर डॉ. बिमोल अकोइजम अंगोमचा मणिपुर से 18वीं लोकसभा के कांग्रेस सांसद हैं। उन्होंने 2024 के आम चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मणिपुर के इनर मणिपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में सामाजिक विज्ञान संकाय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। वह एक बुद्धिजीवी, स्तंभकार और फिल्म निर्माता भी हैं, जिन्होंने कुछ वृत्तचित्र (documentary) और फिल्में भी बनाई हैं।
ये मणिपुर से कांग्रेस सांसद Angomcha Bimol Akoijam हैं। ये JNU में प्रोफेसर भी हैं।
— Prashant Umrao (@ippatel) September 8, 2026
JNU प्रोफेसर का मामला आजकल चर्चा में है। जो कांग्रेस से जुड़ा हो तो आप जानते ही हैं कि क्या किया होगा। pic.twitter.com/HPP9V2UtP5
कैसे हुआ कांग्रेस सांसद की ‘एपस्टीन फाइल्स’ का खुलासा
यह मामला तब उजागर हुआ जब एक छात्रा ने छात्रों के एक निजी व्हाट्सएप ग्रुप पर अपने साथ हुई घटना साझा की, जिसके बाद अन्य पीड़ित छात्राएं भी सामने आईं। छात्राओं ने जो आरोप लगाए, उनमें गंदे कमेंट्स करना और यौन संबंध बनाने के बदले एक्स्ट्रा मार्क्स देने की पेशकश करना शामिल है। मई 2026 में हुई मौखिक (वाइवा) परीक्षाओं के दौरान प्रोफेसर ने अश्लील टिप्पणियां कीं और कहा कि यदि वे उनकी मांगें मानती हैं तो उन्हें अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। शिकायतों के अनुसार, प्रोफेसर ने छात्राओं को कैंपस में स्थित अपने निवास स्थान पर भी बुलाया, जहां उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया।
If he belongs to BJP then it will be go viral!
— Voice of Hindus (@Voiceofhindus) September 9, 2026
But Angomcha Bimol Akoijam is a JNU Professor and a Congress MP. pic.twitter.com/8mYyVKqVLe
ABVP कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सांसद का जलाया पुतला
छात्राओं के यौन शोषण का यह मामला इस साल मई में इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) को सौंपी गई थी, जब कई स्टूडेंट्स ने प्रोफेसर के खिलाफ आरोप लगाए थे। इसके बाद कमेटी ने अपनी कार्यवाही शुरू की और छात्राओं से बयान दर्ज कराने के लिए पेश होने को कहा। आईसीसी की समिति छात्राओं के बयान दर्ज कर रही है और मामले की जांच जारी है। लेकिन मामले को दबाने की आशंका के बाद छात्रों और विभिन्न संगठनों द्वारा प्रोफेसर को तुरंत निलंबित करने और दिल्ली पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की मांग की जा रही है। जेएनयू के ABVP कार्यकर्ताओं ने आरोपी प्रोफेसर, इंटरनल कमिटी और JNUSU के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया और उनके पुतले जलाए। ABVP कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जांच में देरी कर मामले को दबाने की कोशिश हो रही है।
ICC के लेफ्ट सदस्य विचारधारा के आधार पर देते हैं फैसले
एबीवीपी के संयुक्त सचिव विकास पटेल ने कहा कि कोई छात्र डर के मारे सामने नहीं आ रहा है। ऐसे कुल 11 छात्राओं ने आईसीसी में शिकायत दर्ज कराई थी। आईसीसी को 90 दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट देनी होती है। चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मई का मामला है, प्रशासन भी चुप्पी साधे बैठा है। आईसीसी के जो मेंबर है, वो लेफ्ट संगठन से जुड़े हैं। वो भी चुप्पी साधे हुए हैं। यह पहली घटना नहीं हुई है। जेएनयू में इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। और इस तरह की घटनाएं होती हैं तो आईसीसी के लेफ्ट सदस्य विचारधारा के आधार पर फैसला देते हैं, और अपने कैडर को बचाने की कोशिश करते हैं।
”होते रहना चाहिए महिलाओं का खतना’’#TheBreakfastShow with @ParmeshwarBawa | ABVP Protest in JNU over Sexual Harassment allegations, ABVP alleged that action is being delayed
— NDTV (@ndtv) September 9, 2026
NDTV's @SehgalRahesha spoke to ABVP State Joint Secretary Vikas Patel (@vikaspatel49) with more details pic.twitter.com/YZzKCyp4xl
10 जुलाई, 2018 को कांग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में खतना के पक्ष में दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि ‘खतना’ शरिया का हिस्सा है, और इसे रोका जाना मजहब में दखल होगा। दरअसल कांग्रेस इसे धर्म से जोड़कर चंद वोटों के लिए करोड़ों महिलाओं के आत्मसम्मान से खिलवाड़ कर रही है। यह केवल विडंबना नहीं है कि सिंघवी ने इस बर्बर कुप्रथा का बचाव किया। बल्कि कांग्रेस ने फिर साबित किया कि वह मुसलमानों का वोट पाने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकती है। उसे इस बात की कतई चिंता नहीं कि मुस्लिम महिलाएं किस दंश से गुजरती हैं। हालांकि मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कर दिया कि ‘खतना’ प्रथा पर बैन लगाने वाली याचिका का वह समर्थन करती है।
