कांग्रेस के इतिहास को देखने पर मालूम होता है कि कांग्रेस अपनी स्थापना से आज तक हिन्दू धर्म के खिलाफ रही है। जितने बदलाव कांग्रेस ने सनातन में किये है किसी दूसरे मजहब में करने की हिम्मत नहीं कर पायी। जबकि उन मजहबों में सनातन से कहीं ज्यादा कमियां हैं। फिर भी मंदबुद्धि हिन्दू कांग्रेस और सनातन विरोधियों को वोट देकर इन्हे सुरमा भोपाली बनाये हुए हैं।
कांग्रेस के नेताओं की मति भ्रष्ट हो गई है जो पहले सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राम एक काल्पनिक चरित्र हैं लेकिन वो काल्पनिक चरित्र कांग्रेस को लोकसभा में 44 सीट पर ले आया और मोदी जैसे राम भक्त को पूर्ण बहुमत दे दिया।
आज तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भगवान शिव और भगवान राम को ही अलग कर दिया। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के लोग द्रविड़ हैं और शिव के भक्त हैं, जबकि उत्तर भारत के लोग आर्य हैं और वे भगवान राम के भक्त हैं। आज कम से कम रेड्डी ने भगवान राम का अस्तित्व तो स्वीकार कर लिया और मान लिया कि राम कोई काल्पनिक चरित्र नहीं है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
तुम बताओ कि अगर तुम भगवान शिव के भक्त हो तो कभी अपनी सभा/रैली में "हर हर महादेव" का जयकारा लगाते हो क्या? कभी नहीं लगाते क्योंकि मुसलमान नाराज़ हो सकते हैं। तुम तो बड़े फ़क्र से कहते हो कि "कांग्रेस मुसलमान है और मुसलमान कांग्रेस है। फिर तो कांग्रेस भारत के किसी भी प्रान्त में हो, वह न तो शिव की भक्त है और न राम की।
राहुल गांधी तो उत्तर भारत का है लेकिन वो तो कहता है कि वो राम को नहीं मानता लेकिन शिव को मानता है। दक्षिण भारत की DMK के नेता सनातन धर्म को डेंगू मलेरिया कह कर उसे समाप्त करने की बात करते हैं तो क्या वो भगवान शिव को भी सनातन धर्म से अलग मानते हैं, फिर शिव के भक्त कैसे हो सकते हैं? लेकिन उनका हश्र क्या हुआ चुनाव में?
कांग्रेस के अमेरिका में बैठे एक बुढऊ नेता सैम पित्रोदा ने कहा था कि दक्षिण भारत के लोग अफ्रीकी लगते हैं, जबकि उत्तर भारत के लोग गोरे हो सकते है और पूर्वी भारत के लोग चीनी लगते हैं तथा पश्चिम के लोग अरेबियन लगते हैं। यह मानसिकता लिए कांग्रेस चल रही है और आज तो सभी सीमाएं लांघ लगाया रेवंत रेड्डी।
भगवान शंकर और भगवान राम का क्या संबंध है, यह उन्होंने खुद बताया "रामेश्वरम" की परिभाषा देते हुए।
“रामस्य ईश्वरः इति रामेश्वरः: जो भगवान राम के ईश्वर हैं, अर्थात भगवान शिव;
रामः ईश्वरः यस्य सः रामेश्वरः: राम जिनके ईश्वर हैं, अर्थात भगवान शिव खुद को राम का दास मानते हैं”।
जो भगवान शंकर नित राम कथा करते हैं उन्हें भगवान राम से अलग करते हुए लाज नहीं आती। हमारी कथाओं में भगवान शिव को भगवान राम और भगवान कृष्ण के बाल रूप के दर्शन के लिए जाते हुए बताया गया है। अब रेवंत रेड्डी किसी दिन कहीं भगवान कृष्ण को भी गालियां न दे दे - राम मंदिर तो बनने नहीं दिया था और कृष्ण मंदिर को भी समर्थन नहीं देना चाहते।
रेवंत रेड्डी तुमको याद होना चाहिए भगवान राम के लिए शंकर जी ने रावण के सिर से अपने आशीर्वाद का हाथ हटा लिया था। तुम्हारे नाम “रेवंत” का अर्थ है “सूर्य का पुत्र” और भगवान राम सूर्यवंशी थे। तो क्या अपने कुल को ही गाली दे रहे हो?
लगता है कांग्रेस अपनी और ज्यादा दुर्गति देखना चाहती है। तथास्तु

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