रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए कुछ पहल लगता है पीएम मोदी की तरफ से चल रही है

सुभाष चन्द्र

कुछ दिन पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास इस युद्ध का ऐसा समाधान तलाशने के अच्छे विचार हैं, जो पारस्परिक रूप से स्वीकार्य हों। उसके बाद यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सीबिहा ने भी कहा कि यूक्रेन के पास युद्धविराम के चार प्रस्ताव हैं। ये भारत, तुर्किये, मिस्र और अमेरिका की ओर से आए हैं। उन्होंने कहा कि इनमें भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है। 

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यूक्रेन के विदेश मंत्री ने कहा कि यूक्रेन विभिन्न प्रस्तावों पर विचार के लिए तैयार है लेकिन शर्त यह है कि युद्धविराम केवल मोर्चे पर लड़ाई तक सीमित न रहे और इसमें ऊर्जा, बंदरगाह पर हमले तथा काला सागर की स्तिथि भी शामिल होनी चाहिए।

इसके पहले 5 सितंबर को ट्रंप के प्रतिनिधि पुतिन से मिले थे लेकिन रिपोर्ट्स में ऐसा कहा गया कि पुतिन ने युद्धविराम के लिए दो शर्ते रखी थी। Don Basco वो नहीं छोड़ेगा और यूक्रेन को NATO में एंट्री नहीं मिलेगी।

उसके बाद पुतिन की नरेंद्र मोदी से 11 सितंबर को दिल्ली में BRICS सम्मेलन में मुलाकात हुई और फिर पुतिन और यूक्रेन का बयान सामने आया है।

साढ़े चार साल से ज्यादा समय हो गया युद्ध शुरू हुए लेकिन आज तक NATO यूक्रेन को एंट्री नहीं दे सका जबकि 2023 में फ़िनलैंड और 2024 में स्वीडन को NATO का सदस्य बना लिया। NATO वैसे भी इस समय कमजोर हो चुका है क्योंकि बराबर NATO देशों में मनमुटाव देखने को मिल रहा है। आज ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका के बिना NATO की कोई हैसियत नहीं है तो इटली की पीएम मेलोनी ने जवाब दिया कि हम अमेरिका से ट्रेड बंद कर सकते हैं। अगर किसी NATO देश पर कोई देश हमला करता है तो जरूरी नहीं NATO संधि के अनुसार सभी सदस्य देश उस युद्ध में कूदें।

आज भारत की तरफ से पहली बार विदेश मंत्री डॉ जयशंकर ने माना है कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान की सिर्फ पैरवी ही नहीं कर रहा, बल्कि उसने इससे आगे बढ़कर हाल के महीनों में समाधान के प्रयास भी तेज कर दिए हैं।

लेकिन ट्रम्प चाहते हैं युद्ध रुकवाने का सेहरा उनके सिर पर बंधे जिससे नोबल प्राइज पर उनका दावा मजबूत हो जाए। पर मोदी की कूटनीति के आगे ट्रंप नीति काम नहीं कर सकेगी क्योंकि उसकी नीति पुतिन पर प्रतिबंध लगा कर भारत और अन्य देशों में डर पैदा कर रूस को काबू करने की है।

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