शाह बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटाकांग्रेस ने 1986 में शाहबानों प्रकरण में जो रुख अपनाया था वो मुस्लिम महिलाओं की तकलीफें बढ़ाने वाला था। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो के फेवर में अपना फैसला देते हुए पति को गुजारा भत्ता देने की बात कही थी, लेकिन शाहबानो के पति ने कोर्ट के फैसले को मुस्लिम पर्सलन लॉ में दखल करार देते हुए भत्ता देने से मना कर दिया। जिसके बाद इस विवाद में मुस्लिम पर्सलन लॉ बोर्ड भी कूद गया। यह विवाद इतना बढ़ा कि मामले ने राजनैतिक रंग ले लिया। तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने कांग्रेस के अपने परंपरागत अल्पसंख्यक वोट बैंक को बचाने के लिए पर्सलन लॉ में कोर्ट के दखल को न सिर्फ गलत ठहराया, बल्कि अपनी बहुमत वाली सरकार से इस बारे में संसद से एक कानून भी पास करा लिया।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर अशोभनीय और भद्दा तंज13 अगस्त को दिल्ली के एक कार्यक्रम में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर निशाना साधते हुए विदेश दौरों में राष्ट्राध्यक्षों से गले मिलने की परंपरा पर टिप्पणी कर रहे थे। इसी दौरान वह अपनी ही पार्टी के नेता संदीप दीक्षित के पास जाकर हाथ फैलाते हुए उनके गले लग जाते हैं। राहुल गांधी आगे कुछ कहते, उससे पहले ही संदीप दीक्षित ने मर्यादा की सभी सीमाओं के लांघते हुए इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर बेहद अशोभनीय और भद्दा तंज कसते हुए कहा, “मेलोनी समझ कर तो नहीं पकड़ा था?” इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह रही कि एक मित्र देश की महिला राष्ट्राध्यक्ष को लेकर किए गए इस द्विअर्थी मजाक पर आपत्ति जताने के बजाय राहुल गांधी समेत मंच पर मौजूद तमाम कांग्रेस नेता ठहाके लगाते दिखे।
पार्टी मंच पर ही महिला के साथ छेड़छाड़राहुल गांधी की भाषा दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है। देश के प्रधानमंत्री के लिए इस स्तर की भाषा का प्रयोग किसी भी सभ्य राजनीतिक संस्कृति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 13, 2026
यह भारत की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की मर्यादा पर कलंक है।
जनता इनके शब्द भी देख रही है, संस्कार भी… pic.twitter.com/t3pUv3Z8er
कांग्रेस नेता महिला हितैषी होने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन ये सब एक तरह से ढोंग ही है। महिलाएं पार्टी के बाहर तो छोड़िए, अंदर भी सुरक्षित नहीं हैं। 04 अक्टूबर, 2024 को हरियाणा के नारनौंद में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के बेटे सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा की रैली में मंच पर ही एक महिला नेता के साथ छेड़छाड़ की गई। इस रैली में दीपेन्द्र हुड्डा के साथ कांग्रेस के दो और सांसद के मौजूद रहने के बाद भी मंच पर महिला नेता सोनिया दुहन के साथ छेड़छाड़ की गई। इसकी पुष्टि खुद कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने की है। कुमारी शैलजा ने सोनिया दुहन के साथ स्टेज पर हुई बदसलूकी पर कहा कि ‘मैंने उनसे बात की, वो मुझे बता रही हैं कि उनके साथ वहां छेड़छाड़ की गई। मैंने उनसे इस बात की पुष्टि की है, अगर आज किसी महिला के साथ ऐसा होता है, तो इससे बुरा और निंदनीय क्या हो सकता है।’
अब सब महिला सम्मान गे तेल लेने ?
— Sardar Lucky Singh🇮🇳 (@luckyschawla) October 5, 2024
है ना @Phogat_Vinesh @BajrangPunia @SupriyaShrinate ? pic.twitter.com/SmTPgE9qTk
सवाल यह है कि जिस पार्टी में खुद महिला नेता सुरक्षित नहीं हैं, सोनिया नाम की महिला सुरक्षित नहीं है, वो पार्टी देश की बहन-बेटियों को कैसे सुरक्षा देगी? इसको लेकर लोग सोशल मीडिया पर कांग्रेस की थू-थू कर रहे हैं। स्टेज पर एक महिला नेता के साथ हुई इस घटना को लेकर कांग्रेस की किरकिरी हो रही है।
एक किसान महिला कांग्रेस नेत्री के साथ कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा के सामने, भरी सभा में, खुले मंच पर, छेड़छाड़ की जाती है और कांग्रेस के नेताओं ने इस पर चुप्पी साधी हुई है।
— Amit Malviya (@amitmalviya) October 5, 2024
किसान संगठनों में इसको लेकर कांग्रेस के प्रति बहुत ग़ुस्सा है। pic.twitter.com/epDISso5Sw
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