सऊदी अरब और अन्य आस पास के देशों को अपने अस्तित्व के लिए इज़रायल का दामन थामना होगा; सऊदी प्रिंस MBS को भाईचारा छोड़ना होगा अगर ईरान और हूतियों से लड़ना है

सुभाष चन्द्र

सऊदी अरब पर यमन हूती बराबर हमले कर रहे है। सऊदी अरब यमन  समर्थित सरकार के कब्जे वाले Mokha and the Bab al-Mandeb Strait को अपने कंट्रोल में ले लिया। हूती विद्रोहियों ने सऊदी की जजान की अरामको की ऑयल रिफाइनरी पर भी हमले किए। 

इसके पहले ईरान भी इज़रायल और अन्य अमेरिकी अड्डों वाले देशों के तेल भंडारों पर हमले कर चुका है। उधर इज़रायल ने भी ईरान के तेल भंडारों पर हमले किए थे। लगता है यह युद्ध अब तेल को आग लगाने के लिए हो रहा है।

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
MBS ने एक पुराने बयान में कहा था कि अगर हमें यमन के मुस्लिम भाइयों का ख्याल न होता तो हम एक हफ्ते में यमन (सना) पर कब्ज़ा कर लेते। क्या समझते हो कि अगर आप हमला करोगे तो यमन के सारे मुसलमान मारे जाएंगे? सऊदी अरब को समझना पड़ेगा कि उसको मारने वाले, उस पर हमला करने वाले भी यमन के मुसलमान ही हैं चाहे वो हुती ही क्यों न हों।

लेकिन MBS के दिमाग में फितूर है कि वह इज़रायल के साथ नहीं होगा जब तक फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र न मान लिया जाए। फिलिस्तीन से आखिर क्या मिल रहा है सऊदी अरब को जबकि हमास को वो आतंकी संगठन मानता है? अपने अस्तित्व के लिए MBS को फिलिस्तीन से भाईचारे को भूल कर इज़रायल से हाथ मिलाना पड़ेगा जैसे UAE ने मिलाया है और अन्य आस पास के देशों को भी मिलाना पड़ेगा।

हमारे Major General (रिटायर्ड) GD Bakshi जी है। मैं उनका बहुत सम्मान करता हूँ क्योंकि उन्होंने देश की बहुत सेवा की है लेकिन उनके एक रुख से मैं सहमत नहीं हूँ। जब भी वो टीवी पर बोलते हैं और ईरान युद्ध की बात होती है तो वो ट्रंप के ऊपर गुड़ खा के चढ़ जाते हैं जैसे ट्रंप ने उनकी भैस खोल ली हो। ऐसे बोलना शुरू करते हैं ट्रंप के खिलाफ जैसे ततैया काट गया हो लेकिन ईरान की बहादुरी की बड़ी तारीफ करते हैं।

बक्शी साहब आपको यह नहीं दिखाई देता कि ईरान खुद एक आतंकी देश है और उसके पाले हुए हमास, हिज्बुल्लाह और हूती अपने आप में ईरान के संरक्षण में अलग अलग आतंकी देश की तरह ईरान के साथ मिलकर  इज़रायल और अमेरिका के साथ लड़ रहे हैं। कौन सा ऐसा मिडिल ईस्ट का देश है जिस पर ईरान ने हमले न किए हों? बक्शी साहब को यह भी इल्म होना चाहिए कि ईरान इज़रायल को दुनिया के नक़्शे से ही मिटा देना चाहता है और यहूदियों को जीने का अधिकार ही नहीं देना चाहता। ईरान की सोच है Death to America और Death to इज़रायल।

ईरान की तरफ से ट्रंप और उसके बेटे को मारने की भी कॉल दी गई है लेकिन अगर ईरान ने ट्रंप की हत्या करवा दी तो अमेरिका ईरान को हिरोशिमा बनाने में एक मिनट भी नहीं लगाएगा। क्या बक्शी साहब ऐसी काल का समर्थन करते हैं?

सितम्बर 23 को ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने UN में कहा है कि इज़रायल का व्यवहार आतंकियों जैसा है और हम आज़ादी से जीना चाहते हैं। आप इज़रायल पर हमास के 7/10/23 के हमले का समर्थन करते हैं और यहूदियों को जीने का अधिकार भी नहीं देना चाहते। यह कैसे जायज है? 

सऊदी अरब को भी बर्बाद करने के लिए ईरान उत्सुक है। कहीं ऐसा न हो कि इस्लाम जिस सऊदी अरब से शुरू हुआ, उसका अंत भी वहीँ  होगा।  

No comments: