कांग्रेस और करीब दस दलों ने सुप्रीम कोर्ट में 12 अक्टूबर को चुनाव आयोग द्वारा किए गए SIR के खिलाफ याचिका दायर की और उसी दिन इन सभी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। 10 अक्टूबर के CJP के प्रदर्शन को समर्थन देने वाले दल “आप”CPI और TMC शामिल थे जबकि याचिका दायर करने वालों में “आप” नहीं थी, CPI और TMC थी।
अब काल्पनिक सुनवाई का नज़ारा देखिए - 
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सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच के सामने 20 से ज्यादा बड़े बड़े वकील खड़े हो गए और चेले चपाटे 100 से ज्यादा थे।
चीफ जस्टिस ने पूछा आप किसलिए आए हैं क्या मामले हैं आपके?
एक वकील बोला - जनाब चुनाव आयोग ने SIR में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की है, लाखों लोगो के नाम बिना वजह मतदाता सूची से हटा दिए। उसके खिलाफ ही हम फरियाद लेकर आए हैं।
चीफ जस्टिस बोले - आपकी बात हम बाद में देखेंगे, उसके पहले हमारी बातों का जवाब दीजिये।
वकील - जी जनाब कहिए क्या पूछना है?
चीफ जस्टिस - जब आपने 12 अक्टूबर को याचिका दायर कर दी जो Defective थी, तो फिर उसी दिन सुप्रीम कोर्ट तक आप सभी का मार्च निकालने का क्या मतलब था, क्या आप हमें मार्च निकाल कर डराने की कोशिश कर रहे थे? आपके नेता तो अपने लोगों के साथ आकाशवाणी भवन में घुसने की कोशिश कर रहे थे?
वकील - नहीं जनाब, प्रदर्शन करना तो हमारा मौलिक अधिकार है।
चीफ जस्टिस - फिर प्रदर्शन से मामला सुलझा लीजिए हमने क्या मतलब है?
इसके बाद चीफ जस्टिस ने सभी से पूछा कि “क्या आप मर्द हैं”
वकील जी जनाब हम में अधिकतर मर्द हैं।
चीफ जस्टिस - फिर 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन में इस नारे का क्या मतलब था “एक कचौरी दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा”? इसका जवाब CPI और TMC के वकील दें जो CJP के आंदोलन को समर्थन दे रहे थे। इस नारे का CEC को हटाने से क्या मतलब है ?
कोर्ट में सन्नाटा छा गया -
फिर चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या हम महिला वकीलों को कोर्ट में practice के लिए ड्रेस कोड की जगह “Undergarments” में आने की इजाजत दे दें क्योंकि प्रदर्शन में लड़कियां “Undergarments” में थी और कह रही थी कि अगर लड़के चड्डी बनियान में घूम सकते हैं तो हम क्यों नहीं? इस बात का CEC को हटाने से क्या मतलब था ?
कोर्ट में सन्नाटा छाया रहा।
फिर चीफ जस्टिस एक और बड़े वकील पर बरसे और कहा कि “आप तो कहते हो अब सुप्रीम कोर्ट जाने का दिल नहीं करता क्योंकि अब कोर्ट पर भरोसा नहीं रहा” तो फिर यहां क्या तेल लेने आए हो ?
वकील की घिग्घी बंध गई।
फिर चीफ जस्टिस दूसरे वकील पर बरसे - आप तो bloodshed से Revolution की बात कर रहे थे कल, फिर सुप्रीम कोर्ट से क्या मतलब है?
वकील दाएं बाएं देखने लगा और बोला, जनाब मेरी बात का गलत मतलब निकाला गया।
चीफ जस्टिस गरजे - हमें बेवकूफ समझ रखा है, इस बात पर हम तुम्हारी practice पर बैन लगा सकते हैं।
चीफ जस्टिस ने फिर वकीलों से पूछा कि आपको SIR से परेशानी है और वोट चोरी का आरोप लगा रहे हो तो फिर आपकी पार्टियां तमिलनाडु और केरल में कैसे जीत गई?
कोर्ट में फिर सन्नाटा छा गया।
एक सवाल और किया चीफ जस्टिस ने कि आप में से कोई भी वकील बता सकता है कि एक 14 साल की लड़की का NEET आंदोलन से क्या मतलब था और वो वहां मोदी की तेरहवीं के समोसे और खाना बांट रही थी और उसका ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से क्या मतलब है जबकि उसका तो वोट ही नहीं है?
सुई पटक सन्नाटा छाया रहा कोर्ट में।
चीफ जस्टिस ने पूछा कांग्रेस का वकील कौन है - एक बोला, जनाब मैं हूँ।
CJI भड़क गए - तुम्हें मेरा इस्तीफ़ा चाहिए, बोलो, क्या यहां तुम्हारे हाथ में सौंप दू क्या? तुम्हारी औकात है क्या नया चीफ जस्टिस बनाने की?
वकील खामोश।
फिर चीफ जस्टिस ने सुनवाई स्थगित कर दी - अगली तारीख बता दी जाएगी।

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